शांतिधारा का आयोजन:स्वामी और सेवक में कोई भेद नहीं होना चाहिए : मुनि अनुमान सागर

टोडारायसिंहएक महीने पहले
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मुनि अनुमान सागर जी महाराज के ससंघ के पावन सान्निध्य में अस्टानिका पर्व में आठ दिवसीय श्री मद जिन सहस्त्रनाम महामंडल विधान में रविवार को शांतिधारा और सांयकालीन आरती का शोभाग्य सुरज्ञानी, पुखराज, अविनाश, सुमित बाकलीवाल परिवार को मिला। जैन समाज अध्यक्ष संतकुमार जैन और प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि धर्म सभा में मुनि अनुमान सागर महाराज ने भक्त और भगवान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में ही यह स्वतंत्रता है कि भक्त भी भगवान बन सकता है। जैन धर्म में आप जिन आराधक की आराधना करते हो, वैसा ही बनने की शक्ति भी मिल जाती है। आराधक भी स्वयं भगवान बन सकते हैं। ऐसी स्वतंत्रता केवल जैन धर्म में है। उन्होंने कहा कि स्वामी और सेवक में कोई भेद नहीं होना चाहिए, लेकिन आज के लोगों में इंसानियत नहीं है। स्वामी को भी अपने सेवक के प्रति दयालुता, मानवीयता रखनी चाहिए। यदि मनुष्य में मानवता नहीं तो मानव कैसा, वह तो पशु समान ही हो गया।

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