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आरएएस वाला आश्रम:श्रीगंगानगर से रिकाॅर्ड 74+ युवाओं का चयन, इनमें 60 भाटिया आश्रम में पढ़े

श्रीगंगानगर22 दिन पहले
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  • ब्लाइंड वर्ग में तीसरा टॉपर भी जिले का
  • सफलता की कहानियां- दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता, रिकॉर्डिंग सुनकर तैयारी की, दूसरे प्रयास में आरएएस बने

एक जमाना था, जब दो-तीन साल में श्रीगंगानगर से एक-दो युवाओं का आरएएस में चयन होता था। लेकिन अब हमारे युवा यह मिथक तोड़ रहे हैं। मंगलवार देर रात घोषित परीक्षा परिणाम में पहली बार श्रीगंगानगर जिले ने रिकॉर्ड 74+ आरएएस राजस्थान को दिए हैं। इनमें 60+ अकेले सूरतगढ़ के भाटिया आश्रम में पढ़े हैं। इनमें 2 दृष्टि बाधित अभ्यर्थी भी शामिल हैं। ब्लाइंड वर्ग में राजस्थान का तीसरा टॉपर कुलवंत कुमार भी हमारे जिले का है। बड़ी बात यह है कि ग्रामीण इलाकों से सबसे ज्यादा युवाओं का चयन आरएएस में हुआ है और इनमें भी युवतियां ज्यादा हैं।

आरएएस में चयन के बाद भाटिया आश्रम में पढ़े युवा बुधवार शाम आश्रम में एकत्र हुए और मिठाई बांटकर सफल होने की खुशियां मनाई। संचालक प्रवीण भाटिया ने बताया कि इंटरव्यू के लिए हमारे यहां 275 अभ्यर्थियों ने तैयारी की थी, जिनमें 111 का चयन हुआ है। इनमें सूरतगढ़ शाखा में 60, जयपुर में 22, बीकानेर में 7 व जोधपुर में 24 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि टॉपर 80 अभ्यर्थियों का एसडीएम बनना तय है। इसके बाद के अभ्यर्थी पुलिस, राजस्व, महिला व अन्य अधीनस्थ सेवाओं में जाएंगे।

फोटो सूरतगढ़ के भाटिया आश्रम के आरएएस में चयनित अभ्यर्थियों की है। व्याख्याता प्रवीण भाटिया बताते हैं, वर्ष 1993 में आरएएस की मुख्य परीक्षा तथा 2007 में साक्षात्कार तक पहुंच गए थे। लेकिन भाग्य ने साथ नहीं दिया। इसके बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2003 में हाउसिंग बोर्ड स्थित अपने निवास पर उन्होंने आरएएस की तैयारी करवानी शुरू की। पहली बार में तीन का आरएएस में चयन हुआ। इसके बाद 2013 में भाटिया आश्रम की स्थापना की गई। भाटिया आश्रम में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के अभ्यर्थी भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनसे प्रतिमाह 250 रुपए जीएसटी सहित फीस ली जाती है।

बड़ी वजह: लोगों की सोच बदली, शिक्षा का स्तर बढ़ा

मैं 1994 बैच में आरएएस चयनित हुआ था। उस समय में चमड़िया व गुप्ता परिवार के अलावा प्रदीप बोरड़, नत्थूराम वर्मा और मुझे मिलाकर आरएएस अंगुलियों पर गिनने लायक थे। अब हमारे जिले से 40 से ज्यादा युवा आरएएस बन रहे हैं, जिसकी ये बड़ी वजह हैं।

1. उस समय जमीनें व पानी होने की वजह से युवा सरकारी सेवा के बजाय खेती को चुनते थे। अब किसानों के बेटे भी सरकारी सेवा को भी चुन रहे हैं। 2. अब गांव-गांव में स्कूल खुले हैं। हर शहर में कोचिंग इंस्टीट्यूट खुल चुके हैं। शिक्षा का स्तर बढ़ने के कारण भी युवाओं का रूझान आरएएस की तरफ बढ़ा है। 3. बेटियों को लेकर बदली सोच के कारण भी बेटियां अब ज्यादा अफसर बन रही हैं। पहले बेटियों को ज्यादा पढ़ाया नहीं जाता था, अब बड़े शहरों में भी पढ़ने को भेजा जाता है। 4. लोगों में यह भ्रांति थी कि इन परीक्षाओं में केवल सिफारिश पर चयन होता है। अब बड़ी संख्या में गरीब बच्चे चयनित होने से ये धारणा भी टूटी है। 5. कोरोनाकाल भी एक वजह मानी जा सकती है। इस समय निजी क्षेत्र में नौकरियां खूब गईं, जबकि सरकारी नौकरी सुरक्षित रही।

बचपन से दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता था। पिता और छोटे भाई का स्वर्गवास हो गया। भाटिया सर के पास शिक्षक बनने को लेकर तैयारी शुरू की। मेरा मानना है कि जो शिक्षक बन सकता है, वो कुछ भी बन सकता है। आरएएस की तैयारी के लिए आश्रम की टीम रिकार्डिंग से दिन-रात तैयारी करवाती। इस दौरान प्रथम ग्रेड शिक्षक भर्ती व बैंक में चयन हो गया, लेकिन मुझे आरएएस ही बनना था। अब दूसरे प्रयास में आरएएस में चयन हुआ है।

आंख बचपन से खराब थी। वर्ष 2004 में गिल्ली डंडा खेलते समय आंख में चोट लगी। गांव में एसडीएम आए तो उनके कार्य को देखकर प्रेरित हुआ। फिर वर्ष 2011 में आरएएस में भर्ती दृष्टिबाधित आकाश अरोड़ा को देखकर मन में आरएएस बनने की प्रेरणा जाग उठी। 7 बीघा जमीन में बारिश के समय ही खेती कर पाते हैं। पिता मनरेगा में मजदूरी करते हैं। बीए के साथ आरएएस की तैयारी की। इसका श्रेय भाटिया सर को जाता है, जिन्होंने रिकार्डिंग से आरएएस की तैयारी करवाई।

बीकानेर निवासी अमिता बिश्नोई ने बताया कि पति अभय बिश्नोई का वर्ष 2013 में स्वर्गवास हो गया। साढ़े 7 साल की बेटी है। परिवार के लोग खेती करते हैं। पति के स्वर्गवास के बाद टूट गई थी। फिर मैंने तय किया कि आरएएस बनकर अपने पैराें पर खड़ी होऊंगी। वर्ष 2016 में भाटिया आश्रम में आकर तैयारी शुरू की। फिर 2018 में भर्ती निकली तो परीक्षा दी। इंटरव्यू तक यहीं रह तैयारी की। अब मेरी सैकंड रैंक आई है।

शहर के 6, नेतेवाला के 2 युवाओं का चयन

श्रीगंगानगर के संकल्प काेचिंग सेंटर के 6 अभ्यर्थियाें का आरएएस के लिए चयन हुआ है। सेंटर के डायरेक्टर संजय चाैधरी ने बताया कि प्रमाेद कुमार काे एससी कैटेगरी में 35वीं रैंक, अनु डाल काे 97 रैंक, कुलवंत की दृष्टिबाधित कैटेगरी में तीसरी व धर्मवीर की डीसी कैटेगरी में 2, चंद्रशेखर काे एससी में 194 व कपिल लुहानीवाल काे 715वीं रैंक मिली है। इस कड़ी में नेतेवाला के सहदेव नैण पुत्र हरि सिंह नैण ने आरएएस परीक्षा 2018 में 348वी रैंक और अनुसूइया को 505वी रैंक हासिल हुई है। वर्तमान में सहदेव रसद विभाग में ईआई के पद पर बीकानेर में पोस्टेड हैं।

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