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पत्रकार वार्ता:पानी-बिजली के बिलों में छूट नहीं, टैक्स भी भरें, फिर स्कूलों के फीस लेने पर प्रतिबंध क्यों: हेमलता

श्रीगंगानगर2 महीने पहले
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  • शिक्षा मंत्री पर द्वेषपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया, शिक्षा बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने रखी अपनी बात

प्रदेश में निजी शिक्षण संस्थानाें में कार्यरत 11 लाख कर्मचारी जिसमें शिक्षक, सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी, ड्राइवर व विद्यालयाें से प्रत्यक्ष व अत्यक्ष ताैर पर जुड़े कामगाराें काे 3-4 माह से वेतन नहीं मिला। आर्थिक तंगी की वजह राजस्थान में अब तक 4 स्कूल संचालक आत्महत्या कर चुके हैं। दूसरी ओर राज्य सरकार शिक्षा के मंदिराें काे बंद करवाना चाह रही है। शिक्षा बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति राजस्थान महासंघ की मुख्य समन्वयक हेमलता शर्मा कुछ इस तरह से सरकार के प्रति राेष जताया।

शर्मा गुरुवार काे अराेड़वंश पब्लिक स्कूल के सभागार में पत्रकाराें से बातचीत कर रहीं थी। उन्हाेंने शिक्षा मंत्री द्वेष पूर्ण रवैया अपनाने का अाराेप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री गाेविंद सिंह डाेटासरा के बयान व लिखित आदेश के बाद प्राइवेट स्कूलाें की स्थिति और अधिक खराब हाे गई है।

उन्हाेंने कहा जाे अभिभावक फीस जमा करवाने में सक्षम थे, शिक्षामंत्री के बयान के बाद वे भी फीस नहीं दे रहे। महासंघ की मुख्य समन्वयक कहा कि काेराेना वायरस के नाम पर स्कूल बंद हैं, निर्देश जारी हुए हैं कि अभिभावकाें काे फीस के लिए परेशान नहीं किया जाए, अन्यथा कार्रवार्ई की जाएगी। दूसरी ओर बिजली पानी के बिल माफ नहीं किए गए। टैक्स भी वसूला जा रहा है।

ऐसे में निजी स्कूलाें पर ही प्रतिबंध क्याें? इस माैके पर प्रवक्ता सीमा शर्मा, मुख्य संयाेजक हरभान सिंह कुंतल, मनसुख सारस्वत अध्यक्ष गैर सरकारी विद्यालय संघ श्रीगंगानगर, संयाेजक प्रविंद्र सिंह महातम, गुरदीपसिंह, सुरेंद्र गाेदारा, महासचिव विकास शर्मा, अनूप स्वामी, ब्लूमिंग डेल्स स्कूल प्रिंसीपल मीतू शर्मा सहित अन्य माैजूद रहे।

सरकार शून्य सैशन घाेषित कर दे, संस्थान फीस नहीं मांगेंगे

अराेडवंश ट्रस्ट के अध्यक्ष साेनू नागपाल ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थाओं ने 25 फीसदी फीस माफ की घाेषणा की हुई है। इसके बावजूद अभिभावकाें ने फीस जमा नहीं करवाई। ग्रामीण इलाकाें में स्कूलाें में फीस फसल कटाई के बाद आती है। मार्च में काेराेना की वजह से लाॅकडाउन लग गया ऐसे में स्कूलाें के पास फीस आई ही नहीं। कई शिक्षण संस्थान ताे ऐसे भी हैं जिनके पास छात्राें का दाे से तीन साल की फीस पूरी नहीं आई।

अरोड़वंश स्कूल के अध्यक्ष कपिल असीजा ने कहा कि स्कूलाें का आरटीई का भुगतान आज तक नहीं हुआ। पदाधिकारियाें ने कहा कि सैशन शून्य घाेषित कर दे ताे संस्थान फीस नहीं मांगेंगे। आराेप लगाया कि राज्य सरकार हाेटलाें से चल रही है। विधायकाें पर कराेड़ाें रुपए खर्च किए जा रहे हैं। निजी शिक्षण संस्थानाें की अनदेखी की जा रही है। सरकार

हमारा विराेध अभिभावकों से नहीं, सरकार से है, हम भरपाई की मांग कर रहे हैं : हेमलता शर्मा

सवाल: बच्चा एक दिन भी स्कूल नहीं गया, ताे अभिभावक फीस क्याें भरें।
जवाब : हम बच्चाें काे ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं, अध्यापक तीन गुणा अधिक मेहनत कर रहें हैं। स्टाफ काे वेतन देने के लिए फीस जरूरी है।
सवाल: कितने बच्चाें ने ऑनलाइन क्लास अटेंड की, अभिभावकाें काे माेबाइल व नेट पर भी रुपया खर्च करना पड़ा है, क्या बच्चाें ने कुछ सीखा भी है?
जवाब: सही है कि अभिभावकाें का खर्चा हुआ है, जाे लाेग सक्षम हैं वे ताे फीस जमा करवा सकते हैं।
सवाल : महंगी पाठ्य सामग्री, मनमानी फीस, हर साल एडमिशन फीस, विद्यालय के खुद के बेतहाशा खर्च इसका खामियाजा अभिभावक क्याें भुगतें?
जवाब: अभिभावक अच्छी पढाई व स्टेटस आदि देखकर बच्चाें काे स्कूलाें में दाखिला दिलाते हैं। हमारा विराेध अभिभावकाें से नहीं, सरकार से है। सरकार से मांग कर रहे हैं कि निजी शिक्षण संस्थानाें की भरपाई करे, ताकि स्टाफ काे वेतन दिया जा सके। स्कूलाें के खुद के भी बहुत खर्चे हैं। जिससे बिल्डिंग निर्माण, लाइट-पानी, वाहन, बैंक कर्जा सहित अन्य।

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