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नाथद्वारा में व्यापार पर अघोषित लाॅकडाउन:मुश्किल से पटरी परलाैटा था व्यापार, अब वापस बंद हुआ, दिन के 100 यात्री भी नहीं आ रहे

नाथद्वारा7 दिन पहले
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  • दर्शनार्थियों के नहीं आने से होटल, गेस्ट हाउस, काॅटेज हुए खाली, दुकानों पर दिनभर बैठने के बाद भी बोहनी तक नहीं हो रही

शहर के व्यापार पर इन दिनों अघोषित लाॅकडाउन लग चुका है। वैष्णव दर्शनार्थी के नहीं आने से होटल, काॅटेज, गेस्ट हाउस खाली है, वहीं दुकानों पर दिनभर बैठने के बाद भी कई दुकानों पर ताे एक भी ग्राहक नहीं आ रहा है। शहर में अधिकतम व्यापार श्रीजी दर्शन करने आने वाले वैष्णव दर्शनार्थियों पर निर्भर है।

देश के विभिन्न राज्यों में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य शहरों, राज्यों से आने वाले वैष्णव दर्शनार्थी का नाथद्वारा श्रीजी दर्शन के लिए आना बंद सा हो गया है। इसका सीधा असर शहर के व्यापार पर पड़ रहा है। होटल, लालाजी की शृंगार सामग्री, परसाद, श्रीजी की छवि, रेस्टोरेंट सहित यातायात जैसे रिक्शा, टैक्सी और वीडियाे काेच के व्यापार में भारी गिरावट देखी जा रही है।

बता दें कि गत 20 मार्च 2020 से श्रीजी दर्शन आम दर्शनार्थी के लिए बंद हुए थे, जो 17 नवंबर 2020 तक बंद रहे। 8 महीने तक शहर का करीब हर व्यापार ठप रहा था। लगातार 8 महीने की मंदी के बाद मंदिर खुलने पर वैष्णवों की आवक बढ़ने लगी थी, लेकिन एक बार फिर वैष्णवों का आना बंद हो गया है।

मंदिर प्रशासन ने 17 नवंबर से वैष्णवों को दर्शन करवाने की शुरुआत की थी। मंदिर प्रशासन केे एक से अधिक दर्शन करवाने और सभी झांकियों के दर्शन आम दर्शनार्थी के लिए खोल देने के निर्णय के बाद से शहर के व्यापारियों में पुराने दिन लौटने की आस थी।

लेकिन कोरोना की छाया फिर मंडराने लगी और 16 मार्च 2021 से मंदिर प्रशासन ने बाहरी दर्शनार्थी के कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दी। वहीं गुजरात, महाराष्ट्र में कोरोना पिछले वर्ष से भी तेजी से फैल रहा है, इससे वैष्णव दर्शनार्थी नाथद्वारा आने बंद हो गए।
होटल, काॅटेज खाली : 100 निजी होटलों में 2 हजार कमरे हैं। मार्च से दिसबंर 2020 तक होटलें बंद रही। जनवरी 2021 से निजी होटल में वैष्णवों के ठहरने की शुरुआत हुई। शनिवार, रविवार और छुट्टी के दिनों में 40 प्रतिशत कमरे ही बुक हो रहे थे। अवकाश के दिनों को छोड़कर होटल में बुकिंग नहीं के बराबर हो रही थी।

लेकिन हालात दिन प्रतिदिन सुधरते जा रहे थे। लेकिन अप्रैल 2021 के शुरुआत 7 दिनों में करीब सभी होटल, काॅटेज, गेस्ट हाउस खाली ही रहे हैं।
इन दिनाें 100 दर्शनार्थी भी नहीं आ रहे नाथद्वारा : कोरोना से पहले प्रतिदिन 5 हजार से अधिक वैष्णव श्रीजी दर्शन को आ रहे थे। अप्रैल के पहले सप्ताह से रोज 100 वैष्णव दर्शनार्थी भी नहीं आ रहे हैं। इसका असर स्थानीय व्यापार पर दिखने लगा है। शहर के व्यापार पर अघोषित लाॅकडाउन नजर आ रहा है।

शृंगार सामग्री भी नहीं बिक रही : शहर में वैष्णवों के नहीं आने का सबसे अधिक लालाजी के शृंगार करने वाले व्यापारियाें पर असर पड़ा। वैष्णवों के करीब हर घर में लालाजी की पूजा होती है। कोरोना काल से पहले प्रति वर्ष करीब 2 करोड़ की शृंगार सामग्री का व्यापार था। जनवरी से मार्च के बीच व्यापार में 50 प्रतिशत से अधिक की बिक्री हाेनी शुरू हाे गई थी। लेकिन अब वापस करीब 1 करोड़ की बिक्री ही हाेना शुरू हुआ था।

लेकिन अब फिर दुकानों से ग्राहक गायब हो गए हैं। कोरोना से पहले प्रतिवर्ष 5 करोड़ से अधिक का व्यापार होता था। वहीं प्रसाद की बिक्री भी करीब 70 प्रतिशत तक बंद हाे चुकी है। शहर में आने वाले यात्री अपने साथ श्रीजी प्रभु का प्रसाद भी लेकर जाते हैं। इन दिनों प्रसाद की बिक्री में भी 70 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। मार्च 2020 से पहले प्रतिवर्ष करीब 6 करोड़ का व्यापार प्रसाद से होता था।

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