पटाखों ने घाेंटा हवा का दम:दाे दिन में 246 पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स

उदयपुरएक महीने पहले
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खेंखरे से ज्यादा भाई दूज पर हुई आतिशबाजी - Dainik Bhaskar
खेंखरे से ज्यादा भाई दूज पर हुई आतिशबाजी

दीपावली पर भले ही ग्रीन पटाखों से सीमित आतिशबाजी हुई, फिर भी इससे शहर की हवा पर बुरा असर पड़ा है। यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 245 पर पहुंच गया, जो आम दिनों में 100 के आसपास रहता है। शुक्रवार रात की आतिशबाजी से पर्यावरण में प्रदूषण पार्टिकुलेट मैटर 2.5 और पार्टिकुलेट मैटर 10 का स्तर काफी बढ़ गया।

रात तकरीबन 9 बजे पीएम 2.5 का स्तर 389 और पीएम 10 का स्तर 348 पर पहुंच गया। यह स्तर पर्यावरण के काफी खराब स्तर की श्रेणी में आता है। ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स शनिवार सुबह 11 बजे 246 रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश में जयपुर और कोटा रेड जोन लिस्ट में शामिल हो गए, जहां एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज हुआ।

अलवर में 213, भिवाड़ी 400, अजमेर 179 और पाली में प्रदूषण का स्तर 209 रहा। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी शहर का प्रदूषण लेवल 100 से नीचे रहना चाहिए। जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत है या जिनके फेंफड़े कमजोर हैं, उन्हें 100 से ज्यादा एक्यूआई होने पर सांस की तकलीफ की आशंका बढ़ जाती है। कोरोना से बीमार हुए वे मरीज, जिनके लंग्स ज्यादा डेमेज हो गए थे, उनके लिए प्रदूषण का स्तर बढ़ना ज्यादा घातक है

खेंखरे से ज्यादा भाई दूज पर हुई आतिशबाजी

उदयपुर में दीपावली के दिन से ज्यादा आतिशबाजी खेंखरे यानी गोवर्धन पूजा के दिन हुई। नतीजतन शनिवार को एक्यूआई 245 रहा, जो कि शुक्रवार को 238 और गुरुवार सुबह 11 बजे महज 109 था। केंद्रीय पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार एयर क्वालिटी इंडैक्स 200-300 के बीच हो तो खराब, 300-400 के बीच बेहद खराब और 400-500 के बीच खतरनाक माना जाता है। 100 से ऊपर जाते ही यह फेंफड़ों के लिए हानिकारक हो जाता है। खास तौर पर अस्थमा या फेंफड़ों की अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह बेहद नुकसानदायक साबित हाेता है।

पिछले साल इतना नहीं था एक्यूआई​​​​​​​

उदयपुर में पिछले साल एक्यूआई नहीं बढ़ा था। पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते पटाखों पर बैन था। हालांकि इस बार पर पाबंदी थी, लेकिन पिछले साल लाेगाें में काेविड के चलते काफी डरे हुए थे। इस कारण ज्यादा आतिशबाजी ज्यादा नहीं हुई थी। यही वजह रही कि पिछली बार दीपावली के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स 167, गोवर्धन पूजा के दिन 139 और भाईदूज के दिन 167 रिकॉर्ड किया गया था।

आगे : कल तक सुधर सकती है हवा की सेहत

विशेषज्ञों की मानें तो मौसम में हवा चलने के शहरों का प्रदूषण स्तर और कम हो सकता है। वजह यह है कि हवा चलने से प्रदूषण एक जगह न जमकर आसमान में फैल जाता है और ऊपर चला जाता है। इसके अलावा मौसम जितना साफ होगा आसमान में प्रदूषण का स्तर उतना कम होगा। जानकारों ने इस बात को भी सुखद संकेत बताया है कि इस बार आतिशबाजी बीते वर्षों के मुकाबले कम हुई।

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