नवरात्रा विशेष:अकाल से पृथ्वी को बचाने पाताल से लाया गया था वटवृक्ष, इसी में नौवीं शताब्दी से मां विराजित

खमनोर15 दिन पहलेलेखक: हेमंत दाधीच/मनीष पुरोहित
  • कॉपी लिंक
वड़ल्या हिंदवा माताजी विशाल वट वृक्ष के कोटर में है विराजित। - Dainik Bhaskar
वड़ल्या हिंदवा माताजी विशाल वट वृक्ष के कोटर में है विराजित।
  • दैनिक भास्कर नवरात्रि के आठ दिनों तक आपकाे करवाएगा जिले के प्रसिद्ध माताजी स्थानकाें के दर्शन

खमनोर क्षेत्र के उनवास में पिपलाज माता (वड़ल्या माताजी) का मंदिर है। मेवाड़ के लोक नृत्य गवरी में भी वड़ल्या हिंदवा का प्रसंग भी इसी स्थान काे लेकर आता है। मान्यता है कि पाताल से राजा वासु के उद्यान से यह वट वृक्ष लेकर आए थे। इस वट वृक्ष के नीचे नौ लाख देवीयां झूला झुलती थी।

खमनोर के पास देवल उनवास में मां पिपलाज का भव्य मंदिर है। इस मंदिर से कई पाैराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। पीपलाज माता मंदिर से एक किमी दूरी पर वड़ल्या हिंदवा नामक स्थान है। इस वट वृक्ष के नीचे वड़ल्या हिंदवा नाम से माताजी की प्रतिमा स्थापित है। ग्रामीणों के अनुसार यह वट वृक्ष धरती का पहला वट वृक्ष है। किवदंती है कि इस वृक्ष के नीचे नाै देवियां खेला करती थी।

इसी स्थान के नाम से मेवाड़ का पारंपरिक गवरी नृत्य की शुरुआत हुई। वड़ल्या हिंदवा का अर्थ है कि वट वृक्ष के नीचे देवीयां झुला झुलती है। उनवास निवासी कृष्णवल्लभ श्रीमाली व ललित श्रीमाली ने बताया कि मंदिर की स्थापना करीब 11वीं शताब्दी में हुई। मंदिर में लगे शिलालेख के अनुसार विक्रम संवत 1016 में तत्कालीन मेवाड़ नरेश आलू-अल्लट ने मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया था। यह बात मंदिर में लगे शिलालेख से स्पष्ट होती है।

मान्यता : दूध, दही से सिंचा वटवृक्ष को, नौ लाख देवियां यहां झुला झूलती थी

अकाल के समय देवी शक्तियाें ने पाताल में राजा वासु से युद्ध कर वहां उद्यान से वट वृक्ष पृथ्वी पर लाए। पानी के अभाव में दूध, दही से सिंचाई करके इस वट वृक्ष बड़ा किया। इस वट वृक्ष के नीचे नौ लाख देवियों झुला झुलती थी।

लोक नृत्य गवरी में भी इस प्रसंग का मंचन

मेवाड़ के लोकनृत्य गवरी में वड़ल्या हिंदवा के प्रसंग का मंचन किया जाता है। यह प्रसंग उनवास के ही पिपलाज माता से जुड़ा हुआ है। गवरी में पृथ्वी में अकाल पड़ने पर राजा वासु के उद्यान से वट वृक्ष लाने, राजा जेल व वरजू कांजरी का खेल दिखाया जाता है।

नवरात्र में माताजी की होती है पूजा-अर्चना

वट वृक्ष की कोठर में स्थापित वड़ल्या हिंदवा माताजी पर नवरात्रा में माताजी की पूजा अर्चना होती है। जबकि एक किमी दूर देवल उनवास में पिपलाज माता मंदिर नवरात्रा में नौ ही दिन शक्ति की अराधना, पूजा पाठ, गरबा आदि कार्यक्रम होते हैं।

खबरें और भी हैं...