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उदयपुर में अब ऑटोमैटेड ड्राइविंग ट्रैक:कैमरे-सैंसर तय करेंगे लाइसेंस बनेगा या नहीं, फोर-व्हीलर के लिए 200 में से 160, टू-व्हीलर के लिए 50 में से 40 नम्बर लाने होंगे

उदयपुर7 महीने पहले
ऑटोमैटेड ट्रैक पर रोजाना ऑनलाइन प्रोसेस से लाइसेंस बनेंगे। - Dainik Bhaskar
ऑटोमैटेड ट्रैक पर रोजाना ऑनलाइन प्रोसेस से लाइसेंस बनेंगे।

उदयपुर में अब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रायल कैमरे की नजरों में होगा। उदयपुर में अब लाइसेंस के लिए ट्रायल स्मार्ट कैमरे और सेंसर के बीच होगा। ये कैमरे और सेंसर ही तय करेंगे कि आवेदक को लाइसेंस मिलना चाहिए या नहीं। सोमवार को उदयपुर में ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक की शुरुआत हो गई। यह ट्रैक चित्रकूट नगर में शुरू हुआ है। यहां पर लाइसेंस के एप्लीकेंट को लाइसेंस बनवाने के लिए जटिल प्रकिया से गुजरना होगा। दुपहिया हो या चौपहिया या फिर भारी वाहनों के लाइसेंस सभी के लिए पहले परीक्षा को पास करना होगा। टू-व्हीलर और 4 व्हीलर के लाइसेंस हर रोज बनेंगे और पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होगा।

अब इंस्पेक्टर नहीं करेंगे ट्रायल टेस्ट

उदयपुर की डीटीओ डॉ. कल्पना शर्मा ने बताया कि अब तक सामान्य ट्रैक पर टेस्ट परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर लेते थे। मगर अब ऑटोमेटेड ट्रैक पर इंस्पेक्टर के बजाय ट्रायल टेस्ट सीसीटीवी कैमरे और सैंसर लेंगे। टेस्ट में आवेदक पास होगा या फेल इसका फैसला ट्रैक के आसपास लगे सैंसर और सीसीटीवी कैमरे ही करेंगे। इनकी रिकॉर्डिंग वहां बने कंट्रोम रूम पर पहुंचेगी। इस रिकॉर्डिंग से पता चनेगा कि आवेदन ने ट्रैक पर गाड़ी सही तरीके से चलाई या नहीं।

ऑटोमैटेड ट्रैक को टेस्ट करती डीटीओ कल्पना शर्मा।
ऑटोमैटेड ट्रैक को टेस्ट करती डीटीओ कल्पना शर्मा।

फोर-व्हीलर के लिए चार स्टेप में होगा टेस्ट

कल्पना शर्मा ने बताया कि टू-व्हीलर के टेस्ट में आवेदक को सर्कल में तीर के साइन के अनुसार ड्राइविंग करना होगा और 50 में से 40 नम्बर लाने होंगे। तब ही आवेदक पास होगा। वहीं फोर-व्हीलर में आवेदक को चार स्टेप में टेस्ट देना होगा। जिसमें पहना पार्किंग, दूसरा 8 के आकार में गाड़ी को चलाना, तीसरा एच के मार्क और अंत में ग्रेडियेंट पुलिया पार करना होगा। इसमें उसे 200 में से 160 अंक हासिल करने होंगे, तभी वह पास माना जाएगा। पास होने पर येलो और फेल होने पर रेड सिग्नल दिया जाएगा।

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