उदयपुर में दो दिवसीय कांफ्रेंस का समापन:देशभर से 300 कानूनविदो ने किया मंथन कर दिए सुझाव, एक्टिंग चीफ जस्टिस बोले - तकनीक का बेहतर उपयोग हो

उदयपुर11 दिन पहले

उदयपुर में यूनियन ऑफ इंडिया काउंसलिंग की वेस्ट जोन की दो दिवसीय काँफ्रेंस रविवार को खत्म हुई। काँफ्रेंस में पैनल की ओर से केन्द्र सरकार को कानून में बदलाव के सुझाव पर विस्तृत रिपोर्ट भेजेंगे। इसमें साइबर क्राइम, व्हाइट कॉलर क्राइम और बेमानी संपत्ति के मामले पर नए कानून और सरकार के पक्ष मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। काँफ्रेंस में देश भर से राज्यों से आए 300 से ज्यादा अधिवक्ताओं ने भाग लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कानून से जुडे़ मसलों पर लंबा मंथन हुआ।

वहीं दूसरे दिन कानूनविदों ने आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने के लिए लंबा मंथन किया। एक निजी होटल में आयोजित हुए समापन समारोह के एक्टिंग चीफ जस्टिस एम एम श्रीवास्तव और अध्यक्षता जस्टिस अशोक गौड़ ने की। एक्टिंग चीफ जस्टिस एम एम श्रीवास्तव ने दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में आयोजित हुए तीन सत्र को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले कारणों में आर्थिक अपराध मुख्य हैं। आर्थिक अपराधों के प्रति अब हमें और मजबूत तरीके से सामना करना होगा। जस्टिस अशोक गौड़ ने आर्थिक अपराधों से लड़ने में तकनीक का बेहतर उपयोग करने और अधिवक्ताओं को अपडेट रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि तकनीक के बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

इस कार्यक्रम में समापन मौके पर एक्टिंग चीफ जस्टिस एम एम श्रीवास्तव और अध्यक्षता जस्टिस अशोक गौड़ ने की।
इस कार्यक्रम में समापन मौके पर एक्टिंग चीफ जस्टिस एम एम श्रीवास्तव और अध्यक्षता जस्टिस अशोक गौड़ ने की।

कॉन्फ्रेंस के कन्वीनर और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया आरडी रस्तोगी ने बताया कि पांच राज्यों के पैनल अधिवक्ताओं ने कई कानूनी मुद्दों पर चर्चा की। इस कॉन्फ्रेंस में मिले सुझावों और निर्णयों का प्रस्ताव शीघ्र ही केन्द्र सरकार को भेजा जायेगा। बता दें कि इससे पहले शनिवार को केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश की ज्यूडिशरी के कॉलेजियम सिस्टम को लेकर पहली बार सख्त शब्दों के साथ सार्वजनिक तौर पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कोई सिस्टम अगर ठीक से नहीं चल रहा है, तो उसमें क्या बदलाव होना चाहिए। इसकी चिंता करना सबका कर्तव्य है। देश की लोअर कोर्ट में जजों की नियुक्ति का एक सिस्टम है और उसके अनुसार ही नियुक्तियां होती हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हम चाहते है कि जजों की नियुक्तियां हो। हमने प्रयास किए हैं और बड़ी संख्या में हमने वैकेंसी के प्रतिशत को भी कम किया है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशरी में ज्यादा से ज्यादा जज हो। पूरी ताकत के साथ ज्यूडिशियल पॉवर के साथ काम करें। कोई भी सिस्टम 100 प्रतिशत परफेक्ट नहीं हो सकता। उसमें सुधार किया जा सकता है।

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