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अपराध:जिले में भी सुरक्षित नहीं महिलाएं, हर सप्ताह दुष्कर्म के 3 और बालिका से ज्यादती के 2 मामले दर्ज हुए

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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  • यूपी के हाथरस कांड के बाद जिले में महिला व बालिका अपराध के मामलों की पड़ताल
  • अपराध रोकने व कानून की जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचाने को जागरूकता अभियान जारी

उत्तरप्रदेश के हाथरस जिले में हाल ही हुई हत्या और सामूहिक दुष्कर्म के मामले के बाद महिलाओं की सुरक्षा काे लेकर गंभीर चर्चाएं हाे रही हैं। जिले में महिला उत्पीड़न की पड़ताल की ताे सामने आया कि हमारे यहां भी महिलाएं और किशाेरियां सुरक्षित नहीं हैं। वर्ष 2020 में सितंबर तक हुए महिला उत्पीड़न के मामलाें पर गाैर करें ताे 30 सितंबर तक 274 दिन में दुष्कर्म के 115, छेड़छाड़ के 194 व बालिका ज्यादती के 80 मामले दर्ज हुए।

ऐसे में हम कह सकते हैं कि हर सप्ताह दुष्कर्म के 3 मामले सामने आ रहे हैं। छेड़छाड़ के तीन दिन में दाे और बालिका ज्यादती के हर सप्ताह दाे मामले सामने आए हैं। आंकड़े वे हैं जाे थानाें में दर्ज किए गए हैं। जिन पीड़िताओं ने अपना दर्द कहीं बयान ही नहीं किया, उनकी संख्या का ताे कभी भी अनुमान नहीं लगाया जा सकेगा। जिले में 2017 में महिलाओं से दुष्कर्म के 134 मामले दर्ज किए गए थे। 2019 में इनकी संख्या 184 हाे गई।

जनवरी से सितंबर 2020 तक जिले में महिलाओं से दुष्कर्म के 115 मामले सामने आ चुके हैं। किशाेरियाें से ज्यादती के मामलाें की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। 2017 में सितंबर तक 75 मामले सामने आए थे। यही आंकड़ा 2020 के सितंबर तक 80 पर पहुंच गया है। हालांकि 2019 में 118 मामले सामने आए थे। अकेले दुष्कर्म ही नहीं, छेड़छाड़ के मामले ताे दाेगुना से भी अधिक हाे गए।

पुलिस रिकाॅर्ड में 2018 में सितंबर तक जिले में छेड़छाड़ के 99 मामले दर्ज किए गए थे। 2020 के सितंबर तक जिले में महिलाओं से छेड़छाड़ की 194 घटनाएं पंजीबद्ध हाे चुकी हैं। ये वे मामले हैं जिनमें पीड़िताएं हिम्मत जुटाकर पुलिस तक पहुंची हैं। प्रदेश सरकार के आदेश से जिला पुलिस महिला अपराधों में कमी लाने को जागरूकता अभियान चला रही है।

पाेक्साे काेर्ट के एसपीपी बलकरणसिंह बताते हैं कि साल 2017 में अप्रैल से मार्च 2018 अंत तक पुलिस ने 97 मामलाें के चालान पेश किए। न्यायालय ने 58 मामलाें में निर्णय सुनाया। 2018 में इसी अवधि में 92 चालान पेश किए गए ताे अदालत ने 50 मामलाें में फैसले सुना दिए। वर्ष 2019 में 90 मामलाें के मुकाबले 32 मामलाें में निर्णय कर पीड़ित काे राहत प्रदान की गई। 2020 में सितंबर तक 74 मामलाें में चालान पेश किए जा चुके हैं। इनमें से 28 मामलाें में अदालत ने निर्णय सुना दिया।

एसपी बोले...महिला उत्पीड़न के मामलों काे लेकर गंभीर है पुलिस

जिले में प्रदेश के अन्य हिस्साें जैसी स्थिति नहीं है। हमारे यहां सालभर में जितने मामले दर्ज हाेते हैं, जांच में इनमें से आधे झूठे पाए जाते हैं। इसके बावजूद जिला पुलिस महिला उत्पीड़न के मामलाें काे लेकर गंभीर है।
राजन दुष्यंत, एसपी, श्रीगंगानगर।

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