लीगल रिपाेर्ट:किशाेरी से दुष्कर्म के दो मामलों में दोषियों को 10-10 साल कारावास

उदयपुर2 महीने पहले
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  • एक मामले में दो बार बेची गई 16 साल की पीड़िता, दूसरे केस में दोषी पर 1 लाख का अर्थ दंड भी

पाेक्साे-1 और पोक्साे-2 काेर्ट ने किशोरी से दुष्कर्म से जुड़े दो मामलों में दो आरोपियों को 10-10 साल की कैद सुनाई है। एक मामले में महिला सहित 3 अभियुक्त संदेह के लाभ से बरी हो गए, जबकि दूसरे में कोर्ट ने पीड़िता के लिए प्रतिकर की अनुशंसा की है।

प्रकरण के अनुसार 16 साल की उम्र में दाे बार बेची गई और दुष्कर्म का शिकार हुई किशोरी के पिता ने 19 अगस्त, 2014 काे सराड़ा थाने में रिपाेर्ट दी थी। बताया कि करीब दाे माह पहले 16 साल की बेटी माेबाइल रीचार्ज लेने के लिए सराड़ा बस स्टैंड गई थी, जहां आराेपी सज्जनबाई मिली।

उसके साथ उसकी बेटी का देवर हीरा मीणा भी था। सज्जन बाई ने बेटी काे कहा कि हीरा काे सलूंबर छाेड़कर आते हैं। फिर बेटी के ना कहने के बावजूद सलूंबर से प्रतापगढ़ स्थित टामटा ले गई। सज्जनबाई बेटी काे टामटा छाेड़कर सराड़ा आ गई, जहां हीरा, खानू और माना ने उसे वापस घर नहीं आने दिया।

बेटी ने पुलिस की धमकी दी ताे खानू मीणा सराड़ा छाेड़ने के बहाने जाेधपुर ले गया और वहां किसी वृद्ध से रुपए लेकर बेटी काे बेच दिया। विराेध पर खानू तीन दिन बाद बेटी काे वापस टामटा ले आया। फिर खानू और माना ने रुपए लेकर बेटी काे लालू के हाथ बेच दिया। लालू ने दुष्कर्म किया। पुत्री 15 अगस्त, 2014 काे जैसे-तैसे भागकर घर लाैटी और पूरी कहानी बताई।

पुलिस ने रिपाेर्ट दर्ज कर जांच की और खानू राम, लालूराम, सज्जनबाई, मानाराम के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में चालान पेश किया। काेर्ट ने सुनवाई कर खानूराम, मानाराम और सज्जनबाई काे संदेह का लाभ देकर दाेषमुक्त किया और लालू राम काे 10 साल कठाेर कैद की सजा सुनाई।

पीड़िता की मानसिक वेदना कम करने का कोई उपाय नहीं, प्रतिकर दिलवाना न्याय संगत

घर में अकेली पाकर किशाेरी से दुष्कर्म के मामले में पोक्सो कोर्ट-2 ने कांकरी डूंगरी (ऋषभदेव) निवासी संजय पुत्र अमृतलाल मीणा काे 10 साल कठाेर करावास और एक लाख रुपए आर्थिक दंड सुनाया। पीड़िता ने 9 जनवरी, 2018 काे ऋषभदेव थाने में रिपाेर्ट दर्ज कराई थी।

बताया था कि 9 जनवरी को तड़के 3.30 बजे घर में साे रही थी। एकाएक संजय आया और दुष्कर्म किया। धमकाया कि किसी काे बताया ताे जान से मार देगा। तब माता-पिता दूसरे मकान में साे रहे थे। सुबह उन्हें सारी बात बताई, फिर थाने पहुंचे।

पुलिस ने 30 जनवरी, 2019 काे चालान पेश किया। विशिष्ट लाेक अभियाेजक कुलदीप परिहार ने 14 गवाह और 17 दस्तावेज पेश किए। एफएसएल रिपाेर्ट और पीड़िता के कहानी काे समर्थन करने के आधार पर आराेपी काे सजा हुई। काेर्ट ने कहा- पीड़िता के साथ जाे कृत्य हुआ है, उसका उसके मन-मस्तिष्क पर जिंदगी भर प्रभाव रहेगा। वह भूल नहीं पाएगी और मानसिक वेदना रहेगी। उसे मानसिक वेदना भी भुगतनी पड़ेगी, जिसे कम किए जाने का काेई उपाय नहीं है। पीड़िता की पीड़ा कम करने के लिए उसे प्रतिकर राशि दिलवाने की अनुशंसा की जाती है।

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