गांव जहां हर घर में है हैंडबॉल खिलाड़ी:हैंडबॉल की नर्सरी है गांव लालगढ़ जाटान, हर घर में हैं प्लेयर्स, भारतीय  हैंडबॉल टीम के कप्तान रहे जैन प्रसाद इसी गांव के रहने वाले

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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श्रीगंगानगर का लालगढ़  जाटान, जहां बड़ी संख्या में हैंडबॉल  खिलाड़ी तैयार होते हैं। - Dainik Bhaskar
श्रीगंगानगर का लालगढ़ जाटान, जहां बड़ी संख्या में हैंडबॉल खिलाड़ी तैयार होते हैं।

शहर से सटे गांव लालगढ़ जाटान की पहचान इलाके में हैंडबॉल नर्सरी के रूप में है। गांव के हर घर में एक-दो हैंडबॉल खिलाड़ी जरूर मिल जाएंगे। करीब 35 वर्ष पहले इस गांव में हैंडबॉल के प्रति प्रेम की शुरुआत हुई। जब यहां एक शिक्षक ने गांव के कुछ स्टूडेंट्स को हैंडबॉल की प्रैक्टिस के लिए तैयार किया। शिक्षक के प्रयास रंग लाए और गांव के कुछ खिलाड़ी खेलने के लिए आगे आए। एक बार खिलाड़ी स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताओं में खेलने गए तो यह परम्परा ही बन गई।

शिक्षक राजकुमार शर्मा का योगदान महत्वपूर्ण
पूर्व खेल अधिकारी उम्मेद सिंह बताते हैं कि वे खुद भी हैंडबॉल के खिलाड़ी रहे हैं। लालगढ़ जाटान में खेल की शुरुआत की बात करें तो यह वर्ष 1986 के आसपास रही। यहां शिक्षक नियुक्त हुए थे राजकुमार शर्मा। शर्मा खुद भी हैंडबॉल के खिलाड़ी थी। ऐसे में उन्होंने यहां हैंडबॉल के लिए खिलाड़ियों को तैयार किया। उम्मेद सिंह भी तब युवा थे। उन्होंने भी शर्मा का साथ दिया और हैंडबॉल के मैदान तैयार करवाए। इस तरह से हैंडबॉल की शुरुआत हुई और यह बढ़ती चली गई।

शर्मा के बाद भादू ने किया कमाल

लालगढ़ जाटान में हैंडबाल शुरू करवाने तथा उसके आगे बढ़ाने में दूसरे प्रशिक्षक थे रिछपाल भादू। भादू ने लगातार खेल के लिए काम किया। उन्होंने इलाके के लिए कई अच्छे खिलाड़ी तैयार किए। राजकुमार शर्मा के प्रयासों के परिणाम स्वरूप करीब आठ वर्ष बाद 1994 में परिणाम आने शुरू हुए। कई खिलाड़ी महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में जीतकर आने लगे। इसके बाद इस परम्परा को आगे बढ़ाने वालों में रिछपाल भादू थे। उन्होंने हैंडबॉल के लिए समर्पण के साथ काम किया तथा कई अच्छे खिलाड़ी तैयार किए। भादू का वर्ष 2002 में निधन हो गया।

सौ से ज्यादा खिलाड़ी खेले इंटरनेशनल मुकाबले

गांव में शायद ही ऐसा कोई घर हो जहां हैंडबॉल के खिलाड़ी नहीं हो। हैंडबॉल का जुनून गांव के बच्चे बच्चे में सवार है। गांव देश भर में हैंडबॉल हब के नाम से मशहूर है l इस गांव के हैंडबॉल के 100 से ज्यादा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं..राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों की यहां गिनती ही नहीं है।

गांव ने दिए कई अच्छे खिलाड़ी

गांव ने कई अच्छे खिलाड़ी दिए हैं। हैंडबॉल की भारतीय टीम के कप्तान रहे डिप्टी कमांडेंट व महाराणा प्रताप सर्वोच्च अवार्ड से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जैन प्रसाद भी इसी गांव से हैं। इसके अलावा महाराणा प्रताप सर्वोच्च अवार्ड से सम्मानित सूबेदार राकेश सहारण भी इसी गांव से हैं जो नागपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गांव के 150 से ज्यादा खिलाड़ियों ने नेशनल स्तर व राज्य स्तर पर गोल्ड मैडल हासिल किए हैं l

हैंडबाल ने दी सरकारी नौकरियां

लालगढ़ जाटान के युवाओं को हैंडबाल की वजह से सरकारी नौकरियां भी नसीब हुई हैं। इनकी संख्या एक सौ से ज्यादा हैं। अकेले इस गांव से 40 से ज्यादा शारीरिक शिक्षक हैं। इसके अलावा सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, वायुसेना, नौसना, रेलवे राजस्थान पुलिस आदि में भी गांव के युवा बड़ी संख्या में हैं। राज्य सरकार ने यहां एक हैंडबॉल एकेडमी खोलने की तैयारी भी की है लेकिन इसकी प्रक्रिया अब तक आगे नहीं बढ़ी है। पूर्व खेल अधिकारी उम्मेद सिंह बताते हैं कि वैसे तो इलाके के कई गांवों में हैंडबॉल के अच्छे खिलाड़ी सामने आए हैं लेकिन गांव लालगढ़ जाटान में तो कई खिलाड़ी उच्च स्तर तक खेले। यहां के खिलाड़ी एशियन चैम्पियनशिप, साउथ एशियन फैडरेशन गेम्स आदि में खेल चुके हैं।

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