बंदी खत्म, असर अभी भी:आरबी, पीएस, एलएनपी, जैड, बीबी, समेजा, एचएच, एफ और करणीजी वितरिका में अभी होगी पेयजल की आपूर्ति

श्रीगंगानगर6 महीने पहले
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पंजाब ने 45 आरडी से घटाया पानी, आज रात तक हमारी नहराें पर असर पड़ेगा। - Dainik Bhaskar
पंजाब ने 45 आरडी से घटाया पानी, आज रात तक हमारी नहराें पर असर पड़ेगा।

बीकानेर कैनाल में पंजाब ने 45 आरडी से पानी की आपूर्ति फिर से कम कर दी। हालांकि राजस्थान बाॅर्डर के खखां हैड पर गुरुवार शाम तक 1000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति हाे रही थी। शुक्रवार सुबह तक यहां भी पानी की मात्रा कम हाे जाएगी। उपलब्ध पानी के आधार पर सिंचाई विभाग ने गंगनहर की 9 नहराें व वितरिकाओं में पीने के लिए पानी छाेड़ दिया।

गंगनहर में एक हजार क्यूसेक पानी उपलब्धता के आधार पर आरबी, पीएस, एलएनपी, जैड, बीबी, समेेजा, एचएच, एफ व करणीजी में पेयजल व्यवस्था के लिए पानी का प्रवाह शुरू किया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियाें के बताया कि उपलब्धता व जलदाय विभाग की मांग के अनुसार पेयजल व्यवस्था के लिए वितरिकाओं में पानी प्रवाहित किया जा रहा है।

पंजाब में 45 आरडी से बीकानेर कैनाल में मंगलवार काे 1350 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जा रहा था। गुरुवार काे पंजाब ने बीकानेर कैनाल में पानी की मात्रा कम कर दी। इससे शुक्रवार सुबह तक पानी की मात्रा घटकर 500 क्यूसेक के आसपास रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

सिंचाई विभाग के एई ने बताया कि जिन वितरिकाओं में पानी छाेड़ा गया है। उन वितरिकाओं में सिंचाई पानी के माेघे बंद रहेंगे। अनाधिकृत रूप से किसी ने माेघा खाेलकर पानी का सिंचाई के लिए उपयाेग किया गया ताे उसके खिलाफ सिंचाई अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • बीकानेर कैनाल में 20 मई तक प्रदेश का पानी का हिस्सा 500 क्यूसेक है। इसके बावजूद फसलाें की बुवाई सीजन काे ध्यान में रखते हुए पंजाब के सिंचाई अधिकारयाें से समन्वय स्थापित कर अधिक पानी लेने के लिए प्रयास किए जाएंगे। - धीरज चावला, एसई, गंगकैनाल।

किसान बोले- बांध में 1301 फीट, फिर पानी कम क्यों
किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल ने बताय कि सिंचाई विभाग के अधिकारी 20 मई तक 500 क्यूसेक पानी का हिस्सा हाेने की बात कह रहे हैं। पाेंग बांध में जलस्तर 1301.22 फुट है। इसके बावजूद किसानाें काे खरीफ फसलाें की बुवाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा है। पानी नहीं मिला ताे किसान बर्बाद हाे जाएंगे। काेराेनाकाल के बावजूद किसानाें काे मजबूरन अांदाेलन करना पड़ेगा।

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