धार्मिक मान्यता:विवाह पंचमी का पर्व आज, मंदिरों में पूजा, यज्ञ, अनुष्ठान एवं रामचरित मानस का पाठ करेंगे श्रद्धालु

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जिन जातकों के विवाह में परेशानी आती है, उन्हें इस दिन भगवान राम व सीता माता की विशेष पूजा करनी चाहिए, विवाह बाधाएं दूर होने की है मान्यता

प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष की शुक्ल पंचमी को राम मंदिरों में विशेष उत्सव मनाया जाता है। अयोध्या में इस दिन को बड़े महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, 8 दिसंबर को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार इस दिन का विशेष महत्व है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का विवाह माता सीता के साथ हुआ था। हर साल इस दिन को भगवान राम और माता सीता की शादी की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सीता-राम के मंदिरों में आयोजन होते हैं। भक्त पूजा, यज्ञ और अनुष्ठान एवं रामचरितमानस का पाठ करते हैं।

शहरभर के मंदिराें में इस दिन धार्मिक कार्यक्रमाें का आयाेजन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार मंदिराें में कार्यक्रमाें काे लेकर विशेष तैयारी की जा रही है। मंदिराें में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विशेष शृंगार व नई पोशाक की तैयारी की जा रही है। जिन जातकों के विवाह में परेशानी आती है, उन्हें इस दिन भगवान राम व सीता माता की विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे उनके विवाह संबंधी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

दूर हाेती हैं विवाह की अड़चन, रामचरितमानस पाठ करना है लाभकारी

मुख्य पुजारी कालूराम गाैड़ ने बताया कि जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही हों या फिर बिलंब हो रहा हो उन्हें विवाह पंचमी के दिन व्रत रखना चाहिए एवं विधि-विधान के साथ भगवान राम और माता सीता का पूजन करना चाहिए। इसी के साथ प्रभु श्रीराम और माता-सीता का विवाह संपन्न करवाना चाहिए। पूजन सम्पन्न होने के बाद भगवान से अपनी मनोकामना पूर्ण होने की विनती करनी चाहिए। मान्यता है कि इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं साथ ही योग्य जीवन साथी मिलता है एवं विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष की पंचमी को ही गोस्वामी तुलसीदासजी ने अति दिव्य ग्रंथ रामचरितमानस पूर्ण की थी, साथ ही रामजी और सीताजी का विवाह भी इसी दिन हुआ था इसलिए विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस का पाठ करना बेहद शुभकारी है।

दूर होंगे कष्ट

आज के दिन भगवान श्रीराम का विधिवत पूजन और सांकेतिक रूप से या उत्सव के रूप में भगवान का विवाह सीताजी से कराया जाए तो जीवन में सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। जिनके वैवाहिक जीवन में संतान या परिवार से सम्बंधित कोई भी समस्या है, वे इस दिन श्रीराम और सीताजी का पूजन करके श्रीराम रक्षा स्रोत का पाठ करें तो अवश्य लाभ होगा।

मनोकामना पूर्ति के लिए इस तरह से करें पूजन

विवाह पंचमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद राम विवाह का संकल्प लें। श्रीराम और सीता की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। मूर्ति स्थापना के बाद भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें। पुष्प चढ़ाकर माला अर्पित कर भोग लगाएं।

रामचरित मानस में भी उल्लेख है कि राम-सीता के विवाह की तिथि का मन्नासा बताते हैं कि राम चरित मास के दोहे में इस विवाह के मुहूर्त का उल्लेख किया गया है।

खबरें और भी हैं...