आंखें छलकी:50 साल बाद प्रशासन गांवाें के संग शिविर में मिला जमीन का हक, पिता के निधन के बाद नामांतरण में गलत दर्ज हो गया था नाम

खमनोर15 दिन पहले
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महात्मा गांधी आदर्श ग्राम पंचायत सेमा में बुधवार को प्रशासन गांवाें के संग अभियान शिविर में 50 साल से गुमनाम गुमान सिंह को मिली पहचान, तो आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। शिविर में गुमान सिंह पुत्र हमेर सिंह ने शिविर में बताया कि 50 साल पहले उसके पिता का निधन होने के बाद विरासत का नामांतरण खुला।

इसमें उसके भाइयाें का नाम तो सही दर्ज हुआ लेकिन गुमानसिंह के स्थान पर भाया सिंह दर्ज हो गया। कैंप प्रभारी एसडीएम अभिषेक गोयल ने तहसीलदार खमनोर कपिल उपाध्याय से रिकाॅर्ड प्राप्त कर जांच की। रिकाॅर्ड अवलोकन में पाया कि ग्राम 50 साल पहले गुमानसिंह के पिता की माैत के समय दर्ज हुई।

संबंधित सह खातेदारों के मौके पर बयान लिए गए। बयानों और पटवारी हल्का सेमा, भूअनि सेमा व तहसीलदार खमनोर की रिपोर्ट ली। रिपोर्ट और बयानों पर मौके पर निर्णय पारित कर खातों में प्रार्थी का नाम भाया सिंह के स्थान पर गुमान सिंह करने की स्वीकृति हुई। 50 साल से गुमान सिंह का अस्तित्व भाया सिंह के नाम से दबा हुआ था। इससे वह सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहा था। राज्य सरकार द्वारा संचालित प्रशासन गांवों के संग अभियान कैंप सेमा में 50 साल बाद जब उसे उसकी असली पहचान मिली तो उसकी आंसू छलक पड़े।

शिविर में 73 व्यक्तियों ने पट्टे के लिए आवेदन किया। इसमें से 49 व्यक्तियों को पट्टे मिले। 19 व्यक्तियों को स्वच्छ भारत मिशन योजना में व्यक्तिगत शाैचालय निर्माण प्रोत्साहन राशि द्वारा लाभांवित किया। शिविर में 2 जन्म एवं 2 जनाधार कार्ड का प्रथम स्तरीय सत्यापन किया। शिविर में नाते गई महिला के दो बच्चों के पालनहार का आवेदन किया। इस दौरान नाथद्वारा एसडीएम अभिषेक गोयल सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

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