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कार्यक्रम:इतिहास के संरक्षण-संवर्धन के लिए केंद्र स्थापित करने पर विचार

नाथद्वारा14 दिन पहले
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  • गुरुकुल पद्धति एवं आधुनिकता के संयोग से अध्यापन परिकल्पना पर हुई विचार संगोष्ठी

निर्भया नशा मुक्ति संस्थान के तत्वावधान में “गुरुकुल पद्धति एवं आधुनिकता के संयोग से अध्यापन परिकल्पना’ पर विचार संगोष्ठी रविवार काे मुछाला महादेव मंदिर परिसर घोड़ा घाटी पर हुई। संस्थापक निर्भय सिंह राणावत ने बताया कि भारतीय संस्कृति को जीवित रखने के साथ, संस्कृति विरासत, चरित्र निर्माण को सर्वोच्च स्थान प्रदान करने में मेवाड़ की भूमिका अग्रणी रही है।

वर्तमान प्रचलित शिक्षा पद्धति में चरित्र निर्माण पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जबकि समाज एवं राष्ट्र का निर्माण चरित्र निर्माण से ही संभव है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रख शिक्षा का एक ऐसा शक्ति केंद्र स्थापित हो जहां सेवा, त्याग, समर्पण, सहयोग भावना, संस्कृति, इतिहास का संरक्षण-संवर्धन होने के साथ विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो।

विचार संगोष्ठी में बालक-बालिकाओं के लिए परंपरागत खेल, वेदिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा के प्रभावी संयोग पर भी विचार किया गया। इस पर उपस्थित शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्धजन एवं संत सानिध्य ने रचनात्मक सुझाव प्रदान किए।

संयोजक रघुराज सिंह झाला, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा मेवाड़ के जिलाध्यक्ष यादवेंद्र सिंह रलावता, महिला कार्यकारिणी अध्यक्ष ज्योत्सना झाला, सत्यपाल सिंह चूंडावत, भोम सिंह चुंडावत, शंकर सिंह शक्तावत, श्याम सिंह झाला, गोपाल सिंह रामपुरिया, शंकर सिंह, सिद्धराज सिंह मालपुर, ऋषिराज सिंह कोठारिया, ईश्वर नाथ, विक्रम सिंह, भूपेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, निर्मला कंवर, जबर सिंह, राजेश सिंह राठौड़, दशरथ सिंह झाला, टवंर सिंह चौहान, बलवंत सिंह झाला, शंकर सिंह मांडक, योगेंद्र सिंह कोठारिया आदि ने प्रदान किए। संगोष्ठी में 150 से अधिक लोग उपस्थित थे। संचालन रणवीर सिंह जोलावास ने किया तथा शूरवीर सिंह झाला धन्यवाद ज्ञापित किया।

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