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ऐसे ही प्रयासों से थमा कोरोना:मैकेनिक हमेशा साथ में, ड्राइवर को खाना टैंकर के अंदर देते, ताकि समय पर पहुंचे ऑक्सीजन

श्रीगंगानगर9 दिन पहले
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ऑक्सीजन का टैंकर लाते एस्कॉर्ट टीम। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
ऑक्सीजन का टैंकर लाते एस्कॉर्ट टीम। (फाइल फोटो)
  • आज कलेक्टर जाकिर हुसैन से जानिए, संकट के समय कैसे हमें समय पर मिली ‘सांसें’

22 अप्रैल काे काेराेना के संक्रमित राेगियाें की संख्या बढ़ने के बाद जिले में ऑक्सीजन की किल्लत हुई तो नया संकट खड़ा हो गया। निजी कोविड अस्पतालों से ऑक्सीजन के अभाव में जिला अस्पताल में रोगी रेफर किए जाने लगे। पहले ही दिन छह कोरोना रोगियों की मौत हो गई। सरकार ने भिवाड़ी से ऑक्सीजन यहां सप्लाई करनी शुरू की। चूंकि उस समय एक-एक मिनट कीमती था। हमने तय किया कि भिवाड़ी से श्रीगंगानगर तक ऑक्सीजन टैंकर को बिना किसी बाधा के यहां पहुंचाया जाएगा।

इसके लिए हमने सबसे पहले टैंकर के मैकेनिकों की टीम बनाई। ये मैकेनिक हमेशा टैंकर के साथ रहते। कोई भी खराबी आती, उसे तुरंत मौके पर ही दुरुस्त करते। फायदा यह होता कि टैंकर कहीं भी बिना किसी अड़चन और बिना समय गंवाए यहां पहुंच जाते।

इससे अब तक 17 टैंकरों से 189 टन लिक्विड ऑक्सीजन बिना किसी देरी पहुंच चुकी है। भिवाड़ी व अन्य प्लांटों से लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर को सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की निगरानी में लाया जाता था। रास्ते में किसी सुरक्षा संंबंधी अड़चन से निपटने के लिए पुलिस सक्षम थी। लेकिन वाहन में तकनीकी खराबी अगर अड़चन बनी तो क्या होगा? रात के समय वाहन पंक्चर हो गया तो क्या होगा?

ऐसे में हमने मैकेनिकों की टीम के साथ कैंटर को एस्काॅर्ट कर लाने का नवाचार भी किया। इस पूरी कार्रवाई में एडीएम भवानीसिंह पंवार, डीटीओ विनोद लेघा व पुलिस विभाग का पूरा साथ मिला। उन्होंने सब अधिकारियों से समन्वय किया।

पंक्चर वालों से संपर्क रखा, ऑक्सीजन के टैंकर को कोई लूट न ले, इसलिए पुलिस भी हमेशा साथ में रहती

भिवाड़ी प्लांट से टैंकर रोहतक, झज्जर, हिसार, सिरसा, डबवाली और संगरिया रूट से श्रीगंगानगर तक पहुंचता। परिवहन विभाग का एक इंस्पेक्टर, गार्ड, ड्राइवर के अलावा रोडवेज के दो मैकेनिक सभी आवश्यक औजारों के साथ एस्काॅर्ट वाहन में रहते। टैंकर के प्लांट से रवाना होने से पूर्व ही वाहन रवाना हो जाता। करीब आधे रास्ते से टैंकर को एस्काॅर्ट कर लेता।

रास्ते में गैराज संचालकों और पंक्चर लगाने वालों से भी टीम संपर्क में रहती ताकि विशेष एस्काॅर्ट वाहन पहुंंचने से पहले खराबी जो जाए तो जल्द की मेंटीनेंस हो सके। इसी दौरान मैकेनिकों की टीम ने एक बार टैंकर के इंजन में खराबी होने पर तुरंत मेंटीनेंस की। टैंकर के ड्राइवरों के लिए खाने और चाय की व्यवस्था भी वाहन में की जाती ताकि खाने के लिए किसी ढाबे पर रुकने वाले समय की बचत की जा सके। श्रीगंगानगर को अलवर जिले के भिवाड़ी से 13, दिल्ली से एक और गुजरात के जामनगर से 3 टैंकर लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई मिल चुकी है। इससे अब तक 189.29 टन लिक्विड ऑक्सीजन मिल चुकी है। इससे 16868 सिलेंडर भरे जा चुके हैं।

पहले श्रीगंगानगर के अलावा हनुमानगढ़ व चुरु जिले को भी श्रीगंगानगर से ही ऑक्सीजन सिलेंडर रीफिल कर सप्लाई दी जाती थी। अब संकट टला है। फिर भी एहतियात की दृष्टि से टैंकर को एस्काॅर्ट कर ही लाया जाता है। संकट के दिनों में ये व्यवस्था बेहद फायदेमंद साबित हुई। यहां भी हमने ऑक्सीजन वितरण प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में करवाया। इससे भी फायदा हुआ कि कोविड अस्पतालों को समान रूप से ऑक्सीजन मिली।

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