पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बेटी ने बढ़ाया मान:सोशल मीडिया से दूरी, नियमित पढ़ाई; देश में 46वीं रैंक ला सीए बनी नेहा

पदमपुर8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
माता-पिता के साथ नेहा बादलानी - Dainik Bhaskar
माता-पिता के साथ नेहा बादलानी
  • नेहा बोली- कोरोनाकाल में मोबाइल फोन पर ही नियमित पढ़ाई की, अब मल्टीनेशनल कंपनी में काम करना लक्ष्य

सीए फाइनल की परीक्षा में पदमपुर की बेटी नेहा बादलानी (22) ने देश में 46वीं रैंक हासिल की है। नेहा ने स्कूल शिक्षा के बाद बीकाॅम की परीक्षा गुरमीतसिंह घनश्यामदास कन्या महाविद्यालय पदमपुर से उत्तीर्ण की। वर्ष 2017 में सीपीटी और इसके बाद 2018 में आईपीसीसी में सफलता हासिल की। अब वर्ष 2021 में सीए के फाइनल एग्जाम में देश भर में 46वीं रैंक हासिल कर जिले के साथ-साथ प्रदेश का नाम भी राेशन किया है। अब नेहा का लक्ष्य मल्टीनेशनल कंपनी में सेवाएं देना है। नेहा का कहना है कि अधिक समय तक पढ़ने से बेहतर है कि हम लगन से तैयारी करें।

नेहा सिंधी समाज अध्यक्ष लालचंद बादलानी की भतीजी है। उन्हाेंने कि इससे समाज के लाेग बालिका शिक्षा के लिए प्रेरित हाेंगे। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया की श्रीगंगानगर ब्रांच के फाउंडर चेयरमैन सीए पवन मित्तल बताते हैं, श्रीगंगानगर में नेहा ने बड़ी सफलता हासिल की है। देश भर में 46 वां रैंक हासिल हाेना बड़ी उपलब्धि है। विधायक गुरमीत सिंह कुन्नर ने भी नेहा काे बधाई दी।

बिना किसी दबाव के खुद चुना कॅरियर, गुरुजनों ने हाैसला बढ़ाया व परिवार ने हमेशा आगे बढ़ने की प्ररेणा दी

मेरी मा मां अंजना प्राइवेट टीचर हैं। उन्हाेंने ही मुझे पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी का मंत्र दिया। परीक्षा की तैयारी के लिए मैं साेशल मीडिया और टीवी से पूरी तरह से दूर रही। पिता भगवानदास बादलानी फाेटाेग्राफर हैं। मैं और भाई राेहन जुड़वां हैं। भाई रोहन का स्क्रेप बिजनेस है। हमारे परिवार ने भी बेटा-बेटी में अंतर नहीं माना जाता। पिता ने कॅरियर चुनाव के लिए कभी दबाव नहीं मनाया। मैंने अपना लक्ष्य खुद तय किया। वर्ष 2017 में सीपीटी व 2018 में आईपीसीसी में सफल रही। परीक्षा चाहे काेई भी हाे सफलता के लिए अनुशासन और समय प्रबंधन आवश्यक है। पढ़ाई दबाव में नहीं की जा सकती है। तीन साल ननिहाल अलवर में रही। वहीं सीए अजय सिंघल और गाैरव गुप्ता के निर्देशन में तैयारी के साथ-साथ ट्रेनिंग भी की। काेराेनाकाल मेरे लिए चुनाैती की तरह था। इस दाैरान परिवार व गुरुजनाें ने हाैसला बढ़ाया। लॉकडाउन अवधि में ऑनलाइन माेबाइल से नियमित तैयारी की। इससे न केवल तनावमुक्त रहने में मदद मिली बल्कि मेरी पढ़ाई भी बाधित नहीं हुई। शुरू से ही मेरा लक्ष्य सीए बनकर मल्टीनेशनल कंपनी में काम करना था। इसमें परिवार का भरपूर सहयाेग रहा। परिवार ने हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
(जैसा की नेहा बादलानी ने भास्कर काे बताया)

खबरें और भी हैं...