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300 से 500 रुपए का हुआ ऑक्सीजन सिलेंडर:श्रीगंगानगर में ऑक्सीजन की कमी,केंद्र सरकार ने एक दिन पहले ही दावा किया था कि देशभर में कहीं भी आक्सीजन की किल्लत नहीं है

श्रीगंगानगर13 दिन पहले
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  • जिला अस्पताल में भी इस माह लगातार काेरोना बढ़ने से ऑक्सीजन खपत बढ़ी
  • अस्पतालों का मरीज भर्ती करने से इंकार सामान्य ऑपरेशन में 5 से 7 दिन का इंतजार बढ़ा

केंद्र सरकार ने एक दिन पहले ही दावा किया था कि देशभर में कहीं भी आक्सीजन की किल्लत नहीं है। हर रोज खपत 5000 टन की है, जबकि उत्पादन 6900 टन का हाे रहा है। इस लिहाज से 1900 टन आक्सीजन अतिरिक्त है। लेकिन सरकार के इन दावों के विपरीत श्रीगंगानगर जिले में आक्सीजन का बड़ा संकट पैदा हो गया है। संकट भी ऐसा कि प्राइवेट अस्पताल अब मरीजों को भर्ती करने से ही मना करने लगे हैं। सामान्य

ऑपरेशन के लिए मरीजों को 5 से 7 दिन इंतजार करने को कहा जा रहा है। कोरोना काल में औसतन रोज 50 पॉजिटिव मिल रहे हैं और इस वायरस का असर फेफड़ों पर ही सबसे ज्यादा पड़ता है। लिहाजा सांस की तकलीफ हाेने पर ऑक्सीजन की जरूरत सबसे ज्यादा पड़ती है। अब हालात ये हैं कि पहले अस्पतालों में हर रोज आक्सीजन की 100 सिलेंडर की खपत थी, जो अब बढ़कर 300 तक पहुंच गई है। एकाएक मांग बढ़ने

के कारण आक्सीजन तैयार कर रही कंपनियों ने दो से तीन गुणा रेट बढ़ा दिए हैं। पिछले एक पखवाड़े से आक्सीजन का संकट पैदा होने लगा है, जो गहराता ही जा रहा है। पड़ताल में सामने आया कि श्रीगंगानगर में आक्सीजन की सप्लाई हरियाणा व हिमाचल राज्यों से होती है। अब वहां के प्लांटों को सरकारों ने आदेश दिए हैं कि पहले अपने राज्य की जरूरतों को पूरा करें, फिर दूसरे राज्यों को सप्लाई भेजी जाए।

300 से 500 रुपए का हुआ ऑक्सीजन सिलेंड
ऑक्सीजन गैस के सप्लायर राजेश गोयल के अनुसार कोरोना से पूर्व फरवरी मार्च में ऑक्सीजन का रेट 12 से 14 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर था। रेट बढ़ते-बढ़ते अब 69 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गए हैं। चार से पांच गुणा तक रेट बढ़ने से 250 से 300 रुपए वाला सिलेंडर अब 500 रुपए तक पहुंच गया है। गोयल के अनुसार कोरोना की वजह से ऑक्सीजन की खपत ज्यादा बढ़ने से आपूर्ति कम पड़ गई है। उनके पास हनुमानगढ़ के अलावा मेडिकल काॅलेज बीकानेर से भी ऑक्सीजन की मांग होेने लगी है।

हमारे लिए सबक...मास्क लगाकर रखें, कोरोना से बचें

1. हाई प्रेशर फ्लो में ऑक्सीजन देनी होती है: जिला अस्पताल के कोरोना वार्ड में इन दिनों औसतन प्रतिदिन 80 भर्ती रहते हैं। यहां रोजाना करीब 20 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। कोरोना निगेटिव वार्ड के आईसीयू में हर रोगी को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर्स के अनुसार कोरोना रोगियों का ऑक्सीजन स्तर कम हाेता है। इसी वजह से कोरोना रोगियों को हाई प्रेशर फ्लो में ऑक्सीजन देेनी पड़ती है।

2. रीफिलिंग के 5 से 7 दिन की वेटिंग: पहले श्रीगंगानगर में हर माह 21-21 टन क्षमता के 4 से 5 टैंकर आते थे। अब कभी 10 टन तो कभी 4 से 5 टन गैस की आपूर्ति ही हो रही है। इसी वजह से रीफिलिंग के 5 से 7 दिन की वेटिंग होने लगी है। कार्यवाहक पीएमओ डॉ. रवि भगत के अनुसार इन दिनों में कोरोना मरीजों की वजह से ऑक्सीजन की खपत बढ़ी है। ज्यादा गंभीर रोगियों को नियमित रूप से आक्सीजन देनी पड़ रही है।

जिला अस्पताल में भी इस माह लगातार काेरोना बढ़ने से ऑक्सीजन खपत बढ़ी

पहले सामान्य आईसीयू व सीसीयू में 13 बेड व एसएनसीयू में नवजात बच्चों को ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती थी। इन मरीजों को लो प्रेशर फ्लो में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। अब अस्पताल में कोरोना व नॉन कोरोना सहित 40 मरीजों को प्रतिदिन ऑक्सीजन लगाने की जरूरत पड़ती है। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों के अनुसार कोरोना काल से पहले हर महीने 7 क्यूबिक मीटर आॅक्सीजन गैस क्षमता के 70 सिलेंडरों की प्रति माह खपत होती थी। अब कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है। लिहाजा हर महीने 150 सिलेंडर से भी ज्यादा की खपत होेने लगी है। िसतंबर में तो कोरोना बढ़ने के कारण यह मांग और बढ़ गई है।

इस कारण कमी...ऑक्सीजन प्लांट पहले अपने राज्यों को कर रहे सप्लाई
श्रीगंगानगर में ऑक्सीजन की आपूर्ति हरियाणा के पानीपत, गुुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश के बद्दी, यूपी अौर उत्तराखंड के प्लांटों से होती है। यहां से टैंकर से लिक्विड फॉर्म में ऑक्सीजन श्रीगंगानगर शहर तक पहुंचाई जाती है। यहां इसे तरल से गैस के फाॅर्म में तबदील कर सिलेंडर की रीफिलिंग की जाती है, जिसकी अस्पतालों को आपूर्ति की जाती है। इन दिनों में ऑक्सीजन प्लांट अपने राज्यों के अस्पतालों की मांग पूरी क

...और इसका असर: ऑक्सीजन न होने से मरीज ही भर्ती नहीं कर रहे
एक बुजुर्ग महिला की निमोनिया की वजह से तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन बुधवार को उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए। अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए रोगी को भर्ती नहीं किया कि उनके पास ऑक्सीजन नहीं है। जन सेवा अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मोहित टांटिया के अनुसार ऑक्सीजन की कमी से अब सामान्य सर्जरी के केस टाले जाने लगे हैं। उन्होंने मरीजों को आगाह किया है कि ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने की वजह से अगले एक दो दिनाें में उन्हें किसी हायर सेंटर पर जाना पड़ सकता है।

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