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  • After Me, My Wife And Son Were Also Caught By Corona, They Stayed In The House For 15 Days, But Neither Took Off The Mask, Nor Did They Break The Distance, They Got Healthy With Medicine.

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:मेरे बाद पत्नी और बेटा-बेटी को भी कोरोना ने जकड़ा, चारों 15 दिन घर में ही रहे, लेकिन न किसी ने मास्क उतारा, न दूरी तोड़ी, दवा के साथ याेग-सकारात्मक साेच से स्वस्थ हुए

उदयपुर6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • चार दिन ताे ऐसे गुजरे कि हालात बयां कर पाना भी मुश्किल है, हाैसला बनाए रखना भी दवा से कम नहीं

बीमारी काेई भी हाे, शरीर काे ताे नुकसान करती ही है, मानसिक और भावनात्मक रूप से भी ताेड़ देती है। लेकिन दवा के साथ परहेज या यूं कहें कि प्राेटाेकाॅल सख्ती से फाॅलाे करें ताे बड़े से बड़े राेग काे भी बेशक हरा सकते हैं। मुझे वैक्सीन के दाे डाेज लग चुके, फिर भी मेरे समेत चार सदस्याें का परिवार काेराेना संक्रमित हाे गया। चार दिन ऐसे गुजरे, जिसे शब्दाें में बयां कर पाना मुश्किल है, लेकिन हमने दवा के साथ डाइट और रुटीन काे मैनेज किया, मानसिक सकारात्मकता बनाए रखी। शुक्र है कि अब हम सब स्वस्थ हैं।

शहर में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा चल रही थी। इसी बीच 6 अप्रैल काे मुझे बुखार आया। काेविड टेस्ट कराया। अगले दिन रिपोर्ट पाॅजिटिव आई ताे सबसे पहले मैंने खुद काे घर के अंदर अलग कमरे में आइसोलेट कर लिया, लेकिन मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई थी। दूसरे ही दिन पत्नी, 16 साल के बेटे और 12 साल की बेटी की भी तबीयत खराब हाे गई।

काेराेना ने इन्हें भी चपेट में ले लिया था। बच्चों की चिंता से घर में काफी मानसिक तनाव हाे गया था, जिसे दूर करने के लिए हमने अपना शिड्यूल मैनेज किया। डाॅक्टर की बताई दवाइयां ताे नियमित लेते ही रहे, 15 दिन तक ना ताे किसी ने मास्क हटाया और न डिस्टेंसिंग ताेड़ी। पत्नी सुबह रसाेई का काम संभालती थी ताे मैंने साफ-सफाई का जिम्मा उठाया। चार दिन का वह वक्त बहुत बुरा गुजरा।

कमजाेरी के कारण हम सबके शरीर जकड़ गए थे। उठ पाने जितनी ताकत भी नहीं बची थी। सिर्फ दलिया और दूध के साथ काढ़ा और फल खाते रहे। हमने दिनभर का रूटीन तय किया। सुबह 6 बजे उठकर पहले मैं याेगा करता था, फिर पत्नी और फिर बच्चे। इसके लिए सबने आधे-आधे घंटे का समय बांट लिया था। ऐसे समय पर विभाग के अधिकारियों ने भी काफी सपोर्ट किया।
वैक्सीनेशन के बावजूद भी संक्रमित, लेकिन पत्नी-बच्चाें के मुकाबले मेरी हालत ज्यादा ठीक रही

मुझे काेराेना वैक्सीन के दाेनाें डाेज लग चुके हैं। संक्रमित हाेने के बाद तबीयत ताे खराब हुई, लेकिन परिवार दूसरे सदस्यों के मुकाबले सबसे सही हालत मेरी थी। अप्रैल की शुरुआत में काेराेना के बढ़ते आकड़ाें ने परिवार काे चिंतित किया, लेकिन उन्हीं दिनाें में दैनिक भास्कर ने यह भी प्रकाशित किया था कि केस कम भी हाे रहे हैं और लाेग काेराेना काे हराकर वापस अपने घर जा रहे हैं।

ऐसी खबराें से हिम्मत बढ़ी। मेरी, पत्नी और बच्चाें की काेराेना जांच रिपाेर्ट 20 अप्रैल तक निगटिव आई। हम सभी स्वस्थ हैं, लेकिन बीमारी के हालात ने सबसे बड़ा सबक यह भी दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हाें, मानसिक स्थिति मजबूत रखनी जरूरी है। हाैसला बनाए रखेंगे ताे मुश्किल से पार पा ही जाएंगे।

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