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  • 16 Children Rescued Four Days Ago Do Not Work Again, So They Are Not Handed Over To Parents, Now They Will Teach Handicrafts And Other Skills In Skill Development

भास्कर खास:चार दिन पहले छुड़ाए 16 बच्चे फिर मजदूरी न करे, इसलिए माता-पिता को नहीं सौंपा, अब कौशल विकास में हैंडीक्राफ्ट व अन्य हुनर सिखाएंगे

उदयपुर3 महीने पहले
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रेस्क्यू बच्चे शेल्टर होम में। संचालक बातचीत करते हुए। - Dainik Bhaskar
रेस्क्यू बच्चे शेल्टर होम में। संचालक बातचीत करते हुए।

बाल श्रमिकों के पुनर्वास को लेकर आखिरकार बड़ा कदम उठाया गया है। ऐसा पहली बार है, जब बाल श्रम से छुड़ाए गए बच्चों को कानूनी औपचारिकताओं के तुरंत बाद उनके माता-पिता को नहीं सौंपा जा रहा। चार दिन पहले बाल श्रम निषेध दिवस पर छुड़ाए गए 16 बच्चों की सीडब्ल्यूसी और एनजीओ ने साेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार की है।

यह बदलाव भास्कर की खबरों पर आया है। यही नहीं, इन बच्चों को हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण से जाेड़ने के लिए प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। ये बच्चे जैसे ही शेल्टर हाेम से निकलेंगे, उन्हें कौशल विकास से जोड़ा जाएगा ताकि वे हुनर और अच्छी आय पा सकें। हालांकि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से अमल होने के बाद ही इन बच्चों की जिंदगी संवर पाएगी।

पुनर्वास के अलावा केस में सख्त धाराएं जुड़ाने की तैयारी, पक्की रिपोर्ट बनाएंगे

रेस्क्यू बच्चे सीडब्ल्यूसी के आदेश पर आसरा विकास सेवा संस्थान में शेल्टर हुए थे। संचालक भोजराज सिंह ने बताया कि माता-पिता आए थे, लेकिन बच्चे उन्हें नहीं सौंपे हैं। सीडब्ल्यूसी के मार्गदर्शन में बच्चों की साेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट बना रहे हैं। इनमें बच्चों के स्कूल, बाल श्रम से जुड़ने के समय, पारिवारिक स्थिति आदि को शामिल किया है। साथ ही तस्करी से जुड़ी धाराएं एफआईआर में जुड़वाने का प्रयास कर रहे हैं। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ध्रुव कुमार ने बताया कि बच्चों के पुनर्वास के लिए आईसीआईसीआई बैंक की सीएसआर विंग से बातचीत की है। वे ऐसे बच्चों काे रोजगार परक प्रशिक्षण की प्लानिंग बना रहे हैं। वनवासी कल्याण परिषद ने भी काेटड़ा में हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव बनाया है। वहां बच्चों काे प्रशिक्षण देकर वस्तुएं बनवाई जाएंगी, भुगतान भी होगा। रेस्क्यू बच्चों काे जल्द इनसे जाेड़ा जाएगा।

कहीं प्रस्ताव ही न रह जाए : सीडब्ल्यूसी और एनजीओ ने बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए कदम तो बढ़ाया है लेकिन अब इस पर लगातार काम की जरूरत होगी। वजह यह है कि पहले भी कई प्रस्ताव बने, लेकिन हकीकत में नहीं बदल सके।

12 जून काे बाल श्रमिक निषेध दिवस था। इसी दिन सुखेर और गोगुंदा थाना क्षेत्र में 16 बाल श्रमिकों काे रेस्क्यू किया गया था। भास्कर ने इस खास मौके और अगले दिन भी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। बताया था कि हर बार रेस्क्यू रेस्क्यू के बाद बच्चे माता-पिता काे सौंप दिए जाते हैं, लेकिन निगरानी नहीं होने से वे वापस बाल श्रम और तस्करों के चंगुल में फंस जाते हैं। इसी काे लेकर सीडब्ल्यूसी और शेल्टर हाेम प्रबंधन ने बच्चे माता-पिता काे सौंपने के बजाय पूरी कार्रवाई कर रहे हैं।

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