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घरों में नमाज पढ़ी, एक-दूसरे से कहा- ईद मुबारक:शहरभर में ईद उल अजहा का पर्व काेराेना संक्रमण को देखते हुए एहतियात के साथ मनाया

श्रीगंगानगर7 दिन पहले
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अशाेकनगर बी इमामबाड़े में ईद की  नमाज अदा करते मुस्लिम समाज के लाेग। - Dainik Bhaskar
अशाेकनगर बी इमामबाड़े में ईद की नमाज अदा करते मुस्लिम समाज के लाेग।

कुर्बानी का पर्व ईद-उल-अजहा बुधवार को अकीदत के साथ मनाया गया। महामारी के संक्रमण को देखते हुए इस बार भी मुस्लिम समाज ने घर पर रहते हुए खुदा की इबादत की। इसके बाद कुर्बानी दी गई। बंदाें ने गले मिलकर बधाई देने से भी परहेज किया।

इसकी जगह एक-दूसरे को दूर से ईद मुबारक कहकर शुभकामनाएं दी। पुरानी आबादी स्थित ईदगाह सूनी रही। मस्जिदों में नमाज तो हुई, लेकिन इस दौरान इमाम समेत सिर्फ 5 लोग ही मौजूद रहे। दरअसल, कोविड-19 के संक्रमण ने इस बार सभी त्योहारों की मिठास फीकी कर दी है।

एफ ब्लाॅक स्थित जामा मस्जिद में डाॅ. मुफ्ती एमएचएफ कासमी ने नमाज अदा करवाई। मुस्लिमों ने रमजान भी घर के भीतर मनाया था और बुधवार को भी बकरीद का जश्न भी घरों में ही मनाया गया। पहले की तरह ईदगाह जाने के बजाय लोगों ने घरों में चाश्त की नमाज अदा की।

कुर्बानी देने के बाद गोश्त भी गरीबों और नाते-रिश्तेदारों में बांटने की जगह पड़ोसियों में तकसीम किया गया। बता दें कि, ईद उल फितर के बाद ईद उल अजहा यानी बकरीद मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा पर्व है।

दोनों ही मौकों पर ईदगाह जाकर या मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है। ईद-उल फितर पर शीर खुरमा बनाने का रिवाज है, जबकि ईद-उल अजहा पर बकरे या दूसरे जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। हालांकि, इस साल कोरोना वायरस के संकट की वजह से स्थिति अलग है।

पूरे विश्व को कोरोना महामारी से बचाने की दुआ मांगी

ऑल इंडिया शिया फाउंडेशन के स्टेट प्रेसीडेंट सैयद रजा अब्बास नकवी ने बताया कि बकरीद के मौके पर शहर के मस्जिदों में फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ नमाज पढ़ी गई। मस्जिदाें में ज्यादा भीड़ पर पाबंदी रही। इस दौरान मस्जिद में इमाम सहित सिर्फ 4- 5 लोग ही मौजूद रहे। उन्हाेंने बताया कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए मुस्लिम समाज ने इस बार बकरीद मनाई। नमाज के दौरान सभी ने पूरे विश्व को कोरोना महामारी से बचाने की दुआ मांगी।

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