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वीरपाल महिला:रिश्वतखोरों से डरी नहीं, उनका सामना किया एसीबी के नंबर जुटाए, शिकायत कर आरोपी को गिरफ्तार करवाया, एक फरार

श्रीगंगानगर11 दिन पहले
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  • दर्द...पति की बीमारी से माैत, मानसिक दिव्यांग देवर के साथ घर बसाने काे दबाव बनाया, नहीं मानी ताे हत्या का केस करवा दिया
  • दुख...एसएचओ का रीडर सरकारी अध्यापक के जरिए मुकदमे में एफआर लगवाने के लिए महिला से मांग रहा था 1.50 लाख रिश्वत
  • मांगीलाल स्वामी

आज एक ऐसी महिला के जीवन के संघर्ष की कहानी आपके सामने है, जिसने हिम्मत दिखाकर रिश्वतखोरों पर कार्रवाई करवाई। ये हैं 14 एसएचपीडी निवासी 32 वर्षीय वीरपालकाैर। पति की हत्या के झूठे मामले में जैतसर थाने के एसएचओ के रीडर व दलाल सरकारी अध्यापक ने केस में एफआर लगवाने के लिए महिला से 1.50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।

महिला ने एसीबी के डीजीपी बीएल साेनी से फाेन पर संपर्क किया और एक दलाल को ट्रेप करवाकर थाने के रीडर को भी बेनकाब कर दिया। इस मामले में एसएचओ का रीडर फरार है। वीरपाल कौर ने खुद भास्कर काे बताई अपनी जिंदगी की पीड़ा।

70 हजार बहन ने दिए, 40 हजार ब्याज पर लिए, 15 हजार में गहने बेच जुटाए रिश्वत के लिए डेढ़ लाख रुपए

मेरी शादी लखासिंह जटसिख के साथ करीब 14 साल पहले हुई थी। मेरे सास-ससुर शादी के दाे साल बाद ही बहाने ले लेकर मुझसे झगड़ा करते थे। हमें उन्हाेंने घर से निकाल दिया। मैं अपने पति के साथ अपने मायके आकर रहने लगी। फिर सामाजिक पंचायत में मेरे ससुर ने हमारे हिस्से की एक बीघा जमीन पर हमें मकान बनाकर रहने काे कहा। मेरे पति काे दूसरी लहर में काेराेना हुआ। 19 जुलाई 2021 काे हार्ट फेल से उनका निधन हाे गया। मेरे पास अस्पताल की दवा की पर्चियां माैजूद हैं।

मेरे पति की अंतिम अरदास के भाेग के दिन ही मेरे ससुरालियाें ने मुझे मानसिक बीमार व विकलांग देवर से शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब मैंने इस निर्णय का डटकर विराेध किया ताे मुझे मेरे पति के घर से ही निकाल दिया गया और बच्चे अपने पास रख लिए। मेरी 12 साल की बेटी और 10 साल का बेटा वहां से भागकर मेरे पास आ गए। मैं अपने बच्चाें के साथ बड़ी बहन के घर जाकर रहने लगी। इस दाैरान ससुराल वालाें ने मेरे खिलाफ जैतसर थाने में पति की हत्या के आराेप में मुकदमा दर्ज करवा दिया। इन आराेपाें की खुद एसएचओ मदनलाल बिश्नाेई जांच कर रहे थे।

एसएचओ के रीडर कांस्टेबल रमेश मीणा काे पता था कि मेरे पर लगाए गए आराेप बेबुनियाद और सरासर झूठे हैं। इसलिए वह इस मुकदमे में निर्दाेष करार दे दी गई है। फिर उसने अपने दलाल दाेस्त सरकारी अध्यापक भीमसेन ओड काे मेरे पास मेरी बहन के घर भेजकर इस मुकदमे से बचाने के बदले दाे लाख रुपए मांग लिए। मेरी माली हालत इतनी नाजुक है कि साै रुपए जुटाना भी बड़ी चीज है। मैंने अध्यापक भीमसेन काे देने काे डेढ़ लाख रुपए का इंतजाम किया। इसमें से मेरी बहन ने अपना मकान गिरवी रखकर 70 हजार रुपए की मदद की। मैंने 20-20 हजार रुपए दाे लाेगाें से ब्याज पर लिए। 25 हजार रुपए मैंने पिता से लाकर दिए। मैंने अपने गहने बेचकर 15 हजार रुपए जुटाए। इस तरह रिश्वत की रकम पूरी कर मास्टर भीमसेन ओड काे दी।

ऐसे मिली हिम्मत; परिवार से बात करके हनुमानगढ़ एसीबी से शिकायत की

वीरपालकाैर बताती हैं कि वह अखबाराें में पढ़ती थी कि एसीबी वाले रुपए लेकर काम करने वाले भ्रष्ट लाेगाें काे पकड़ते हैं। इसलिए मैंने भी हिम्मतकर एसीबी के माेबाइल नंबर पर फाेन कर दिया। मेरी बात डीजीपी बीएल साेनी से करवाई गई। उन्हाेंने मेरी सारी बात काे ध्यान से सुना और कहा-बेटी चिंता नहीं कराे। आपकी पूरी मदद की जाएगी। उन्हाेंने मुझे हनुमानगढ़ एसीबी चाैकी भेजा।

नॉलेज; कोई रिश्वत मांगे तो ऐसे करें कार्रवाई, पहचान गाेपनीय रहेगी

एसीबी के डीजीपी बीएल साेनी ने कहा है कि अगर आप भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम बढ़ाना चाहते हैं ताे एसीबी मुख्यालय की ओर से जारी टाेल फ्री नंबर 1064 पर अथवा साेशल मीडिया माेबाइल नंबर 94135-02834 पर भ्रष्टाचार करने वालाें की वीडियाे अथवा फाेटाे भेजकर शिकायत कर सकते हैं। अगर आप अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते ताे एसीबी इसके लिए उत्तरदायी है।

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