आज इंटरनेशनल डांस डे:परिवार को ऐतराज था; डांस से इतना प्यार कि नेपाल घर छोड़ श्रीगंगानगर आ गई, यहां खोली डांस एकेडमी

श्रीगंगानगर6 महीने पहले
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सिम्मी थापा और सूरज कुमार - Dainik Bhaskar
सिम्मी थापा और सूरज कुमार
  • मिलिए सिम्मी और सूरज से, जिंदगी में डांस के लिए काफी संघर्ष किया...कामयाबी मिली

आज इंटरनेशनल डांस डे है। आप को मिलवाते हैं श्रीगंगानगर के दो डांसरों से, जिन्होंने अपने बूते एक अलग मुकाम हासिल किया। पहली कहानी सिम्मी थापा की। सिम्मी के घरवालों को उसका डांस करना पसंद नहीं था, लेकिन उसकी जान डांस में थी। इस कारण वह नेपाल से भारत आ गई। यहां नानी के सहयोग के डांस में एक मुकाम पाया।

दूसरी कहानी शहर के कृष्णा टॉकीज निवासी सूरज कुमार की। सूरज का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था, फिर भी उसने डांस नहीं छोड़ा। घर-घर जाकर बच्चों को डांस सिखाया। 3 रियलिटी शो में भाग ले चुका है।

आइए जानिए पूरी कहानी इन दोनों डांसर की जुबानी

एक ने परिवार का विरोध सहा तो दूसरे ने तंगी...लेकिन हार नहीं मानी

मेरा जन्म नेपाल के काठमांडू में हुआ था। असली नाम लिटिल थापा। 3 साल की उम्र में ही डांस का शौक हो गया। शौक धीरे-धीरे लत में बदल गई। पापा नेपाल पुलिस में थे। उनको मेरा डांस करना पसंद नहीं था। फिर 10 साल की उम्र में मैंने भारत आकर डीआईडी (डांस इंडिया डांस) में ऑडिशन भी दिया। उसमें मेरा चयन हो गया, लेकिन पापा ने जाने नहीं दिया। उन्होंने मुझसे कहा कि हमारी फैमिली में कोई डांसर नहीं होगा।

उस दिन के बाद मैं एकदम से टूट गई, क्योंकि डांस ही मेरी जान थी। मेरी नानी भारत में रहती थी। उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने मेरी मम्मी से बात की और बोला कि आप लोग सिम्मी को भारत में मेरे पास छोड़ दो, नहीं तो यह डिप्रेशन में कोई बड़ा कदम न उठा लें। मैं इंडिया में मेरी नानी के पास आ गई। उस समय मुझे हिंदी नहीं आती थी।

इसके लिए नानी ने हरिद्वार में गुरुकुल आश्रम में मुझे भेज दिया। एक साल मैंने आश्रम में रहकर हिंदी और संस्कृति भाषा सीखी। फिर मैं श्रीगंगानगर वापस आ गई। मेरे घर के आसपास बहुत सारे बच्चे रहते थे। मैंने उन सभी को डांस सिखाने लगी। एक दिन स्कूल वाले हमारे घर पर आए तो उन्होंने मुझे अपने स्कूल में एडमिशन दिया।

एसडी गर्ल्स स्कूल की प्रिंसीपल कमलेश कटारिया ने मुझे कदम-कदम पर संभाला, साथ दिया। फिर मैंने बहुत सी डांस प्रतियोगिताओं में भाषा लिया। 2020 में मेरा डांस के चांस रियलिटी शो में भी चयन हुआ था। अभी तक काफी शो कर चुकी हूं। जैसा कि सिम्मी थापा ने बताया

पापा सोहनलाल चावरियां नगरपरिषद में कर्मचारी हैं। बचपन से ही डांस का शौक था। मेरा सपना खुद की डांस एकेडमी खोलने का था, जिसकी बदौलत मैं शहर के बच्चों को रियलिटी शो के मंच पर ले जाना चाहता था। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इसलिए शुरुआत में घर-घर जाकर बच्चों को डांस सिखाया। दोस्तों ने भी काफी मदद की। शुरुआत में 14 से 15 घंटे तक बस डांस ही डांस।

फिर 2012 में मेरी जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट आया। कमल मक्कड़ सर के साथ इंडिया गोट टैलेंट में डांस की प्रस्तुति दी। उसके बाद 2014 में डीआईडी और 2015 में सुपर डांसर में अपनी प्रतिभा दिखाई। इसके बाद शहर में होने वाले लगभग हर बड़े कार्यक्रम में हमारा डांस होने लगा। जो सपना 10 सााल पहले देखा था, वह अब पूरा हो रहा है। शहर में दो डांस एकेडमी खोल ली।
जैसा कि सूरज कुमार ने बताया

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