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उदयपुर कांग्रेस में गुटबाजी:तीन धड़ों में बंटे कांग्रेस के पार्षद, गिरिजा-रघुवीर गुट के बाद अब मनोनित पार्षदों का अलग ट्रैक, नेता प्रतिपक्ष नहीं होने से विपक्ष के तौर पर एकजुट नहीं हो पा रही कांग्रेस

उदयपुर9 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

उदयपुर कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। आमतौर पर आपसी गुटबाजी और मनमुटाव का शिकार रहने वाली कांग्रेस में यह नया नहीं है। मगर इसके चलते अब शहर की सरकार नगर निगम में विपक्ष कमजोर पड़ रहा है। दरअसल बड़े नेताओं के गुट में रहने और एक-दूसरे से खुद को बेहतर साबित करने के लिए अब शहर में कांग्रेस के थोड़े से पार्षदों के भी गुट बन गए हैं। अबतक जहां उदयपुर कांग्रेस में पार्षदों के दो गुट थे, वहीं अब इसमें तीसरे गुट का पदार्पण भी हो गया है।

उदयपुर में कांग्रेसी पार्षदों के बीच लड़ाई वर्चस्व और नेता प्रतिपक्ष की है। हर कोई अपने गुट से नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की तैयारी में लगा है। उसी के चलते शहर में ये खींचतान देखने को मिल रही है। इसी का असर है कि नगर निगम कि बैठकों में विपक्ष मजबूत दिखाई नहीं पड़ता है। कांग्रेस के बैनर पर होने वाले आंदोलनों में भी पूरे पार्षद नहीं पहुंचते। वहीं किसी भी मुद्दे पर कांग्रेसी पार्षद एकजुट होकर भाजपा के बोर्ड का विरोध नहीं कर पाते।

सहवृत पार्षद चल रहे अपनी चाल

कुछ महीनों पहले उदयपुर में सरकार ने 12 सहवृत पार्षदों को नियुक्त किया था। इनमें कुछ पूर्व पार्षद सहित कई सक्रिय नेता भी थे। पिछले कुछ समय में सहवृत पार्षदों का यह समूह शहर में सक्रिय हो गया है। ये सभी मिलकर शहर के अलग-अलग पार्षदों के वार्ड में जाकर उनके किए जाने वाले काम और उनकी सक्रियता की जांच कर रहे हैं। इन्हीं में से से एक-दो खुद को नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष का दावेदार भी बता चुके हैं।

गिरिजा व्यास और रघुवीर मीणा गुट में पहले से खींचतान

इससे पहले ही उदयपुर के निर्वाचित 20 पार्षदों में ही चुनाव के वक्त से खींचतान चल रही है। इनमें एक गुट सीडबल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा से जुड़ा है। वहीं दूसरा गुट पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास से जुड़ा है। इसी के चलते चुनाव के तुरंत बाद से गिरिजा गुट से हितांशी शर्मा और रघुवीर गुट से लोकेश गौड़ पर नेता प्रतिपक्ष की दावेदारी जताई जा रही है। इसी के चलते दोनों गुट एक-दूसरे को पटखनी देने में लगे रहते हैं।

कांग्रेस के पिछले दिनों हुए प्रदर्शन में गिने-चुने पार्षद शामिल हुए।
कांग्रेस के पिछले दिनों हुए प्रदर्शन में गिने-चुने पार्षद शामिल हुए।

मुद्दों पर नहीं दिखती पार्षदों के बीच एकजुटता

आपसी गुटबाजी के चलते नगर निगम से जुड़े मसलों पर पार्षदों की एकजुटता नहीं दिखती। अभी कुछ दिनों पहले ही खराब सड़कों के विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के आधे पार्षद भी नहीं पहुंचे। इससे पहले पिछले साल भी शहर की गायों की खराब स्थिति को लेकर भी दो गुट एक दूसरे से बंटे हुए नजर आए थे। मसले को लेकर जहां हितांशी शर्मा और उनके खेमे के पार्षदों ने डम्पिंग यार्ड में गंदगी से गायों को होने वाले नुकसान को उजागर किया था। वहीं उसके कुछ दिन बाद ही लोकेश गौड़ और अरूण टांक सहित कई पार्षदों ने नगर निगम के काइन हाउस में गायों की स्थिति को बेहतर बताया था।

22 महीने से नहीं मिला है नेता प्रतिपक्ष

शहर में निकाय चुनाव हुए दो साल होने को आए हैं। मगर इसके बावजूद सरकार ने अबतक नेता प्रतिपक्ष तय नहीं किया है। इसके चलते पार्षद एकजुट नहीं हो पा रहे हैं। हाल ही में नगर निगम में हुई प्रशासनिक समिति की बैठक में भी यही समस्या नजर आई। सरकार के नगर निगम का नेता प्रतिपक्ष तय नहीं करने के चलते निगम ने नेता प्रतिपक्ष के तीन दावेदार हितांशी शर्मा, लोकेश गौड़ और अरूण टांक को समिति की बैठक में बुलाया। इसमें भी हितांशी शर्मा नहीं पहुंची। बता दें कि खुद भाजपा के मेयर जीएस टांक नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के लिए कांग्रेस सरकार को पत्र लिख चुके हैं।

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