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हिंदी दिवस:राष्ट्रभाषा हिंदी भारतीयता का प्रतीक, इसमें सामंजस्य की भावना परिलक्षित- डाॅ. अमरसिंह

नाथद्वारा8 दिन पहले
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  • साहित्य मंडल नाथद्वारा की ओर से हिंदी लाओ-देश बचाओ कार्यक्रम शुरू, साहित्यकारों का सम्मान

साहित्य मंडल श्री नाथद्वारा की तरफ से मंगलवार को हिंदी लाओ-देश बचाओ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमर सिंह बधान ने कहा कि राष्ट्रभाषा हिंदी भारतीयता का प्रतीक है। इसमें सामंजस्य की भावना सर्वत्र परिलक्षित है। यह भाषा राष्ट्र की वाणी को मुखरित करने वाली, सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाली, विश्व बंधुत्व की भावना को परिभाषित करने वाली है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पं. मदन मोहन ने कहा कि अंग्रेजी भाषा पूंजी और धन की भाषा है।

यह लोग लिप्सा की भाषा है। जबकि हिंदी हृदय की भाषा है। हमें हिंदी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आनंद मोहन तिवारी ने कहा कि कहा कि भाषा वहीं मुख्य है जो तोड़ने की बजाय जोड़ने का संदेश दे। जोड़ने की भाषा हिंदी के अतिरिक्त दूसरी नहीं हो सकती। विशिष्ट अतिथि पं. महेश बोहरे ने कहा कि हिंदी भारत की आत्मा है। हिमालय से निकली हिंदी रूपी गंगा में सभी भारतीय भाषाओं का जल समाहित है। उसी जल का अभिषेक कर हमें भारत को शिखर तक ले जाना है।

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