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नहीं लगेगा बाबा रामदेव का मेला:65 साल में दूसरी बार मेला नहीं भरने से पटियाला के खिलौना विक्रेता निराश, बोले दो पैसे कमाने की आस भी टूटी

श्रीगंगानगरएक दिन पहले
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श्रीगंगानगर में बाबा रामदेव मंदिर के सामने लगी दुकानें। - Dainik Bhaskar
श्रीगंगानगर में बाबा रामदेव मंदिर के सामने लगी दुकानें।

शहर में पिछले पैंसठ सालों से साल में दूसरी बार सूरतगढ़ मार्ग पर लगने वाला बाबा रामदेव का मेला इस बार नहीं हो पाएगा। प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है। ऐसे में श्रद्धालु तो किसी तरह से घरों में बाबा का पूजन और आरती कर लेंगे, लेकिन संकट उन खिलौना विक्रेताओं के सामने हो गया है जो इस मेले को कमाई के अवसर की तरह देखते हैं। इस बार कोरोना के कुछ कम होने से इन लोगों को मेला भरने की उम्मीद थी, लेकिन प्रशासन ने इसके लिए अनुमति नहीं दी। प्रशासन ने मंदिर में प्रवेश को लेकर जो गाइडलाइन जारी की है, उसके अनुसार मेले का हर वर्ष आयोजन करने वाले सेठ सुगनचंद चितलांगिया चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारी तैयार नहीं हैं। ट्रस्ट पदाधिकारी बताते हैं कि प्रशासन पुलिस उपलब्ध करवा देता है तो नियमों की पालना करते हुए दर्शन करवाए जा सकते हैं।

इनकी रोजी-रोटी पर मार
मेले का आयोजन नहीं होने की मार सबसे ज्यादा उन लोगों पर हुई जो पटियाला से यहां इसी उम्मीद से आए थे कि दो पैसे कमाकर लौटेंगे। यहां पटियाला से एक ही परिवार के कई लोगों ने अलग-अलग दुकानें लगाई हैं। इन्हीं लोगों में शामिल कैलाश बताते हैं कि वे हर वर्ष ही यहां आते हैं। चार-पांच हजार रुपए के खिलौने खरीद लाते हैं और दिनभर में हजार से डेढ़ हजार रुपए तक कमा भी लेते हैं। पहले कोरोना के कारण मेला हुआ ही नहीं। इस बार उम्मीद थी लेकिन मेले का आयोजन नहीं हो पाया। इन्हें के साथ पटियाला से आए रोहित का कहना था कि यहां तक आने का काफी किराया ही लग गया है। अब मेले पर रोक की जानकारी मिली है। लगता है इस बार तो जीप का किराया ही नहीं निकल पाएगा।
पीढ़ियों से लगा रहे हैं दुकान
इसी मेले में आए छोटूराम बताते हैं कि वे पीढ़ियों से यहां दुकान लगा रहे हैं। पिछले वर्ष तो कोरोना संकट ने परेशान किया। इस बार उम्मीद थी, लेकिन करीब तीन चार हजार रुपए के खिलौने खरीदने के बाद भी अब हजार रुपए की कमाई की भी उम्मीद नहीं है।

प्रशासन ने दिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दर्शन के निर्देश
प्रशासन ने मेले के आयोजन पर तो रोक लगाई है लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि एक समय में मंदिर में इतने ही लोगों को प्रवेश दें कि ज्यादा भीड़ नहीं हो। ऐसे में मंदिर प्रबंधन से जुड़े ट्रस्ट ने आयोजन करवाने से ही इनकार कर दिया। सेठ सुगनचंद चितलांगिया चैरिटेबल ट्रस्ट के विक्रम चितलांगिया बताते हैं कि सरकार की गाइड लाइन के बाद मेले का आयोजन करवाना संभव नहीं है। पुलिस प्रशासन से हमने जाब्ता मांगा है। जाब्ता मिलता है तो पुलिस की देखरेख में श्रद्धालु एक निर्धारित संख्या में मंदिर में प्रवेश कर निकलते रहेंगे।

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