डॉक्टर्स-डे पर भास्कर विशेष / भारत सुरक्षित है क्योंकि हमारी तीनों सेनाएं थल, जल व वायु सेना सरहद पर मुस्तैद और काेरोनाकाल में सभी डॉक्टर 24 घंटे काम कर रहें

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 07:01 AM IST

श्रीगंगानगर. भारत सुरक्षित है क्योंकि हमारी तीनों सेनाएं थल, जल व वायु सेना सरहद पर मुस्तैद है। इसी तरह कोरोनाकाल में चिकित्सा की तीन पद्धति होम्योपैथी, आयुर्वेद व एलोपैथी के योद्धा भी अस्पतालों में जुटे हैं। मकसद- कोरोना से सबका बचाव।

लोगों में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए 51 हजार लोगों को बांटी गोलियां 

होम्योपैथी पद्धति

कोरोना वॉरियर्स पीएचसी लाधूवाला के होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. एनपी सिंह की कोरोना संक्रमण के दौरान मल्टीपर्पज वर्कर के तौर पर सेवाएं दी। सेंट्रल काउंसिल ऑफ रिसर्च इन होम्योपैथी ने होम्योपैथी दवा ऑर्सेनिक एलबम-30 दवा को कोरोना में इम्युनिटी बढ़ाने लिए असरकारक बताया।

इसी दौरान अप्रैल के पहले सप्ताह में डॉ. एनपी सिंह ने दवा की इम्यून बूस्टर डोज को वितरण अपने स्तर पर शुरू किया। दो सप्ताह से ज्यादा समय तक रोजाना करीब 50-60 डोज का वितरण काेरोना ड्यूटी कर रहे मेडिकल स्टाफ व अन्य लोगों को करते हुए कोरोना से बचाव के उपाय बताए।

इसके बाद होम्योपैथी निदेशालय ने सरकारी स्तर पर इम्यून बूस्टर डोज वितरण के आदेश दिए तो अनूपगढ़ व घड़साना ब्लॉक में होम्योपैथी स्टाफ नहीं होने की दिक्कत आई। तब वहां एलोपैथी डॉक्टर्स व एनजीओ का सहयोग लेकर लोगों पर बूस्टर डोज पहुंचाई। बूस्टर डोज वितरण के जिला प्रभारी रहे डॉ. एनपी सिंह के अब तक 51409 बूस्टर डोज किट वितरित कर चुके हैं। 

खुद काढ़ा तैयार करते हैं, संदिग्ध व पाॅजिटिव रोगियों को पिलाते हैं

आयुर्वेद पद्धति


वैद्य डॉ. राजकुमार पारीक औषधालय में रोजाना सुबह-शाम आयुर्वेदिक काढ़ा तैयार करते हैं। इसके बाद क्वारेंटाइन सेंटर्स पर रखे गए संदिग्ध रोगियों के अलावा जिला अस्पताल के पॉजिटिव रोगियों को पिलाते हैं। अपने सहयोगियों के साथ अस्पताल के कोरोना पाॅजिटिव जोन में जाकर कोरोना संक्रमित रोगियों को अपनी देखरेख में काढ़ा परोसते हैं। डॉ. पारीक के अनुसार अब तक 350 से ज्यादा क्वारेंटाइन सेंटर पर रखे कोरोना संदिग्ध और जिला अस्पताल में उपचाराधीन कोरोना संक्रमित मरीजों को काढ़ा पिलाया जा चुका है।

काढ़े के स्वाद और इसे पीने के बाद हुए अहसास का फीडबैक लगातार लेता रहता हूं। डॉ. पारीक इन दिनों कोरोना पाॅजिटिव रोगियों के संपर्क में रहने की वजह से घर पर भी खुद को परिवार से दूर रख रहे हैं। अलग कमरे में रहते हैं और खुद ही कपड़े धोते हैं। डा. शर्मा इससे पूर्व  वर्ष 2017 में आयुर्वेद औषधालय दौलतपुरा का जनसहयोग से 37 लाख रुपए जुटाकर जीर्णोद्धार करने पर आयुर्वेद विभाग की ओर से राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं। 

कभी भी आए कोरोना रोगी, खुद खड़े रह करवाते हैं सैंपलिंग-सर्वे 

एलोपैथी पद्धति

दिन गुरुवार, तारीख- 25 जून। दोपहर 3 बजे तक मरीज देखकर पीएचसी पुरानी आबादी के इंचार्ज डॉ. राजन गोकलानी अपने घर पहुंचते हैं। खाना खाने बैठते हैं कि फोन आता है- वार्ड 20 में कोराेना रोगी मिला है। डा.गोकलानी जल्दी में खाना खाते हैं और तत्काल रवाना हो जाते हैं। वहां एएनएम से एक-एक घर का सर्वे करवाते हैं।

हाई रिस्की लोगों को चिन्हित करते हैं। डा.गोकलानी बताते हैं, 90 दिन से भी ज्यादा का समय हो गया, अब तो यही रूटीन बन गया है। दिन में पीएचसी में मरीज देखो, फिर दोपहर से रात तक फील्ड में जाकर कंटेनमेंट जोन में जाकर सर्वे करवाओ। क्लोज कांटेक्ट वालों के सैंपल करवाओ।

कई बार तो रात को किसी के घर से फोन आता है तो वहां भी मरीज देखता हूं। कोशिश यही रहती है- कोरोना काल में किसी की भी इलाज के अभाव में मौत न हो। पुरानी आबादी में कोरोना के 7 मरीज मिल चुके हैं। बीते दिनों पूरे इलाके में 11 हजार लोगों का सर्वे करवाया, जिनमें 300 को हाई रिस्की चिन्हित किया गया। काफी दिन तो ऐसे भी बीते, जब घर में रहने के बावजूद वे परिवार से दूर रहे। बाहर के कमरे को ही उन्होंने घर बना लिया था।

डॉक्टर्स को भास्कर का सलाम|काेरोनाकाल में सभी डॉक्टर 24 घंटे काम कर रहे हैं। कुछ तो अपने घर भी नहीं जा पा रहे हंै। आज आप इनका सम्मान जरूर कीजिए।  

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