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राजनीति:अब जिला कांग्रेस को भी मिलेगा नया ‘पायलट’; अध्यक्ष संतोष सहारण समेत 9 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

श्रीगंगानगर10 महीने पहले
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  • श्रीगंगानगर से भी जुड़े हैं नए प्रदेशाध्यक्ष, जिले के प्रभारी मंत्री हैं डोटासरा, यहां के समधी भी

पीसीसी से सचिन पायलट की छुट्‌टी होने और उप मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त किए जाने के बाद जिले की राजनीतिक तस्वीर से पायलट खेमा हटता जा रहा है। पायलट खेमे के जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सहारण ने इस्तीफा दे दिया है।  

वहीं, कांग्रेस और उसके संबंधित अन्य संगठनों के 8 अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सहारण ने इस्तीफे की वजह सचिन पायलट की मेहनत की उपेक्षा होना और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं मिलना बताया है। सहारण 4 वर्ष 5 माह से जिलाध्यक्ष पद पर थे। नए जिलाध्यक्ष पद के लिए कई नेताओं ने लॉबिंग शुरू कर दी है। 

प्रदेश में तीन दिन से बन रहे नए राजनीतिक परिदृश्य में अटकलबाजियां शुरू हो गई थी कि अगर सचिन पायलट कमजोर पड़े तो जिले में उनके खेमे के नेताओं का हाशिए पर जाना तय है। मंगलवार दोपहर जैसे ही सचिन पायलट के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की खबर आई तो कुछ समय बाद ही जिलाध्यक्ष सहारण ने अपना इस्तीफा प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा को भेज दिया। बहरहाल, डोटासरा के प्रदेशाध्यक्ष बनने का जिले को भी फायदा होगा। यहां के वे प्रभारी मंत्री थे, साथ ही श्रीगंगानगर के वो समधी भी हैं।

पायलट ने पार्टी को गड्‌ढे से निकाला, उन्हें हटाने का तरीका प्रजातांत्रिक नहीं: सहारण
मंगलवार शाम को जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष संतोष सहारण ने कहा कि वर्ष 2014 से 2018 तक सचिन पायलट ने मेहनत कर कांग्रेस पार्टी को गड्‌ढे से निकाला। विधानसभा में 21 सीटों तक सिमटी कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचाया।

विपक्ष में चार साल तक सचिन पायलट और कार्यकर्ताओं ने मेहनत कर पार्टी को मजबूत किया। लेकिन उन्हें मेहनत का फल नहीं मिला। सहारण के अनुसार राजनीति और पार्टी में प्रतिद्वंद्विता रहती है लेकिन इसके चलते किसी को मूल्यों को दरकिनार कर मसलना राजनीतिक सिद्धांतों का हनन है। सचिन पायलट के साथ ऐसा ही हुआ है। सहारण का आरोप था कि सरकार बनने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिला।

उन्होंने कई कार्यकर्ताओं की राजनीतिक नियुक्तियों के लिए सूचियां दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सचिन पायलट के पार्टी से बाहर होने की परिस्थितियों के लिए कौन जिम्मेदार है? के जवाब में सहारण ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लिए बगैर कहा कि जिम्मेदार वो है जिसके हाथ में सरकार की बागडोर है। सहारण के अनुसार मंगलवार को हुए घटनाक्रम के बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से फीडबैक लिया। सभी की राय थी कि पार्टी कार्यकर्ताओं की भवनाओं का ध्यान नहीं रख रही है।

अब समय पार्टी में रहने के अनुकूल नहीं है। पायलट के भाजपा में जाने या नई पार्टी बनाने पर वे क्या कदम उठाएं, के सवाल पर सहारण का जवाब था कि उन्होंने पद छोड़ा है, पार्टी नहीं। वे राजनीतिक भविष्यवाणी नहीं कर सकते। अब भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनके नेता हैं।
इन्होंने दिया इस्तीफा
पीसीसी के सचिव व रायसिंहनगर पंचायत समिति के पूर्व प्रधान हरजिंद्र सिंह बराड़, कांग्रेस के जिला महासचिव श्याम शेखावटी, संगठन महासचिव कृष्ण भांभू, एनएसयूआई के उपाध्यक्ष अनिल महिया, प्रदेश महासचिव सुरेंद्र चोटिया व कर्ण सहारण, जिलाध्यक्ष मोहित भाकर व कांग्रेस आईटी सेल के जिलाध्यक्ष संजीव सहारण ने भी पायलट को हटाने के विरोध में  पद से इस्तीफा दे दिया है।
श्रीगंगानगर में यह असर....विस क्षेत्र में गाैड़ गुट अब और ज्यादा हावी होगा

विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री खेमे के निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ और सचिन पायलट गुट के अशोक चांडक के बीच गुटबाजी चल रही थी। विधानसभा चुनाव में पायलट गुट के अशोक चांडक को टिकट मिली तो गौड़ ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। विधायक बनने के बाद गौड़ ने अशोक गहलाेत को समर्थन दिया।

तब से गौड़ व चांडक खेमे में खींचतान चल रही थी। सचिन पायलट की प्रदेशाध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री न रहने से अब गौड़ गुट की कांग्रेस में सक्रियता बढ़ेगी। इससे पहले नगर परिषद चुनाव में अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए गौड़ को शक्ति प्रदर्शन करना पड़ा था।

सभापति चुनाव के लिए गौड़ समर्थक 8 पार्षदों ने लंबी जद्दोजहद के बाद कांग्रेस प्रत्याशी करुणा चांडक को समर्थन दिया था। अब सबकी नजरें पायलट गुट से जुड़े अशोक चांडक पर भी हैं। मंगलवार को वे श्रीगंगानगर से बाहर थे।

पायलट को अपनी बात पार्टी के अंदर रखनी चाहिए थी: कुन्नर

श्रीकरणपुर विधायक गुरमीतसिंह कुन्नर बोले-पायलट को अपनी बात पार्टी के अंदर रखनी चाहिए थी। पार्टी प्लेटफार्म पर नाराजगी का हल निकाला जा सकता था। इससे अगर वे 4 बात रखते तो 2 तो उनकी मानी ही जाती। जो कुछ हुआ, वह गलत हुआ है। 

सब दुखद, भाजपा से मिल सरकार गिराने की साजिश की थी: गौड़

श्रीगंगानगर के निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ के अनुसार जो भी हुआ वह दुखद है। भाजपा के साथ मिलकर सरकार बदलने की साजिश सही नहीं थी। सचिन को हाईकमान से चर्चा करनी थी न कि सरकार गिराने की साजिश।

मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता बनकर जनता की सेवा करता रहूंगा: चांडक

कांग्रेस नेता अशोक चांडक ने बताया कि मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं। मैंने पहले भी जनता की सेवा की है और आगे भी करता रहूंगा। पार्टी के साथ हमेशा जुड़ा रहूंगा। बाकी मैं अभी शहर से बाहर हूं। वापस लौटकर कार्यकर्ताओं से इस बारे में राय करूंगा। 

आगे क्या

जिलाध्यक्ष बनने को लाॅबिंग शुरू, संधू, जांदू कांडा व मील चर्चा में

कांग्रेस का नया कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को बनाया गया है। डोटासरा का पिछले डेढ़ साल से जिले से संपर्क है। इससे कई नेताओं ने जिलाध्यक्ष बनने की लॉबिंग शुरू कर दी है। इसमें पूर्व जिलाध्यक्ष पृथीपाल सिंह संधू, जिला उपाध्यक्ष प्रवीण धींगड़ा, पूर्व सभापति जगदीश जांदू, यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष ज्योति कांडा, पूर्व विधायक गंगाजल मील, महेंद्र मील, पूर्व प्रधान परमजीत सिंह रंधावा सहित कई नेताओं का नाम चल रहा है। विधायकों ने भी अपने पसंद का जिलाध्यक्ष बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
जिलाध्यक्ष का रिपोर्ट कार्ड: 3 चुनावों में कमजोर प्रदर्शन,  बदलाव की हो रही थी मांग
सहारण के जिलाध्यक्ष बनने के बाद  कांग्रेस का तीन चुनावों में प्रदर्शन कमजोर रहा। विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर हाेते हुए भी कांग्रेस दो सीटें ही जीत सकी। लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार हुई। नगरपरिषद चुनाव में  कांग्रेस 65 में से महज 19 वार्डों में ही जीत सकी। भाजपा इससे ज्यादा 24 वार्डों में जीती। जिलाध्यक्ष बदलने की मांग हो रही थी। इसके िलए गहलोत खेमा सक्रिय था लेकिन पायलट अड़चन बने हुए थे।

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