कन्हैयालाल हत्याकांड में 20 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस:4 थानों और स्पेशल ब्रांच की लापरवाही उजागर, प्रमोशन नहीं होंगे

उदयपुर2 महीने पहले

उदयपुर के कन्हैयालाल साहू हत्याकांड मामले में पुलिस मुख्यालय ने 20 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। जिले के संबंधित थाने के पुलिसकर्मियों की लापरवाही उजागर होने के बाद यह कदम उठाया गया है। इनमें धानमंडी, भूपालपुरा, सुखेर, सूरजपोल और डीएसबी (डिस्ट्रिक्ट स्पेशल ब्रांच) के अधिकारी-पुलिसकर्मी शामिल हैं। जब तक जांच चलेगी, इन पुलिसकर्मियों के प्रमोशन नहीं होंगे। फील्ड पोस्टिंग देने से पहले भी विचार किया जाएगा।

जयपुर पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश के तहत हत्याकांड के समय धानमंडी, सूरजपोल, भूपालपुरा और सुखेर थानाधिकारियों, संबंधित थानों के हेड कॉन्स्टेबल और बीट कांस्टेबल सहित तत्कालीन पुलिस अधिकारियों को नोटिस मिले हैं।

कन्हैयालाल की दुकान। यहीं पर रियाज और गौस ने चाकू से कई वार कर कन्हैयालाल की हत्या कर दी थी। घटना के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने दोनों को दबोच लिया था।
कन्हैयालाल की दुकान। यहीं पर रियाज और गौस ने चाकू से कई वार कर कन्हैयालाल की हत्या कर दी थी। घटना के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने दोनों को दबोच लिया था।

इसलिए इन थानों को मिला नोटिस

  • धानमंडी: पूरे घटनाक्रम में सबसे पहले कन्हैयालाल को धमकी मिली थी। इसकी रिपोर्ट धानमंडी में थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम इसी थाना क्षेत्र में हुआ।
  • भूपालपुरा: कलेक्ट्रेट भूपालपुरा थाना क्षेत्र में आता है। 20 जून को कलेक्ट्री के बाहर हुए प्रदर्शन में आपत्तिजनक नारे लगाए गए। विभाग का मानना है कि भूपालपुरा थाने और कलेक्ट्री स्थित चौकी पर तैनात पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए था।
  • सूरजपोल: इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले आतंकी बीते कई सालों से सूरजपोल थाना क्षेत्र में रह रहे थे। हत्याकांड की साजिश भी यहीं से रची गई।
  • सुखेर ​​​​​: आतंकी कन्हैया की हत्या के बाद फरार होकर सुखेर स्थित फैक्ट्री में छुपे थे। यहां से वीडियो बनाकर वायरल किया था।
  • डीएसबी शाखा : यह शाखा कलेक्ट्रेट के बाहर होने वाले सभी प्रदर्शनों की गोपनीय तरीके से निगरानी कर रिपोर्ट बनाती है। जिले के SP को पूरी रिपोर्ट दी जाती है। यहां कलेक्ट्री के बाहर प्रदर्शन में आपत्तिजनक नारे लगे थे, फिर भी गंभीरता नहीं दिखाई गई।

क्या होते हैं ये नोटिस
पुलिस को 16सीसी और 17सीसी के तहत नोटिस जारी हुए हैं। आइए जानते हैं, आखिर ये होता क्या है?

पुलिस विभाग द्वारा किसी पुलिसकर्मी को दी गई मेजर पनिशमेंट की कैटेगरी है। 16-सीसी नोटिस के तहत जब तक मामले की जांच चलेगी, तब तक उस पुलिस अधिकारी या पुलिसकर्मी का प्रमोशन नहीं होगा। उच्च अधिकारी चाहें तो उसे फील्ड पोस्टिंग से भी हटा सकते हैं। जानबूझकर लापरवाही पाई जाती है तो उसे नौकरी से बर्खास्त भी किया जा सकता है।

वहीं, 17 सीसी के नोटिस के तहत पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच चलती है। हालांकि प्रमोशन और फील्ड पोस्टिंग में उसे नुकसान नहीं होता है।

NIA ने कोर्ट से चार्जशीट पेश करने के लिए वक्त मांगा
इस आतंकी घटना की जांच कर रही एनआईए ने मामले में चार्जशीट पेश करने के लिए कोर्ट से और वक्त मांगा है। जयपुर की स्पेशल कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वे मामले में और आरोपियों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में चार्जशीट दाखिल करने के लिए उन्हें तीन महीने और दिए जाएं। किसी भी मामले में जांच एजेंसी को 90 दिन में चालान पेश करना होता है। 28 सितंबर को इस आतंकी घटना के तीन महीने हो रहे हैं। ऐसे में तय समय के पूरा होने से पहले एनआईए ने कोर्ट से चार्जशीट पेश करने के लिए आग्रह कर समय मांगा है।

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