पुष्टिमार्गीय शक्ति की लीला:श्रीनाथजी प्रभु को मुकुट-काछनी का शृंगार धराया

नाथद्वारा2 महीने पहले
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बुधवार को दुर्गाष्टमी पर नवविलास के तहत पुष्टिमार्ग में अष्टम विलास का लीलास्थल शांतन कुंड है और मनोरथ की मुख्य सखी भामाजी भावनीजी है। नवरात्रि में मर्यादा मार्गीय शक्ति पूजन के मूल में शिव है, जबकि पुष्टिमार्गीय शक्ति की लीला प्रकार के मूल में स्वयं नंदनंदन प्रभु श्रीकृष्ण है।

श्रीजी की पिछवाई के सुंदर चित्रांकन में गोपियां समूह में भद्रवन में वनदेवी के पूजन के लिए जा रही हैं, लेकिन गोपियां चिंतन एवं गुणगान नंदनंदन श्रीकृष्ण का ही कर रही है। प्रभु को नियम का मुकुट-काछनी का शृंगार धराया। रासपंचाध्यायी के आधार पर श्रीजी को शरद पूर्णिमा रास महोत्सव के मुकुट के पांच शृंगार धराए जाते हैं।

बुधवार को महारास की सेवा का प्रथम मुकुट का शृंगार धराया। इसमें प्रभु प्रथम वेणुनाद करते हैं, गाेपियां प्रश्न करती हैं। उपदेश तथा प्रणय गीत होते हैं, इससे रास के भाव से आती गोपियाें के चित्रांकन की पिछवाई धराई जाती है।

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