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आरएएस परीक्षा-2018:बड़ी की वर्षा 73वें पायदान पर, टीएसपी में राजवर्धन 13वीं और रवींद्र 22वीं रैंक पर, देहात में भी चमकी हमारी प्रतिभा

उदयपुर13 दिन पहले
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  • दैनिक भास्कर में पढ़िए इनकी सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी

आरएएस परीक्षा-2018 के मंगलवार रात जारी परिणाम में शहर से सटे बड़ी गांव की वर्षा ने 73वीं रैंक, टीएसपी में राजवर्धन सिंह चौहान ने 13वीं रैंक और राव मादड़ा (गोगुंदा) के रवींद्र सिंह राव ने 22वीं रैंक हासिल की है। शिक्षक रवींद्र सिंह स्कूल ड्यूटी के लिए रोज बाइक से 60 किमी अप-डाउन करते। फिर सेवा मंदिर लाइब्रेरी में तैयारी करते। वर्षा ने आरएएस बनने के लिए दिन-रात एक किया, जबकि राजवर्धन सिंह ने बतौर पटवारी नौकरी के बावजूद पढ़ाई और तैयारी नहीं छोड़ी।

पटवारी बनने के बाद भी रोज 6 घंटे पढ़े, आखिर मिली कामयाबी

आरएएस परीक्षा-2018 में टीएसपी से 13वीं रैंक पाने वाले राजवर्धन सिंह चौहान इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक डिग्री होल्डर हैं। 28 वर्षीय राजवर्धन आरएएस बनने के लिए साल 2016 से रोज 6 घंटे की पढ़ाई करते आ रहे हैं। वे गत 11 अक्टूबर 2017 को पटवारी बने। इसके बाद से कैलाशपुरी में बतौर पटवारी सेवाएं देते आ रहे हैं। लेकिन जहन में हमेशा आरएएस बनाने का सपना बसा रहा। राजवर्धन सिंह के 60 वर्षीय पिता वीरभद्र सिंह चौहान रेवेन्यू विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। बड़े भाई यशवर्धन सिंह चौहान भी आरएएस की तैयारी कर रहे हैं, जिन्हें सफलता का अभी इंतजार है।

बीटेक किया, तैयारी में दिन-रात एक किए, बेटियों को देंगी संबल

2016 से आरएएस बनने का सपना देख रहीं बड़ी गांव की 27 वर्षीय वर्षा गहलोत ने तैयारी में दिन-रात एक किए। बीटेक की पढ़ाई कर चुकी वर्षा ने इस परीक्षा परिणाम में 73वीं रैंक हासिल की है। वर्षा बताती हैं कि उन्हें अपनी इस सफलता पर पूरा यकीन था, क्योंकि उनका अटेंप्ट संतोष जनक रहा था। वर्षा आरएएस अफसर बनने के बाद जरूरतमंद बेटियों को पढ़ाई में संबल देंगी। वे कहती हैं- बेटियां किसी से कमतर नहीं, बस उन्हें मौका मिले तो अपना आसमान वे खुद तलाश सकती हैं। वर्षा के पिता भगवान सिंह गहलोत टीबी अस्पताल में नर्सिंग अधीक्षक हैं।

2016 में टीचर बने रवींद्र, बोले- मेरा मुकाम सिर्फ ये नहीं था

राव मादड़ा, गोगुंदा के 28 वर्षीय रवींद्र सिंह राव राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लखावली में बतौर शिक्षक साल 2016 से सेवाएं दे रहे हैं। वे इस परिणाम में टीएसपी से 22वीं रैंक पर आए। कैमिस्ट्री में एमएससी-पीएचडी रवींद्र बताते हैं कि आरएएस बनना उनका सपना था, जिसे साकार करने के लिए वे साल 2016 से कड़ी मेहनत कर रहे थे। करदा स्कूल में जॉब के दौरान प्रतिदिन शहर से 60 किमी दूर अपडाउन करते। फिर सेवा मंदिर की लाइब्रेरी में पढ़ते, क्योंकि टीचर बनना ही लक्ष्य नहीं था। सेल्फ स्टडी को अपनी मजबूती बनाया। रविन्द्र के 56 वर्षीय पिता हिम्मत सिंह राव राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेमड़, सायरा में प्रिंसिपल हैं।

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