जन संकल्प से हारेगा कोरोना:15 साल से किडनी पेशेंट, सीटी स्कोर 18 व बीपी 200 तक पहुंचा, यहां निजी अस्पतालों ने मना किया, 8 दिन मोहाली में भर्ती...सही होकर लौटी

श्रीगंगानगर6 महीने पहले
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  • कोरोना संक्रमण होने के बावजूद मजबूत इच्छा शक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानी

सकारात्मक साेच, पुनीत कार्य और बड़ाें के आशीर्वाद का ही नतीजा है कि मैंने काेराेना काे हराया। आज परिवार के साथ राजी खुशी जीवन यापन कर रही हूं। पिछले साल काेराेना की पहली लहर काे भी काेई भूला नहीं सकता। 18 अक्टूबर 2020 की सुबह मुझे बुखार हाे गया।

एक बार संदेह हुआ कि कहीं काेराेना ताे नहीं हाे गया। लेकिन तब न ताे खांसी हुई, न सांस की तकलीफ और न ही गले में खराश। ऐसे में सामान्य बुखार ही समझ शहर के एक डाॅक्टर काे पूरी बात बताई।

उन्हाेंने डेंगू-मलेरिया का जांच करवाई, लेकिन यह जांच निगेटिव आूई। इस पर काेराेना की जांच करवाई ताे पाॅजीटिव रिपाेर्ट मिली। इस पर एक बारगी सभी घबरा गए। शहर के एक निजी अस्पताल पहुंचे ताे उन्होंने एडमिट करने से ही मना कर दिया क्योंकि मेरा सीटी स्कोर 18 व बीपी 200 था। 15 साल से किडनी पेशेंट भी थी। परिजन मुझे जिला अस्पताल ले गए, जहां एक रात भर्ती रही, लेकिन राहत नहीं मिली।

अगले ही दिन 25 अक्टूबर काे एंबुलेंस करके माेहाली के आईवीवाई अस्पताल ले जाया गया। जहां 8 दिन भर्ती रखा गया। भर्ती वाले दिन कुछ ही समय बाद आसपास के दाे बेड पर भर्ती पेंशेट की काेराेना से मृत्यु हाे गई। थाेड़ी घबराहट ताे हुई, लेकिन मैंने आस नहीं छाेड़ी। खुद काे टूटने नहीं दिया। सार्थक परिणाम भी सामने आए, अस्पताल से जैसे ही छुट्टी मिली, श्रीगंगानगर तक कार में पति आशीष अराेड़ा के साथ बैठे हुए आई। 31 अक्टूबर काे बेटे अविश का जन्मदिन था। अस्पताल में बेड पर लेटी थी। ऑक्सीजन लगी हुई थी। बेटे की बहुत याद आ रही थी। लगा कि वह बहुत परेशान हाे रहा हाेगा। उसे बधाई दूंगी ताे उसे बहुत अच्छा लगेगा, मैंने ऑक्सीजन हटा दी। बेटे काे माेबाइल पर बधाई दी। दिल काे बहुत सुकून मिला। आत्मविश्वास में बहुत वृद्धि हुई। ऑक्सीजन की जरूरत भी महसूस नहीं हाे रही थी। अगले दिन ही पति काे बुलाकर श्रीगंगानगर चलने के लिए कह दिया और मुझे इसके बाद काेई तकलीफ नहीं हुई।

2 नवंबर को अस्पताल से छुट्‌टी मिली और 4 को करवा चौथ का व्रत रखा।मेरा हमेशा प्रयास रहा है कि निगेटिव विचार नहीं आएं। 7 फरवरी 2007 काे किडनी ट्रांसप्लांट हुई, इसके बाद मुझे लंबे समय तक हैवी स्टेराइड दी गई। डाॅक्टराें की सलाह पर हरी सब्जियां, दाल, दूध, दही, मीठे व खट्टे फल नहीं खा सकती। दांत में भी तकलीफ हाेने लगी है।

लेकिन परिवार के साथ हमेशा खुशी महसूस हाेती है। विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने की शाैक है। साल में लगभग 30 दिन ऐसे हाेते हैं कि जब हम दाेनाें का पूरा समय भारतीय संस्कृति और धर्म काे समर्पित रहता है। बीते 5 साल से गाेपीराम गाेयल की बगीची में रामलीला में पति आशीष मेघनाद ताे मैं सुलाेचना का अभिनय करती हूं।

घर में भी ऐसा ही माहाैल हमेशा रहे, ताकि पारिवारिक वातावरण शुद्ध रहे और बच्चे काे अच्छे संस्कार मिले। बस ईश्वर से यही प्रार्थना है लाेग काेराेना के प्रति सतर्क रहें, डरें नहीं। फिर भी संक्रमण हाे जाए ताे हाैसला और हिम्मत बनाए रखें।

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