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भास्कर खास:12 माह में वेडिंग इंडस्ट्री के 400 करोड़ डूबे, कारोबारी बोले- इस महीने 4 मुहूर्त, गाइड लाइन बजा रही बैंड

उदयपुर19 दिन पहले
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मेहमानों की संख्या और नाइट इवेंट में रियायत से मिल सकती है राहत - Dainik Bhaskar
मेहमानों की संख्या और नाइट इवेंट में रियायत से मिल सकती है राहत
  • चिंता- 20 जुलाई को देव शयन के साथ 4 महीने वैसे ही लॉक हो जाएगा सेक्टर

एक साल में करीब 400 करोड़ का नुकसान झेल चुकी शहर की वेडिंग इंडस्ट्री सरकार से राहत का डोज मांग रही है। सालाना 1 हजार करोड़ का बिजनेस करने वाला यह सेक्टर जुलाई के चार बड़े मुहूर्त को लेकर उत्साहित तो है, लेकिन शादियों में 40 मेहमानों और नाइट इवेंट नहीं करने की पाबंदी से मायूस भी है।

इस माह लग्न के लिए 7, 13, 15 को शुभ और 18 को अबूझ मुहूर्त है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर में 70-80 शादियां होने से 1 करोड़ से ज्यादा बिजनेस की संभावना भी नहीं है। टेंट-कैटरिंग हो या बैंड, हर कोई इस गाइडलाइन से निराश है। टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर चावत ने बताया कि इस गाइड लाइन से टेंट व्यवसायियों को कोई राहत नहीं है।

वजह यह है कि अब लोग तोरण द्वार की सजावट जैसे ऑर्डर ही दे रहे हैं। पहले जहां 5 लाख से भी ज्यादा का ऑर्डर मिलता था, अब 20-25 हजार का ही मिल रहा है। समारोह छोटे होने से हलवाई-केटरर्स को भी बड़े ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। रात के इवेंट नहीं होने से लाइटिंग, लार्ज डेकोरेशन के ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। इससे बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

बता दें, गाइडलाइन के खिलाफ 30 जून को वेंडिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। मांग की थी कि मेहमानों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 200 तक की जाए और रात में भी समारोह की छूट दी जाए। ताकि बचे हुए सावे में बिजनेस हो सके।

क्योंकि 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से अगले 4 महीने तक इंडस्ट्री वैसे ही ठप हो रहेगी। फिर शादियों और मांगलिक कार्यों के मुहूर्त 15 नवंबर से ही शुरू होंगे। मौजूदा सीजन की काफी शादियां पहले ही गुजरात शिफ्ट हो चुकी हैं। अब यहां करने को खास कुछ बचा ही नहीं है।

बैंड वालों की परेशानी- 50 का ग्रुप, रोजगार 8-10 को ही

बैंड एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष बुलबुल भाई का कहना है कि पहले ही ऑर्डर मुश्किल से मिल रहे हैं। अब 40 लोगों की संख्या होने से काम काफी प्रभावित हुआ है। शादी में सिर्फ 8-10 का ग्रुप जा पाता है। जबकि एक ग्रुप से करीब 50 लोग जुड़े हैं। ऐसे में ग्रुप के अन्य लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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