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  • A Food Inspector On 36 Lakh Population, Took 75 Samples In 6 Months, Adulteration In 23, But Case Registered In Only 3 Cases

वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे आज:36 लाख आबादी पर एक फूड इंस्पेक्टर, 6 माह में 75 नमूने लिए, 23 में मिलावट, लेकिन महज 3 मामलाें में ही केस दर्ज

उदयपुर6 दिन पहले
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  • इस साल सेफ फूड फाॅर टुमाॅराे थीम, लेकिन उदयपुर में ताे अाज ही सुरक्षित नहीं

वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे साेमवार काे है। इस साल की थीम सेफ फूड फाॅर ए हैल्दी टुमाॅराे है, लेकिन उदयपुर में अाने वाला कल खाद्य सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित नहीं हैं। खुद सरकार के अांकड़े बता रहे हैं कि यहां खाने-पीने की चीजाें में मिलावट बदस्तूर है अाैर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हाे रहा। दरअसल, सरकार ने यहां विभाग ताे बना रखा हैं, लेकिन 11 हजार 724 किमी में फैली 36 लाख की आबादी वाले इस जिले में महज एक फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर है। जानकार भी मानते हैं कि एक व्यक्ति के लिए इतना बड़ा जिला संभालना संभव नहीं है। विभाग ने बीते 6 माह में 75 नमूने लिए हैं, जिसमें 23 यानी करीब 30 फीसदी में मिलावट मिली है। इसमें भी केस महज 3 मामलाें में प्रकरण दर्ज हुए हैं। यानी कानून हाेने के बावजूद मिलावटखोर पकड़ में नहीं अाते। फूड सेफ्टी ऑॅफिसर अशाेक गुप्ता बताते हैं कि काेविड के चलते विभाग की कार्रवाई पर असर पड़ा है। यहां दूध-मावे में फैट कम औैर पानी ज्यादा मिलता है।

4 महीने में नहीं हाे पाई 4 मामलाें की जांच 75 नमूने लिए 23 में मिस ब्राण्ड, अमानक, अनसेफ 4 नमूनाें की जांच लंबित 3 मामलाें में प्रकरण दर्ज

यह हाे सकती है सजा {सब स्टैंडर्ड : 5 लाख का जुर्माना { मिस ब्रांड : 3 लाख का जुर्माना { अनसेफ : 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास तक, 1 से 10 लाख तक जुर्माना।

ये हैं कार्रवाई के दायरे {मिस ब्रांड : उत्पाद की पैकिंग पर इसके बनने औैर अंतिम उपयाेग की तारीख, बैच औैर निर्माणकर्ता का नाम नहीं हाेना { अमानक या सब स्टैंडर्ड : उत्पाद की गुणवत्ता कम हाेना औैर उत्पाद के मानक काे फाॅलाे नहीं करना { अनसेफ : जब तय हाे जाए कि उत्पाद शरीर के लिए हानिकारक है।

नियम : किसी उत्पाद में मिलावट मिलने पर सैंपल जांच के लिए भेजते हैं। जांच में मिलावट की पुष्टि पर व्यापारी एक महीने में अपील कर सकता है। इस पर वापस जांच की जाती है। एक साल के अंदर किसी मामले पर कार्रवाई की जा सकती हैं।

डायरिया, कैंसर जैसी बीमारियां दे सकते हैं असुरक्षित उत्पाद : एक्सपर्ट

अारएनटी मेडिकल काॅलेज के सीनियर प्राेफेसर-मेडिसिन डाॅ. महेश दवे बताते हैं कि अाम, केले, चीकू अादि काे पकाने के लिए कारबेट का उपयाेग हाेता है। इससे कैंसर का खतरा रहता हैं। बचने के लिए जब तक संभव हाे, फलाें काे कच्चा ताेड़कर घर पर पकाएं। सरसों के तेल में सत्यानासी का तेल मिलाया जाता है। इससे एपेडमिक ड्राप्सी बीमारी का खतरा रहता है। पैराें औैर पूरे शरीर में सूजन अा जाती है। हार्ट फेल्योर भी हाे सकता है। बचाव के लिए ब्रांडेड डिब्बा बंद तेल ही खरीदें। इसी तरह मसाले चमकाने के लिए सल्फर का उपयाेग हाेता है। इससे कैंसर, चर्म राेग, उल्टी-दस्त अादि की समस्या हाे सकती है। एेसे मामला हाल ही चित्ताैड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा में सामने अा चुका है, जहां व्यापारी सल्फर से पुराना धनिया चमका रहे थे।

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