श्रीजी के जयकार:नाथद्वारा की गलियों में दो साल बाद गौ क्रीड़ा

नाथद्वारा21 दिन पहले
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कोरोना के कारण नाथद्वारा में दो साल तक खंेखरे पर केवल पारंपरिक रस्म अदा की गई। इस बार कोरोना केस कम होने पर खेंखर पर गौ क्रीड़ा का आयोजन हुआ तो नगर की गलियों, भवनों की छतों पर मौजूद हजारों श्रद्धालु राेमांचित हो गए। वैष्णव सम्प्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथद्वारा में 4 व 5 नवंबर को दो दिवसीय दीपोत्सव व अन्नकूट महोत्सव हजारों वैष्णवों की उपस्थिति में परंपरानुसार मनाया गया। पर्व के दौरान गौ क्रीडा, कान्ह जगाई व गोवर्धन पूजा आदि अलौकिक व अनूठे उत्सव हुए। दीपोत्सव पर श्रीजी प्रभु के संग श्री लालन प्यारे को उत्सव के भाव से अनूठा शृंगार धराया गया।

तिलकायत राकेश महाराज व विशाल बावा ने ठाकुरजी की आरती उतारी, वहीं कीर्तनकारों ने विविध राग में पदों का गान किया। 150 मन चावल से बना अन्नकूट लूटने के लिए हजारों आदिवासी उमड़ पड़े। यह सभी आयोजन देखने के लिए वैष्णवों की भारी भीड़ उमड़ी। दो दिन तक शहर में गौ क्रीड़ा का अलौकिक आयोजन हुआ । दीपोत्सव के एक दिन पूर्व गौशाला के हेड ग्वाल के सानिध्य में गायों को सजा-धजाकर शहर में लाया गया। दीपावली पर कान्ह जगाई की रस्म निभाई गई। अन्नकूट पर गायों को पुनः मंदिर तक ले जाकर गोवर्धन गुचराने की रस्म अदा की गई । इस दौरान मंदिर से गोविंद चौक तक गायों को खिलाया गया।

दोपहर को ग्वाल-बालों की टोली ने किलंगी, टोरो, अंगरखी धोती पारंपरिक वेषभूषा पहन कर बने अलबेले छैले ग्वाल बाल व हीड का गान करते हुए मंदिर की परिक्रमा लगाई। इसके बाद गौ क्रीडा का कार्यक्रम शुरू हुआ। ग्वाल-बालों ने कुंपी से गायों को उकसाया तो गायों ने भी उनके साथ-साथ उपस्थित अपार जनसमुदाय पर लपक कर सबको दौड़ाया। मंदिर मार्ग सहित आस-पास का क्षेत्र ‘‘गिरिराज धरण की जय-आज के आनन्द की जय‘‘ के जयकारों से गुंजायमान हो गया। गायें एक साथ भागती हुई नाथद्वारा की गलियों से गुजरती है। इस दौरान भक्त लोग दोनों तरफ लाइन बनाकर गायों को छूकर आशीर्वाद लेते हैं।

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