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आतंकियों को सजा मिलने पर तत्कालीन इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर:अनंत कुमार ने जाहिर की खुशी, कहा - इन जैसों के साथ ऐसा ही होना था

उदयपुर2 महीने पहले
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ATS की टीम में अनंत कुमार तत्कालीन एडिशनल एसपी के पद पर कार्यरत रहते हुए इस पूरे केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर थे। - Dainik Bhaskar
ATS की टीम में अनंत कुमार तत्कालीन एडिशनल एसपी के पद पर कार्यरत रहते हुए इस पूरे केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर थे।

साल 2013 में राजस्थान पुलिस को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से राजस्थान में स्लीपर सेल के एक्टिव होने का इनपुट मिला था। जिसके बाद राजस्थान की ATS की टीम इस पूरी मामले की छानबीन में जुट गई। इस दौरान ATS की टीम ने 13 युवकों को हिरासत में लिया और उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी।

मंगलवार को जयपुर जिला न्यायालय ने उनमें से 12 युवकों को आतंकी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वही एक युवक को बरी कर दिया है। जिसके बाद इस केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर और तत्कालीन ATS के एडिशनल एसपी अनंत कुमार ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है।

अनंत कुमार ने बताया कि उस वक्त ATS की पूरी टीम ने इस केस में काफी मेहनत की थी। हमारी टीम ने इस मामले में जयपुर, जोधपुर, पाली, आगरा, भरतपुर और बिहार तक छानबीन की थी। जिसके आधार पर लगभग 175 गवाह और 5500 से अधिक पन्नों के 500 डॉक्युमेंट्री एविडेंस पेश किए थे। मुझे खुशी है इस बात की न्यायालय में हमारे द्वारा पेश किए गए सबूतों को सही माना। आज उन्हीं सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाया है।

अनंत कुमार ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में पकड़े गए 13 छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। जो पढ़ने में काफी होशियार थे। अनंत कुमार ने बताया कि इन सभी लोगों का ब्रेनवाश कर इन्हें आतंक की राह पर लाया गया था। लेकिन आज न्यायालय के फैसले के बाद यह जगजाहिर हो गया कि भारत के खिलाफ इस तरह की नापाक हरकत करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वही जो लोग इस राह पर आने वाले हैं उन्हें भी संदेश जाएगा। अनंत कुमार ने कहा कि सिर्फ पुलिस ही नहीं बल्कि राजधानी जयपुर के बाशिंदों ने भी इस केस में हमारी पूरी मदद की थी। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

गौरव टॉवर सहित शॉपिंग मॉल्स, राष्ट्रीय स्मारक निशाने पर थे

ATS के तत्कालीन एडिशनल एसपी ने बताया कि इन्होंने आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए जयपुर में राष्ट्रीय इमारतों व शॉपिंग मॉल सहित कई नामी जगहों की रैकी की थी। इनमें जेएलएन मार्ग मालवीय नगर स्थित एक शॉपिंग मॉल भी शामिल था। लेकिन पहले ही ये स्लीपर सेल पकड़ा गया। यहीं पर इंडियन मुजाहिदीन की स्लीपर सेल को एक्टिव कर नए लड़कों को तैयार किया गया था। इनमें ज्यादातर इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स थे, ताकि वे तकनीक की जानकारी रखने से आसानी से बम बनाकर तैयार कर सकें।

अनंत कुमार ने बताया कि अनुसंधान में पूछताछ के दौरान ऐसे मैसेज सामने आए। जिनको डपलप करने पर पता चला कि गुजरात में 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगे और राजस्थान के भरतपुर जिले में करीब 8 साल पहले गोपालगढ़ के दंगों को बदला लेने के लिए बम ब्लास्ट करने की साजिश कर रहे थे। इसके लिए जयपुर, जोधपुर और सीकर को चुना गया था।

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