कोर्ट का आदेश:पीडब्ल्यूडी का विश्राम गृह कुर्क, 21.96 लाख रुपए मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया; ​​​​​​​लालगढ़ हवाई पट्‌टी के विस्तार के लिए 24 वर्ष पूर्व अवाप्त की थी किसान की जमीन

श्रीगंगानगर2 महीने पहले
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डाक बंगले काे सीज करने की कारवाई करते अधिकारी - Dainik Bhaskar
डाक बंगले काे सीज करने की कारवाई करते अधिकारी
  • मुआवजा राशि को कम बताया, दोबारा आकलन कर राहत की अपील की थी

लालगढ़ हवाई पट्‌टी का विस्तार करने के लिए राज्य सरकार की ओर से 24 वर्ष पूर्व अवाप्त की एक किसान की कृषि भूमि का कोर्ट द्वारा मूल्यांकन कर निर्धारित किया मुआवजा न देने पर सार्वजनिक निर्माण विभाग के शिव सर्किल स्थित विश्राम गृह को सीज कर दिया गया है। पीडब्ल्यूडी की तरफ बकाया 21 लाख 96 हजार 193 रुपए 03 पैसे की वसूली के लिए कोर्ट के आदेश पर जारी कुर्की वारंट मंगलवार को रेस्ट हाउस के मुख्य द्वार पर चस्पा कर दिया है। जिला न्यायालय के नाजिर अनिल गोदारा और कर्मचारी राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मंगलवार को विश्राम गृह में पहुंच कर वहां मौजूद पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी को कोर्ट के कुर्की वारंट की तामील करवाई। इस संबंध में लालगढ़ निवासी किसान प्रेमकुमार ने सिविल न्यायालय में इजराय दायर की थी।

प्रेम कुमार की ओर से कोर्ट में अवाप्ति अधिनियम के तहत दायर किए सिविल वाद के अनुसार लालगढ़ हवाई पट्‌टी के निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ने राजस्व चक 8 एलएलजी में 8 किसानों की 36.03 बीघा जमीन अवाप्त की थी। इसमें उसकी 9 बीघा 11 बिस्वा जमीन भी थी। उसकी जमीन को 50 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से लेकर 29 सितंबर 1997 को अवार्ड पारित किया गया। उसे 477500 रुपए मुआवजा दिया गया।

हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन पवन कुमार यादव के अनुसार विभाग की ओर से हाईकोर्ट में अपील की हुई है। कोरोना काल के चलते अपील की सुनवाई जल्द नहीं हो सकी। इसी वजह से भुगतान नहीं किया जा सका।

चार बार भुगतान का अवसर दिया, फिर भी मुआवजा नहीं दिया
प्रेम कुमार के वकील एसएस भनोत के अनुसार मुआवजा राशि अदा न करने पर उन्होंने पीडब्ल्यूडी के खिलाफ इजराय दायर की थी। इजराय की सुनवाई के दौरान कोर्ट में पीडब्ल्यूडी ने चार बार भुगतान के लिए समय चाहा, उन्हें समय दिया गया। फिर भी भुगतान नहीं किया। तब उन्होंने कोर्ट से पीडब्ल्यूडी की संपत्ति कुर्क कर मुआवजा राशि वसूली की मांग की।

कोर्ट ने डिक्री राशि 2147861 रुपए 53 पैसे और इसकी ब्याज राशि 48331 रुपए 50 पैसे हित 2196193 रुपए 03 पैसे की वसूली के लिए पीडब्ल्यूडी का विश्राम गृह कुर्की करने के आदेश दिए। प्रकरण की कोर्ट में अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी।

इधर... अब तक चार विभागों की कुर्की, जिला अस्पताल ने 1.33 लाख रुपए का चैक दिया
विभिन्न कोर्टों के फैसलों की पालना नहीं करने पर अब तक पीडब्ल्यूडी सहित चार विभागों पर कुर्की की कार्रवाई हाे चुकी है। लाेक अदालत के फैसले की पालना न करने पर 74 हजार 800 रुपए हर्जाना वसूलने के लिए नगर परिषद आयुक्त कार्यालय का सामान कुर्क हो चुका है। जिला अस्पताल के पीएमओ का कमरा भी लेबर कोर्ट के प्रकरण में कुर्क पड़ा है।

इससे पूर्व कर्मचारी ओमप्रकाश के बकाया 23.27 लाख रुपए वेतन भत्तों का भुगतान न करने पर सीएमएचओ कार्यालय के दो कमरे, वाहन व अन्य सामान पहले कुर्क हुआ। फिर इसका नीलामी वारंट भी निकला था। जिला अस्पताल के वाहन से घायल विश्वनाथ को एमएसीटी (श्रम न्यायालय) द्वारा निर्धारित 1.33 लाख रुपए क्लेम राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पीएमओ डॉ. बलदेव सिंह चौहान के अनुसार आरएमआरएस के फंड के से 1.33 लाख रुपए का चैक बनवाकर तहसीलदार को दे दिया है, जिसे कोर्ट में प्रस्तुत कर कुर्क किया कमरा रिलीज करवाने की कार्रवाई करवाई जाएगी।

मुआवजा राशि को कम बताया, दोबारा आकलन कर राहत की अपील की थी​​​​​​​
वाद में मुआवजा राशि को जमीन के बाजार मूल्य से कम बताते हुए दोबारा आकलन कर राहत देने की अपील की गई थी। वाद के अनुसार मुआवजा राशि अव्यवहारिक है। उसकी जमीन का बाजार मूल्य करीब 6 लाख रुपए प्रति बीघा है। इसके पास अवार्ड पारित होने से पूर्व वर्ष 1994 में एक किसान की जमीन 80 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से बिकी है। गांव 6 एलएलजी में जमीन 3 लाख 8 हजार रुपए से बिकी है। इसके अलावा गांव 13 एलएनपी में प्रशासन ने एक जमीन का 96 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से अवार्ड पारित किया था।

सिविल कोर्ट ने प्रकरण का निर्णय 17 दिसंबर को 2018 को सुनाया। इसमें जमीन की कीमत का प्रति बीघा आकलन 1.20 लाख रुपए किया गया। इसमें प्रेम कुमार को 1117402 रुपए 32 पैसे मूल प्रतिकर और 1030459 रुपए 21 पैसे धारा 28 के तहत ब्याज, सोलेशियम व अन्य राशि मुआवजे के रूप में प्राप्त करने का हकदार माना था। कोर्ट के निर्देशानुसार मूल प्रतिकर राशि 1117402 रुपए 32 पैसे पर पीडब्ल्यूडी को राशि की अदायगी तक 15 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज देने के निर्देश भी दिए थे।​​​​​​​

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