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गुरु हों तो ऐसे:उदयपुर के एक गांव में सरकारी टीचर्स की अनूठी मुहिम, कोरोना से बच्चों और उनके परिवारों को बचाने के लिए अपनी सैलरी से बनाया फंड

उदयपुर4 दिन पहलेलेखक: स्मित पालीवाल

देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होंगे। ऐसे में बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उदयपुर के शिक्षकों ने अनूठी मुहिम ‘मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी’ शुरू की है। इसके तहत उन्होंने अपनी सैलरी से राशि इकट्‌ठी की है। इससे वे न सिर्फ घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगे, बल्कि उनके परिजनों की आर्थिक मदद भी करेंगे।

टीचर्स की ओर से शुरू की गई मुहिम ‘मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी’ के तहत वे गांवों में घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं।
टीचर्स की ओर से शुरू की गई मुहिम ‘मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी’ के तहत वे गांवों में घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं।

बच्चों के लिए शिक्षकों ने दिया आर्थिक सहयोग
उदयपुर से 20 किलोमीटर दूर बने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय काया के प्रिंसिपल मोहन लाल ने बताया कि कोरोना का खतरा फिलहाल टला नहीं है। ऐसे में बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। अब काया गांव में रहने वाले छोटे बच्चों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्कूल के शिक्षकों ने ‘मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी’ अभियान की शुरुआत की है।

इसके तहत शिक्षकों ने अपनी सैलरी से जो पैसा जुटाया है उससे गांववालों और हेल्थ वर्कर्स की मदद से विशेष किट तैयार की हैं। यह किट डोर-टू-डोर सर्वे कर हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि काया पंचायत समिति को कोरोना संक्रमण के खतरे से मुक्त किया जा सके।

इस मुहिम के तहत डॉक्टर्स के दिशा-निर्देश के अनुसार घर-घर जाकर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है।
इस मुहिम के तहत डॉक्टर्स के दिशा-निर्देश के अनुसार घर-घर जाकर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है।

सब जिम्मेदारी उठाएंगे शिक्षक
PTI घनश्याम ने बताया कि गांव में सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। सर्वे में कोई संदिग्ध मिलता है तो उसे विशेष वाहन से अस्पताल पहुंचाया जाएगा। उनके इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी भी शिक्षकों की टीम ही उठाएगी। बीमार व्यक्ति की गैर-मौजूदगी में उनके परिवार वालों के भोजन से लेकर राशन तक की व्यवस्था भी शिक्षक अपने खर्च पर करेंगे।

मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी अभियान की टीम।
मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी अभियान की टीम।

घर पर ही उपलब्ध करवाया जा रहा प्राथमिक उपचार
काया गांव के शिक्षकों की इस अनूठी मुहिम में शामिल ANM (हेल्थ वर्कर) सूर्या ने बताया कि घर-घर सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिसके तहत छोटे बच्चों से लेकर उनके परिजनों की जांच की जा रही है। जिनमें सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार होने पर उन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है।

सूर्या ने बताया कि गंभीर रोगियों को डॉक्टर्स की सलाह पर इलाज दिया जाता है। तबीयत में सुधार नहीं होता, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता है। हमारी टीम ग्रामीणों में वैक्सीनेशन को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश भी कर रही है।

वार्ड स्तर पर किया गया निगरानी दल का गठन
काया पंचायत समिति के शिक्षकों ने वार्ड स्तर पर निगरानी दल का गठन किया है। जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ANM, गांव के ही 2 छात्र और 2 शिक्षक शामिल हैं। जो घर-घर जाकर न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे हैं, बल्कि उन्हें शिक्षा से जोड़े रखने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। जिससे कोरोना संक्रमण के इस दौर में भी बच्चों का शिक्षा से मोहभंग न हो।

शिक्षकों ने निगरानी दल की सुरक्षा के लिए भी विशेष तैयारी की है। जिसके तहत उन्हें बैग, ग्लब्स, टेंपरेचर गन, ऑक्सीमीटर, फेस शील्ड, N-95 मास्क, साबुन, सैनिटाइजर, कैप का विशेष किट मुहैया करवाया गया है।

अभियान के तहत शिक्षक घर-घर मेडिकल इक्विपमेंट्स बांट रहे हैं।
अभियान के तहत शिक्षक घर-घर मेडिकल इक्विपमेंट्स बांट रहे हैं।

राजस्थान ही नहीं देश के लिए नजीर बनेगा काया
क्षेत्रीय विधायक फूल सिंह मीणा ने कहा कि काया गांव के शिक्षकों की यह मुहिम देश के लिए एक नजीर बनेगी, क्योंकि अभी तक तीसरी लहर से लड़ने के लिए सिर्फ कागजों में ही तैयारी की जा रही है। जबकि, काया पंचायत समिति के शिक्षकों ने अपनी योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। जो अपने आप में अनूठा और शानदार प्रयोग है।

उदयपुर का काया गांव शहरी सीमा से दूर अरावली की पर्वत श्रृंखला के बीच बसा हुआ है। जहां मूल रूप से आदिवासी रहते हैं। जो आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हुए हैं।

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