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शिक्षा:निजी काॅलेज मनमर्जी से नहीं वसूल सकेंगे फीस, काॅलेज निदेशालय ने दिए आदेश

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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  • काेविड-19 के तहत आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव के मद्देनजर विद्यार्थियाें और अभिभावकाें काे दी राहत

जिले के निजी काॅलेजाें में पढ़ने वाले लाखाें विद्यार्थियाें के लिए राहत वाली खबर है कि इस बार निजी काॅलेज मनमर्जी से फीस नहीं वसूल सकेंगे। काॅलेज शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर सत्र 2020-21 में कहा है कि निजी काॅलेजों को विद्यार्थियाें से तीन-तीन माह के आधार पर चार किस्ताें में शुल्क लिया जाए। काॅलेज विकास शुल्क और विलंब शुल्क नहीं वसूला जाए। यह निर्देश काेविड 19 के तहत आर्थिक स्थिति पर पड़े विपरीत प्रभाव काे देखते हुए विद्यार्थियाें और अभिभावकाें काे राहत देने के लिए जारी किए गए हैं।

गाैरतलब है कि निजी काॅलेजाें में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियाें से कई मदाें में फीस ली जाती है। हाॅस्टल में रहने वाले विद्यार्थियाें से मैस, हाॅस्टल फीस के रूप में हजाराें रुपए लिए जाते हैं। कई तरह की सुविधाओंं के नाम पर भी शुल्क लेने की बातें सामने आती रही हैं। शिकायतें मिलने के बाद निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी किए।

एमजीएसयू उपकुलसचिव डाॅ. बिट्ठल बिस्सा ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजाेर वर्ग के विद्यार्थियाें से फीस लेते समय विशेष शिथिलता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हाेंने बताया कि काॅलेज शिक्षा निदेशक संदेश नायक की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि विभिन्न माध्यमाें से राज्य सरकार के ध्यान में आया है कि निजी काॅलेज विद्यार्थियाें से फीस वसूली में सख्ती बरत रहे हैं। समय पर फीस जमा नहीं कराने वाले विद्यार्थियाें से विलंब शुल्क भी वसूला जा रहा है।

आदेश के महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • फीस तिमाही आधार पर चार किस्ताें में ली जाए।
  • किसी भी रूप में विलंब शुल्क नहीं वसूला जाए।
  • महामारी के कारण हाॅस्टल मैस और परिवहन सुविधाएं बंद हैं, ऐसी स्थिति में जिन सुविधाओं का उपयाेग विद्यार्थी नहीं कर रहे उनकी फीस न ली जाए।
  • सिर्फ उन्हीं मदाें में फीस ली जाए, जिनका उपयाेग विद्यार्थी कर रहे हैं।
  • विकास शुल्क के रूप में किसी तरह की फीस नहीं ली जाए।

निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को भी अब निशुल्क पाठ्य पुस्तकें मिल सकेंगी

जिलेभर के निजी स्कूलाें में पढ़ने वाले विद्यार्थियाें के लिए अच्छी खबर है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को भी अब निशुल्क पाठ्य पुस्तकें मिल सकेंगी। राज्य के सभी निजी स्कूलों में इसके लिए बुक बैंक की स्थापना की जाएगी। स्कूल के उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए उनकी पिछले साल की किताबों को बुक बैंक में जमा किया जाएगा।

बुक बैंक में जमा किताबों को आर्थिक रुप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए निशुल्क वितरण की व्यवस्था होगी। वहीं, समस्त निजी स्कूलों में बुक बैंक के प्रभावी संचालन के लिए लाइब्रेरियन व प्रभारी कर्मचारी की व्यवस्था करनी होगी।

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