प्रशासन गांव के संग अभियान:जमाबंदी में त्रुटी के कारण नामातंरण खुलवाने में हो रही थी परेशानी, शिविर में सुधारी

नाथद्वाराएक महीने पहले
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  • राजमल बना राजेंद्र और तुलसीराम हुआ तुलसीदास तो खुला नामांतरण

प्रशासन गांवों के संग अभियान में नामांतरण खुलवाने आए लोगों को जमाबंदी में त्रुटी होने का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। जमाबंदी में दर्ज नाम गलत होने से विरासत का हक लेने आए परिजनों को पहले जमाबंदी में नाम ठीक करवाने का काम करवाना पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत उपली ओडण में लगाए प्रशासन गांवों के संग शिविर में भी नामांतरण खुलवाने आए लोगों को जमाबंदी में त्रुटी का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। बताया कि शिविर में उपली ओडण निवासी महावीर जैन ने नामांतरण के लिए आवेदन किया। महावीर ने बताया कि उसने पिता की मृत्यु होने के बाद करीब 2 साल पहले नामांतरण का आवेदन किया था।

जमाबंदी में पिता का नाम राजेंद्र की जगह राजमल दर्ज हो गया, इससे नामातंरण नहीं खुल पा रहा था। शिविर प्रभारी नाथद्वारा एसडीएम अभिषेक गोयल ने तहसीलदार कपिल उपाध्याय से रिकार्ड मंगवाकर जांच की गई। जांच में पता चला कि राजस्व ग्राम उपली ओडण में प्रार्थी की कृषि भूमि है, इसमें पिता का नाम राजमल दर्ज है।

यह त्रुटि वर्षों से चली आ रही थी, इस पर शुद्धि प्रकरण एलआरएसीटी के तहत दर्ज किया गया। संबंधित सह खातेदारों के बयान लिए गए। पटवारी और तहसीलदार से रिपोर्ट ली गई। बयान और रिपोर्ट सहित मौके की जांच कर जमाबंदी में राजमल की जगह राजेंद्र नाम लिखा गया। इसके बाद महावीर के नाम पर नामांतरण खोला गया। वहीं एक अन्य मामले मे जमाबंदी में दर्ज नाम तुलसीराम को सुधार कर तुलसीदास करवाने पर नामांतरण खोला गया।

दिव्यांगजनों को हाथों-हाथ प्रमाण-पत्र जारी किए

देवगढ़ | विधायक सुदर्शन सिंह रावत ने मंगलवार काे दिवेर में प्रशासन गांव के संग अभियान शिविर भाग लिया। विधायक ने 21 विभागों के काउंटर पर अपनी परिवेदना पेय कर रहे आमजन से वार्ता कर समस्याओं की जानकारी ली। विधायक ने एसडीओ उम्मेद सिंह को निर्देशित किया कि प्रदेश सरकार द्वारा इन शिविरों में नियुक्त किए सभी 21 विभागों से जुड़ी सेवाएं शिविर में उपलब्ध होनी चाहिए।

आमजन की परिवेदनाओं को सरकार की मंशानुसार त्वरित निस्तारण करें। आबादी में बसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने आशियाने का पट्टा मिलना चाहिए। ताकि पट्टा धारक को स्वरोजगार एवं अन्य कामों के लिए वित्तीय संस्थानों से ऋण उपलब्ध हो सके।

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