लम्पी प्रकाेप:मालपुरा में 4580 गोवंश संक्रमित, 1962 रिकवर, 508 की मौत

टोंक17 दिन पहले
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मालपुरा। कर्मियों ने निजी सहयोग से 50 हजार की दवा वितरित की  । - Dainik Bhaskar
मालपुरा। कर्मियों ने निजी सहयोग से 50 हजार की दवा वितरित की ।
  • पशु चिकित्सा कर्मियों, पशुधन सहायकों ने निजी सहयोग से मंगाई 50 हजार रुपए की दवा वितरित कीं

मालपुरा उपखंड में लम्पी संक्रमित पशुओं की कुल संख्या अब तक 4580 पहुंच गई है। अब तक उपखंड क्षेत्र की 38 ग्राम पंचायतों में लम्पी रोग से 508 पशुओं की मौत हो चुकी है। बीते एक दिन में 17 पशुओं की मौत हुई है। पशु चिकित्सकों व सहायकों के प्रयास से अब तक 1962 गायों का उपचार कर उनको रिकवर किया जा चुका है। उपखंड में फैले इस रोग से पशुओं को बचाने में अब पशुपालन विभाग के अधिकारी कर्मचारी स्वयं के आर्थिक सहयोग से दवाएं खरीद कर पशुओं का उपचार कर जान बचाने में लगे हैं। पशु चिकित्साधिकारियों व पशुधन सहायकों द्वारा निजी सहयोग से 50 हजार रुपए की दवाएं क्रय की गई। पशुपालन विभाग के कार्मिकों की ओर से खरीदी गई पशुओं की दवाओं का एसडीएम रामकुमार वर्मा की मौजूदगी में पंचायत समिति के सभागार में जरूरत अनुसार वितरण किया गया। पशु चिकित्साधिकारी व नोडल प्रभारी डॉ. अनिल परतानी, अन्य पशु चिकित्सक व उपखंड के सभी पशुधन सहायक उपस्थित थे। एसडीएम ने कहा कि झोलाछाप लोगों से सावधानी बरतनी चाहिए। पशु चिकित्सकों व सहायकों के प्रयास से अब तक 1962 गायों को रिकवर किया जा चुका है।

104 गांवों तक पहुंचा लम्पी स्किन रोग, अब तक 108 पशुओं की मौत

भास्कर न्यूज | पीपलू गोवंश में लम्पी स्कीन डिजीज का कहर बढ़ता जा रहा है। बीमारी धीरे-धीरे क्षेत्र के सभी गांवों में भी पैर पसारने लगी है। मवेशियों ने खाना-पीना तक छोड़ दिया है। इससे मवेशियों पर निर्भर ग्रामीणों की परेशानियां बढऩे लगी है। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी पीपलू के डॉ. अनिल शर्मा ने 104 गांवों में संक्रमित गोवंश मिल चुके हैं। अब तक क्षेत्र में 3550 पशु लम्पी रोग के तहत संदिग्ध थे। इनमें 3219 गोवंश संक्रमित पाए गए हैं। सभी संक्रमित पशुओं का उपचार किया जा रहा हैं। वहीं 1896 रिकवर हो चुके हैं।

वहीं अब तक क्षेत्र में 108 पशुओं की मौत हो चुकी हैं। वर्तमान में 1215 लम्पी स्कीन डिजीज केस एक्टिव हैं। डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि हर पंचायत में लम्पी बीमारी से ग्रसित पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सा विभाग की गठित टीमें कार्य कर रही है। पीड़ित पशुओं का वेटरनरी विभाग की ओर से इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की चपेट में आए पशुओं के इलाज संबंधी लापरवाही न बरती जाए। रोग का पता लगने के बाद तुरंत पशुपालन विभाग के साथ संपर्क किया जाए। विभाग गाइडलाइन के तहत कार्य कर रहा है।

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