शहर के बीचोंबीच गड़बड़ी:शिव चाैक पर ऑयल मिल की जमीन काे कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री करवाई, अब कपड़ा मार्केट काटकर बेचे जा रहे भूखंड

श्रीगंगानगर2 महीने पहले
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पहले कलेक्टर की ओर से इसे गैर मुमकिन घाेषित किया जाना चाहिए था। - Dainik Bhaskar
पहले कलेक्टर की ओर से इसे गैर मुमकिन घाेषित किया जाना चाहिए था।
  • काॅलाेनाइजराें ने सरकार से मास्टर प्लान 2035 अप्रूव्ड हुए बिना ही 9 बीघा भूमि पर कमर्शियल भूखंड काटे
  • बाजार कीमत 60 करोड़ से ज्यादा, रजिस्ट्री 8 करोड़ में

शहर में शिव चाैक के नजदीक 9 बीघा भूमि पर कपड़ा मार्केट काटना खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि यह इंडस्ट्रीज की जमीन थी, नए मास्टर प्लान में इस जगह काे आवासीय बताया गया, लेकिन काॅलाेनाइजराें ने मास्टर प्लान 2035 राज्य सरकार से अप्रूव्ड हुए बिना ही अपने स्तर पर ही उक्त भूमि पर कपड़ा मार्केट काट दिया।

बड़ी बात यह है कि नए मास्टर प्लान में यह 9 बीघा भूमि आवासीय है और इस भूमि को लेकर कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं हुई। इस भूखंड काे आवासीय से व्यावसायिक कराने का दावा प्राेपर्टी डीलर कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई दुकानें बिक भी चुकी हैं।

बड़ी बात यह है कि यूआईटी की ओर से इस भूखंड के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर 7 दिन में दाे अलग-अलग जवाब दिए। 16 जुलाई काे बताया गया कि उक्त भूखंड का भू उपयाेग श्रीगंगानगर मास्टर प्लान 2017-2035 में व्यावसायिक प्रस्तावित है। जबकि 23 जुलाई काे दिए जवाब में आवासीय प्रस्तावित बता दिया गया। वहीं, मास्टर प्लान 2023 में उक्त भूखंड काे औद्याेगिक प्रस्तावित बताया गया।

इस भूखंड के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर नगर विकास न्यास ने 7 दिन में दाे अलग-अलग जवाब दिए

वार्ड 50 पार्षद प्रियंक भाटी ने बताया कि शिव चाैक पर मै. गणेश ऑयल एंड जनरल मिल्स लगभग 40-50 वर्ष पूर्व चलती थी। चक 3 ई छाेटी व 6 ई छाेटी की 2.315 हेक्टेयर जमीन खरीदकर इस जमीन पर काॅटन जिनिंग एंड प्रेसिंग फैक्ट्री स्थापित की गई। 1982 के बाद इस मिल काे घाटे के कारण बंद कर दिया गया।

यह जमीन इंडस्ट्रीज की है। यह जमीन पहले कृषि भूमि में कन्वर्ट हाेगी, इसके बाद ही यूआईटी की ओर से नियमानुसार काॅमर्शियल किया जा सकता है। काॅलाेनाइजर ने इस इंडस्ट्रीज की जमीन की रजिस्ट्री करवा ली। जबकि पहले कलेक्टर की ओर से इसे गैर मुमकिन घाेषित किया जाना चाहिए था।

फिर कृषि भूमि की रजिस्ट्री हाेनी चाहिए थी। मै. गणेश मिल के साझेदाराें की ओर से 12 मार्च 2021 काे मिल की 2.315 हेक्टेयर भूमि काे कृषि भूमि बताकर 8 कराेड़ रुपए में रजिस्ट्री करवा ली। जबकि उक्त भूखंड की माैजूदा कीमत 60-70 कराेड़ के लगभग है। सरकार को करोड़ों रुपए की राजस्व हानि हुई है।

जानिए... शिव चौक की नौ बीघा भूमि के बारे में : तहसील श्रीगंगानगर के चक 3 ई छोटी मुरब्बा नं. 38 के किला न. 6/0.253 हेक्टेयर, किला नं. 7/0.253 हेक्टेयर एवं किला नं. 8/0.038 हेक्टेयर, किला नं. 11/0.076 हेक्टेयर, किला नं. 12 से 15/ प्रत्येक 0.253 हेक्टेयर (कुल 1.632 हेक्टेयर) शिव चौक, रोडवेज डिपो के पास श्रीगंगानगर। तहसील श्रीगंगानगर के चक 6 ई छोटी मुरब्बा नंबर 1, किला न. 10/0.227 हेक्टेयर, किला नं.11/0.228 हेक्टेयर, किला नं. 20/0.228 हेक्टेयर (कुल .683 हेक्टेयर) शिव चौक, रोडवेज डिपो के पास श्रीगंगानगर।

पार्षद भाटी ने कहा...यूआईटी में कई बार शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई

वार्ड 50 पार्षद प्रियंक भाटी का कहना है कि शिव चौक के पास चक 3 ई छोटी के मुरब्बा नंबर 38 व चक 6 ई छोटी के मुरब्बा नंबर 01 में बिना स्वीकृति व मास्टर प्लान 2023 के विपरीत एक प्राइवेट बिल्डर ग्रुप के मार्केट काटने एवं व्यावसायिक कॉम्पलेक्स (250 दुकानों) को लेकर यूआईटी में शिकायत की गई। कई बार अधिकारियों को इस अवैध मार्केट के संबंध में अवगत कराया गया। वहीं मुख्यमंत्री, कलेक्टर को भी शिकायत की गई। लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई। भाटी ने बताया कि मास्टर प्लान में उक्त भूमि का भू उपयोग औद्योगिक, व्यावसायिक, सामुदायिक व सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित है।

इससे पहले भी मेरे सामने ये मामला आया था। यूआईटी से रिपाेर्ट ली गई है। माैके पर कुछ नहीं हाे रहा है। यूआईटी काे निर्देश दिए हैं कि अगर उस जमीन पर काेई गतिविधि हाेती है ताे उसे 90 बी की कार्रवाई के बाद ही इजाजत दी जाए। इस पर निगरानी रखी जाए। -जाकिर हुसैन, कलेक्टर व अध्यक्ष, यूआईटी

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