नवरात्रा विशेष:ना नक्शा बनवाया ना ही चंदा लेने गए, दर्शन करने आए भक्तों के सहयोग से बना 275 फीट ऊंचा भद्रकाली-महाकाली मंदिर

संगरिया20 दिन पहलेलेखक: सतीश गर्ग/पवन सिंगला
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  • संगरिया में बना है यह अनूठा मंदिर, प्रबंधन का दावा यह मंदिर देश में सबसे ऊंचा, बढ़ रही आस्था
  • गुंबद सहित 21 मंजिला बने इस मंदिर का निर्माण 27 वर्ष पहले शुरू हुआ था, अब भी चल रहा काम
  • श्री पंचायती अखाड़ा के मौनी बाबा महाराज कर रहे देखरेख, दूसरे राज्यों से दर्शनों के लिए आते हैं भक्त

आज से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। भास्कर पहले नवरात्र लेकर आया है जिले के संगरिया में स्थित भद्रकाली महाकाली माता के दर्शन और साथ में मंदिर से जुड़ी अनूठी कहानी और खासियत। वार्ड 5 मीरा कॉलोनी में बना यह मंदिर जिले का ऐसा पहला अनूठा मंदिर है जो, अपनी ऊंचाई के लिए खूब चर्चा में है। यह 21 मंजिल का मंदिर 275 फीट ऊंचा है। बीते 27 सालों से इस मंदिर का निर्माण कार्य लगातार जारी है।

निर्माण के लिए किसी से कोई सहयोग नहीं मांगा गया, भक्तों ने अपनी इच्छा अनुसार निर्माण सामग्री का योगदान दिया और यह मंदिर बन गया। मंदिर प्रबंधन के मुताबिक इतना ऊंचा मंदिर देश में एक मात्र बिहार के अररिया जिले में काली मां का है जो 152 फीट ऊंचा है। इसमें माता भद्रकाली और माता महाकाली दोनों की प्रतिमाएं हैं। माता भद्रकाली महाकाली माता के साथ श्री काल भैरव सिद्धपीठ का प्राचीन मंदिर और श्री श्री 1008 बाबा सेवादास महाराज उदासीन निर्वाण श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा ब्रह्मलीन का गुरु मंदिर यानी समाधि भी स्थापित है।

मंदिर निर्माण कर्ता संस्थापक एवं संचालनकर्ता श्रीश्री 1008 बाबा सेवादास महाराज के शिष्य श्रीश्री 108 मौनी बाबा शीतलदास महाराज उदासीन निर्वाण श्री पंचायती अखाड़ा बताते हैं कि बिना किसी इंजीनियर के नक्शा बनवाए, बिना किसी वास्तुकार के यह मंदिर बना। किसी से कुछ नहीं मांगा, ना ही किसी से चंदा लेने गए। भक्त खुद आते रहे और मंदिर बनता रहा।

मौनी बाबा बोले, मन में तृष्णा थी, ये मंदिर माता की अद्भुत शक्ति से बना

मौनी बाबा शीतलदास महाराज बताते हैं कि मन में तृष्णा थी कि संगरिया में श्री भद्रकाली-महाकाली माता का मंदिर बने। ये माता की अद्भुत शक्ति है। 24 जनवरी 1995 में निर्माण शुरू किया गया। 22 मार्च 2012 को श्री महाकाली माता की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। 23 मार्च 2012 को महानवमी को कार्यक्रम छप्पन भोग के साथ संपूर्ण हुआ था लेकिन माता भद्रकाली-महाकाली माता के मंदिर के निर्माण कार्य 27 साल से अब तक जारी है।

इधर, 2 साल बाद भरेगा पल्लू ब्रह्माणी मेला, वैक्सीन की पहली डोज का प्रमाण-पत्र दिखाने पर मिलेगा मंदिर में प्रवेश, प्रसाद फूल माला चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी

कोरोना महामारी वजह से 2 साल बाद शारदीय नवरात्र पर कस्बे में मां ब्रह्माणी का मेला भरेगा। प्रथम नवरात्र पर मंदिर परिसर में 11.15 बजे घट की स्थापना की जाएगी। खास बात ये है कि राजस्थान के अलावा गुजरात, हरियाणा, पंजाब ,पश्चिम बंगाल सहित दूर-दूर के राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन करने आते हैं परंतु कोरोना महामारी की वजह से मेलों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध था। इस बार श्रद्धालु मां के दर्शन कर सकेंगे।

यहां वर्ष में 2 बार मेला भरता है। चैत्र नवरात्रा और आसोज नवरात्रा। वहीं नवरात्रों में आरती का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव दर्शन करवाए जाएंगे। वहीं श्रद्धालुओं को मां के दर्शन करने के लिए वैक्सीन की प्रथम डोज प्रमाण-पत्र दिखाने के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा और सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क पहनने की भी अनिवार्यता रहेगी। मंदिर परिसर में थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजर व्यवस्था भी जरूरी है। मेले के दौरान प्रसाद और फूल मालाएं चढ़ाने की अनुमति भी नहीं होगी। वही मंदिर परिसर के आस-पास किसी भी प्रकार के जुलूस का आयोजन नहीं किया जाएगा।

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