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नगर निगम की कार्रवाई:49 साल पहले यूआईटी ने हाॅस्टल बनाने जमीन दी थी, चल रही थी 13 दुकानें-कोचिंग, सब सीज

उदयपुरएक महीने पहले
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  • संस्थान बोला-दुकानों का निर्माण विधिवत, डीएलबी में करेंगे अपील

आवंटन शर्ताें के उल्लंघन पर हिरणमगरी सेक्टर-4 मैन राेड पर स्थित तुलसी निकेतन की बिल्डिंग के फ्रंट सेटबैक में बनी 13 दुकानाें, प्रथम मंजिल पर चले रहे काेचिंग सेंटर काे नगर निगम ने शुक्रवार काे सीज कर दिया। निगम की टीम ने गुरुवार काे ही सभी दुकानदाराें काे अंतिम नाेटिस दे दिया था।

इसके बाद ज्यादातर दुकानदाराें ने गुरुवार शाम से ही दुकानाें से सामान खाली करना शुरू कर दिया था। दुकानों और बिल्डिंग की जमीन के आवंटन से जुड़ा यह मामला 49 साल पुराना है। ऐसे में इतने साल बाद हुई निगम की कार्रवाई पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। कुछ लाेग इसकाे समाज के दो व्यक्तियों के आपसी झगड़े का परिणाम भी बता रहे हैं।

शुक्रवार सुबह डीटीपी नीलम वर्मा और एटीपी सिराजुद्दीन के नेतृत्व में निगम की टीम कार्रवाई के लिए तुलसी निकेतन के बाहर पहुंची। टीम के पहुंचते ही कुछ दुकानदरों ने विरोध करना शुरू कर दिया। दुकानदारों का कहना था कि निगम काे कारवाई करनी है ताे दुकानें बनाने वालों के खिलाफ करे। इसमें हमारा क्या गुनाह है।

हालांकि विराेध के बावजूद निगम की टीम ने अपना काम जारी रखा। पुलिस की माैजूदगी में ग्राउंड फ्लाेर पर बनी 13 दुकानाें काे सीज कर दिया। इसके बाद पहली मंजिल पर संचालित काेचिंग सेंटर काे भी सीज किया गया। इसी बिल्डिंग में कुछ भाग पर काेर्ट का स्टे चल रहा हैं, उसकाे फिलहाल सीज नहीं किया गया हैं।

इसी बीच कुछ दुकानदार कार्रवाई का विरोध जताने निगम आयुक्त हिम्मतसिंह बारहठ के पास पहुंच गए। लेकिन उन्होंने कहा कि हमारी कार्रवाई नियमानुसार है। हम आपको पहले ही दाे नाेटिस दे चुके हैं। गुरुवार को अंतिम नोटिस भी दिया गया था। ऐसे में काेई यह नहीं कह सकता कि हमें माैका ही नहीं दिया।

दुकानदार बाेले- हमने क्या बिगाड़ा, हमें क्याें नुकसान

तुलसी निकेतन पर हुई कार्रवाई पर दुकानदाराें ने पीड़ा जताई कि संस्थान वालाें की आपसी लड़ाई का खामियाजा हम क्याें भुगते। नगर निगम भी 49 साल बाद कार्रवाई कर रहा है। निगम काे कार्रवाई करनी ही थी ताे दुकान बनाने वालाें के खिलाफ करती। हमारा धंधा काेराेना ने वैसे ही मंदा कर दिया था, अब निगम ने पूरा ही उजाड़ दिया। आखिर हमारा क्या गुनाह था। हमें क्याें नुकसान।

यूआईटी ने 1972 में सामाजिक संस्थान काे आवंटित की थी जमीन, बना दी 13 दुकानें

निगम से जारी नाेटिस में कहा गया है कि यूआईटी ने 15 जनवरी 1972 काे अध्यक्ष श्री मेवाड़ जैन श्वेतांबर तेरापंथी कांफ्रेंस उदयपुर काे हाॅस्टल निर्माण के लिए 5179.719 वर्ग गज जमीन आरक्षित दर 4.25 रुपए प्रति वर्ग गज से आवंटित की थी। जिसकी लीज डीड अध्यक्ष तुलसी निकेतन समिति के नाम 21 अप्रैल 1990 काे जारी की गई।

संस्थान ने आवंटन शर्ताें का उल्लंघन कर सेटबैक में 13 दुकानें बना दी। निगम ने इससे पहले 20 अगस्त 2019 और 6 जनवरी 2021 काे दाे नाेटिस जारी किए थे। लेकिन दो नोटिस के बावजूद संस्थान की ओर से जवाब नहीं पेश किया गया।

दुकानों से होने वाली आय को हम शैक्षिक कार्यों पर खर्च करते हैं

निगम ने शिकायत पर कार्रवाई की है। दुकानाेेंं का निर्माण विधिवत हुआ है। दुकानाें से जो भी आय हाेती है उससे संस्थान की शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियां चलती हैं। हम गरीब बच्चों काे पढ़ाने में भी सहयाेग करते हैं। निगम काे दस्तावेज देंगे और डीएलबी में भी अपील करेेंगे। जरूरत हुई तो अपर काेर्ट में भी प्रार्थना पत्र लगाएंगे।
- अशाेक दाेषी, मंत्री, तुलसी निकेतन समिति।

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