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चुनाव की तारीखें तय, अब गरमाएगी सियासत:वल्लभनगर और धरियावद में दावेदारों ने तैयारियां तेज की, दोनों सीटों पर कांग्रेस-बीजेपी के लिए टिकट तय करना आसान नहीं; जानिए कौन हैं दावेदार

उदयपुर4 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

राजस्थान में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। निर्वाचन आयोग ने राजस्थान में 30 अक्टूबर को चुनाव और फिर 2 नवम्बर को मतदान की तारीख तय की है। तारीख की घोषणा होते ही एक बार फिर उदयपुर का सियासी पारा चढे़गा। क्योंकि वल्लभनगर और धरियावद दोनों ही सीटों पर राजनीतिक पार्टियों के लिए टिकट तय करना आसान काम नहीं होगा। वल्लभनगर में तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ही यह चुनौती भरा है। हालांकि चुनाव की घोषणा के बाद दावेदारों ने अपनी तैयारियों तेज कर दी हैं। चुनाव की घोषणा के बाद अब अगले महीने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सचिन पायलट सहित तमाम बड़े नेताओं के दौरे वल्लभनगर और धरियावद में होंगे।

चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही वल्लभनगर में जनता सेना के उम्मीदवार रणधीर सिंह भींडर ने वीडियो जारी कर कार्यकर्ताओं को जोर-शोर से जुट जाने का मैसेज दिया। भींडर ने विरोधियों को परस्त करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरे राजस्थान की नजरें इस चुनाव पर है। हम सबको बताएंगे कि जनता सेना क्या है।

इधर कांग्रेस से दावेदारी कर रही प्रीति शक्तावत ने वीडियो जारी कर व्यक्तिगत राग-द्वेष भूलकर कांग्रेस को जिताने की अपील की। प्रीति ने अपने कार्यकर्तााओं से सोशल मीडिया पर कुछ भी विवादित न लिखने की अपील की।

ये हैं दोनों सीटों पर टिकट के दावेदार

वल्लभनगर

वल्लभनगर सीट पर कांग्रेस, बीजेपी और जनता सेना में त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस से यहां पांच सदस्यों की दावेदारी है। हालांकि इनमें पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत सबसे मजबूत दावेदार हैं। वहीं, गजेंद्र शक्तावत के बड़े भाई देवेंद्र शक्तावत और उनके भांजे राज सिंह झाला भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। देवेंद्र शक्तावत पूर्व नगर पालिका चेयरमैन रहे हैं, वहीं राज सिंह झाला सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। इनके अलावा पीसीसी के सदस्य रह चुके भीम सिंह चुंडावत और वरिष्ठ नेता औंकारलाल मेनारिया भी कांग्रेस से दावेदार हैं।

बीजेपी में भी टिकट के लिए कई लोग दावेदारी जता रहे हैं। हालांकि यहां टिकट के सबसे मजबूत दावेदार उदय लाल डांगी हैं। कांग्रेस और जनता सेना के दबदबे वाले क्षेत्र में 2018 विधानसभा चुनाव में 46 हजार से ज्यादा वोट लाकर डांगी ने चौंका दिया था। वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की पहली पसंद भी उदयलाल डांगी ही है। मगर दावेदारी कर रहे अन्य नेता भी एकजुट दिखाई दे रहे हैं। इनमें ललित मेनारिया, आकाश वागरेचा, धनराज अहीर भी यहां बीजेपी से टिकट की दावेदारी पेश कर रहे हैं।

भींडर की बीजेपी से लड़ने की भी चर्चा

इधर जनता सेना से दावेदार रणधीर सिंह भींडर हैं। बता दें कि भींडर दो बार विधायक रह चुके हैं। 2003 में बीजेपी और 2013 में जनता सेना से विधायक रहे हैं। रणधीर सिंह भींडर और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया धुर-विरोधी हैं। दोनों में लगातार जुबानी जंग चलती रहती है। इनके बीजेपी से लड़ने की भी चर्चा है। पूर्व मुख्यमंत्री वयसुंधरा राजे से मिलने के बाद यह चर्चा तेज हुई थी। हालांकि भींडर इसे नकार चुके हैं।

धरियावद

धरियावद में भी गौतमलाल मीणा के निधन से सिम्पैथी फैक्टर हावी है। यहां बीजेपी से गौतमलाल मीणा के पुत्र कन्हैया लाल मीणा टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वहीं पंचायत समिति सदस्य रह चुके कुलदीप सिंह मीणा और खेत सिंह मीणा भी यहां से दावेदारी कर रहे हैं।

बात अगर कांग्रेस की हो तो यहां पूर्व विधायक नगराज मीणा एक बार फिर दावेदार हैं। नगराज मीणा दो बार यहां से चुनाव जीते हैं, मगर तीन बार हारे भी हैं। पिछले दो बार से लगातार नगराज चुनाव हार रहे हैं। उनके अलावा धरियावद से 2 बार के सरपंच केबी मीणा और लसाड़िया से चार बार के सरपंच रूपलाल मीणा भी दावेदार हैं।

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