पहला मामला:शुगर रोगी को डेंगू हुआ, प्लेटलेट्स इतनी गिरी कि ब्लीडिंग शुरू और एक आंख की रोशनी गई

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

सादुलशहर में डेंगू राेगी के उपचार के बाद उसकी एक आंख की राेशनी जाने का मामला सामने आया है। हालांकि राेगी उपचार के बाद इन दिनाें अपने घर पर ही था। वार्ड नंबर 15 निवासी वृद्ध दीवानचंद की एक आंख की राेशनी जाने की जानकारी जैसे ही परिजनाें काे मिली। गुस्साए परिजन शहर के कुछ लाेगाें के साथ स्थानीय निजी आयुष्मान अस्पताल पहुंच गए और उपचार में लापरवाही बरतने का अराेप लगाते हुए धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे लाेगाें ने आराेप लगाया कि यहां उपचार में लापरवाही हुई। इसी के चलते दीवानचंद काे एक आंख से दिखाई देना बंद हाे गया। बाद में दाेनाें पक्षाें में हुए समझाैते व समझाइश के बाद डाॅक्टर ने 1.11 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी। इसके बाद मामला शांत हाे गया। पीड़ित राेगी श्रमिक है।

धरना लगाया तब मिला 1.11 लाख मुआवजा

मिली जानकारी के अनुसार दीवानचंद काे 21 नवंबर काे परिजनाें ने सादुलशहर के आयुष्मान अस्पताल में भर्ती करवाया था। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इस दाैरान राेगी की प्लेटलेट्स काफी कम थी। राेगी काे 24 नवंबर काे यहां श्रीगंगानगर रेफर कर दिया गया। श्रीगंगानगर में उपचार के बाद राेगी स्वस्थ हाे गया। अब कई दिन से राेगी घर पर ही थी। राेगी काे एक आंख में थाेड़ी परेशानी महसूस हाे रही थी। मंगलवार काे उसे एक आंख से दिखाई देना बंद हाे गया। इसी से गुस्साए परिजन व नागरिकाें ने अाराेप लगाया कि आयुष्मान अस्पताल के डाॅक्टर की लापरवाही के कारण डेंगू राेगी की आंख की रोशनी चली गई।

धरने पर बैठे लाेग डाॅक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। धरने की सूचना पर थानाप्रभारी सतवीर मीणा स्टाफ मौके पर पहुंचे। लोगों से समझाइश की। इस दाैरान परिजनों ने 2 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। मांग पर दाेनाें पक्षाें में वार्ता हुई, लेकिन वार्ता विफल रही। इस बीच ब्लाॅक सीएमएचओ डाॅ.अखिलेश शर्मा व खंड प्रभारी सतीश नरूला भी मौके पर पहुंचे। अंत में पीड़ित परिवार काे एक लाख 11 हजार रुपए आर्थिक सहायता देने पर मामला शांत हुआ। धरने में पार्षद रामावतार यादव, मेहताब गुरिया, पूर्व पार्षद अमन मक्कड़, अशोक वधवा, विक्की बजाज, ताराचंद सोनी, टिंकू गुंबर व नवीन राठाैड़ शामिल थे।

^मरीज की आंख की राेशनी डेंगू बुखार के कारण प्लेटलेट्स कम होने से हुई ब्लीडिंग के कारण चली गई है। राेगी काे यहां से 24 नवंबर काे रेफर कर दिया था। राेगी शुगर राेगी भी था। आयुष्मान अस्पताल में राेगी के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। मरीज की आर्थिक स्थिति देखते हुए एक लाख 11 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान दी गई है। डाॅ. अरुण गर्ग, सादुलशहर।

शुगर व हृदय राेगियाें काे रहता है ऐसा खतरा

डेंगू बुखार के दाैरान प्लेटलेट्स घटने के बाद यदि ब्लीडिंग हाेती है ताे कुछ मामलाें में राेशनी जा सकती है। हालांकि ऐसे बहुत कम मामले हाेते हैं। ब्लीडिंग के दाैरान आंखाें के पीछे की रक्तवाहिकाओं से खून निकलकर पर्दे पर आ जाता है। ऐसे राेशनी जाने की आशंका रहती है। ऐसे राेगी जाे खून पतला करने की दवा लेते हैं, उनके कुछ मामलाें में ऐसा हाे सकता है। मतलब मधुमेह राेगी, हृदय राेगी, जिनके वाॅल्व बदला गया दिमाग में थक्का बनने की समस्या रही हाे और खून पतला करने की दवा लेते हाें ऐसे राेगियाें में इस तरह का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।

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