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भ्रष्टाचार का विलास:होटल की संपत्ति के सत्यापन में दिनभर जुटी रही 4 टीमें, आज अंतरिम रिपोर्ट देंगे, फाइनल के लिए मांगेंगे समय

उदयपुरएक महीने पहले
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  • सीबीआई कोर्ट के आदेश की पालना में लगा रहा प्रशासन

हाेटल लक्ष्मी विलास काे कब्जे में लेने काे लेकर जिला प्रशासन की तरफ से इस मामले में हुई कार्रवाई की शुक्रवार काे सीबीआई काेर्ट में अंतरिम रिपाेर्ट पेश की जाएगी। रिसीवर (कलेक्टर) के प्रतिनिधि के रूप में एसीईओ जिला परिषद शैलेष सुराणा काेर्ट में यह रिपाेर्ट पेश करेंगे। सत्यापन पूरा होने में अभी तीन से पांच दिन का समय और लग सकता है। ऐसे में रिसीवर कोर्ट से समय बढ़ाने की मांग भी करेंगे। हाेटल में दिन

भर चली चल-अचल संपत्ति के सत्यापन की प्रक्रिया के बाद देर शाम कलेक्टर चेतन देवड़ा ने कलेक्ट्री में सुराणा के साथ ही एसडीएम गिर्वा साैम्या झा, यूआईटी सचिव अरूण हसीजा, नगर निगम के उपायुक्त अनिल शर्मा, कार्यवाहक तहसीलदार गिर्वा सुरेंद्र बिश्नोई से अंतरिम रिपाेर्ट काे लेकर विस्तार से चर्चा की। सीबीआई काेर्ट के आदेश में कुछ बिन्दुओं काे लेकर स्थिति साफ नहीं हाेेने से प्रशासन सीबीअाई काेर्ट से मार्ग

दर्शन भी मांगेगा जिससे कि बाकी की प्रक्रिया भी समय रहते पूरी हाे सके। दरअसल सीबीआई काेर्ट ने ताे रिसीवर के रूप में उदयपुर कलेक्टर चेतन देवड़ा काे हाेटल का कब्जा लेकर तीन दिन में रिपाेर्ट पेश करने के आदेश दिए है, लेकिन बड़ा परिसर हाेने से इतने कम समय मेंं चल-अचल संपत्ति का सत्यापन किया जाना संभव नहीं है। उसके बावजूद प्रशासन ने हाेटल कब्जे में लेकर दाे दिनाें में ही युद्ध स्तर पर मिशन

के रूप में सक्रियता दिखाते हुए काफी कुछ काम कर लिया। ऐसे में शुक्रवार काे सीबीआई काेर्ट में अंतरिम रिपाेर्ट रिपाेर्ट पेश करना तय किया है। काम पूरा हाेने पर फाईनल रिपाेर्ट पेश की जा सकेगी। काेर्ट ने 15 सितंबर काे हाेटल का कब्जा लेकर रिसीवर के रूप में उदयपुर कलेक्टर काे तीन दिन में रिपाेर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इसी कारण प्रशासन ने बिना काेई देरी किए एक ही दिन में हाेटल काे कब्जे लेकर माैके पर बाेर्ड भी लगवा दिए और चल-अचल संपत्ति की लिस्टिंग का काम भी शुरू कर दिया।

यह है पूरा मामला : 252 करोड़ के होटल को घाटे का उपक्रम बता 7.50 करोड़ में बेचा

आईटीडीसी के स्वामित्व वाले होटल लक्ष्मी विलास काे 2001-2002 में केंद्रीय विनिवेश मंत्रालय ने घाटे का उपक्रम मानते हुए भारत होटल लिमिटेड को मात्र 7.50 कराेड़ में बेच दिया था।

डील के वक्त केंद्र में एनडीए की सरकार थी। साल 2014 में जब केंद्र में यूपीए सरकार अाई तो इस सौदे को भ्रष्टाचार मान सीबीआई ने केस दर्ज किया।

सीबीआई ने अपनी जांच में इस होटल की कीमत 252 करोड़ होना बताया। एजेंसी ने रिपोर्ट में बताया कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत सरकार को 143.48 करोड़ का घाटा पहुंचाया गया।

सीबीआई ने विनिवेश मंत्रालय के सचिव बैजल, मै. लैजार्ड प्राइवेट लिमिटेड के एमडी आशीष गुहा, वैल्यूअर कांतिलाल करमसे, भारत होटल्स लिमिटेड के प्रतिनिधि व अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया।

इस मामले में कोर्ट का निर्णय होता उससे पहले 2019 में केंद्र में फिर से एनडीए की सरकार आ गई। सरकार बदलते ही जांच एजेंसी का रवैया भी बदल गया। 2014 में जिस सौदे को 243.6 कराेड़ का घाेटाला माना था अगस्त 2019 में उसे ही नियमानुसार मानकर क्लाेजर रिपाेर्ट लगा केस बंद करने का निर्णय ले लिया।

अब सीबीआई कोर्ट के विशेष जज पूरण कुमार शर्मा में क्लोजर रिपोर्ट पर असंतोष जता फिर से जांच करने के आदेश दे दिए।

मेन गेट, निकासी गेट अाैर हाेटल परिसर में लगवाए रिसीवरी के बाेर

हाेटल के मेन गेट, निकासी गेट और परिसर में जगह-जगह बाेर्ड लगाए गए। इन पर सीबीअाई काेर्ट के अादेश का हवाला देते हुए उल्लेख किया कि यह संपत्ति सीबीआई काेर्ट से 15 सितंबर काे जारी अादेश के तहत रिसीवरी में हैं।

कलेक्टर चेतन देवड़ा भी गुरुवार काे हाेटल पहुंचे और यहां चल रही प्रक्रिया की प्रगति देखी। उनके साथ अतिरिक्त संभागीय आयुक्त बीएल मंत्री, एसडीएम गिर्वा सौम्या झा, यूआईटी सचिव अरूण हसीजा भी माैजूद थे।जब जांच रिपोर्ट दोबारा पेश हुई तो कोर्ट ने इसे आपराधिक साजिश मान होटल संपत्ति कुर्क करने के आदेश दे दिए।

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