कमाई पर कोरोना इफेक्ट:रिक्शा चालक बोले, ‘बाजार तो सुबह खुलने लगा लेकिन नहीं होती कमाई, कैसे करें गुजारा’

श्रीगंगानगर7 महीने पहले
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श्रीगंगानगर में रवींद्र पथ पर - Dainik Bhaskar
श्रीगंगानगर में रवींद्र पथ पर

कोरोना संकट के दौर में बाजार सुबह करीब पांच घंटे के लिए ही खुलने लगा है। ऐसे में दुकानदार सुबह जल्दी बाजार में पहुंचने लगे लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जिसे सुबह के इस समय में बहुत ज्यादा कमाई नहीं हो पाती और बाजार बंद होने के बाद काम नहीं मिल पाता। ये लोग हैं शहर के साइकिल रिक्शा चालक। अब ये रिक्शा चालक संख्या में बहुत कम रह गए हैं। इन लोगों से बातचीत की तो इनका दुख फूटकर सामने आ गया।

कहीं आ न जाए गांव जाने की नौबत
रवींद्र पथ पर एक दुकान के लिए सामान का परिवहन करने वाले सुनील बताते हैं कि इस बार पूरी तरह लॉकडाउन नहीं है तो सुबह थोड़ी कमाई हो जाती है लेकिन यह होती बहुत कम है। इससे तो रिक्शा का किराया भी नहीं निकल पाता। उनका कहना था कि वे समान्यत: मशीनें अथवा अन्य भारी सामान का परिवहन करते हैं। सुबह सुबह बहुत कम लोग इस तरह की चीजों की खरीदारी करते हैं।

ग्राहक ही नहीं मिलता
इन्हीं के साथी गंगाराम का कहना था कि अब साइकिल रिक्शा को सवारी ही कहां मिलती है। एक तो बाजार का समय कम कर दिया गया है, उस पर कोरोना के डर से कोई रिक्शा में बैठता ही नहीं। उनका कहना था कि जब तक गुजारा हो रहा है श्रीगंगानगर में रह रहे हैं, नहीं तो फिर गांव तो जाएंगे ही।

कोरोना ही खा गया कमाई
रिक्शा चालक खुशीराम का कहना था कि उनकी कमाई तो कोरोना ही खा गया। कोरोना से पहले हर दिन तीन सौ से चार सौ रुपए तक कमाई हो जाती थी। अब इस संकट के दौर में हर किसी को लॉकडाउन की चिंता है। ऐसे में न कोई माल परिवहन करवाता है और नहीं सवारियां मिल पाती है।