37 साल पुराना संपत्ति विवाद / मेवाड़ राजपरिवार की प्रमुख संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कोर्ट की राेक

मेवाड़ के पूर्व राज परिवार का यह फोटो 1952 का है। महाराणा भूपालसिंह के साथ पुत्र भगवतसिंह दोनों बेटे महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी।फोटो चिरंजीलाल श्रीमाल ने लिया था। मेवाड़ के पूर्व राज परिवार का यह फोटो 1952 का है। महाराणा भूपालसिंह के साथ पुत्र भगवतसिंह दोनों बेटे महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी।फोटो चिरंजीलाल श्रीमाल ने लिया था।
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मेवाड़ के पूर्व राज परिवार का यह फोटो 1952 का है। महाराणा भूपालसिंह के साथ पुत्र भगवतसिंह दोनों बेटे महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी।फोटो चिरंजीलाल श्रीमाल ने लिया था।मेवाड़ के पूर्व राज परिवार का यह फोटो 1952 का है। महाराणा भूपालसिंह के साथ पुत्र भगवतसिंह दोनों बेटे महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी।फोटो चिरंजीलाल श्रीमाल ने लिया था।

  • अपर जिला एवं सेशन जज महेंद्र कुमार दवे ने सुनाया फैसला
  • फैसले के कानूनी क्रियान्वयन को लेकर अभी भी कई पेंच, प्रतिवादी अग्रिम कोर्ट में दे सकते हैं चुनौती

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:09 AM IST

उदयपुर. मेवाड़ पूर्व राज परिवार के महेंद्र सिंह मेवाड़ ने 22 अप्रैल, 1983 को अपने पिता और अंतिम महाराणा भगवत सिंह के जीवित रहते जिला कोर्ट में परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर जो वाद दायर किया था, उसका 37 साल बाद फैसला तो आ गया है, लेकिन इस फैसले के क्रियान्वयन को लेकर कई कानूनी पेंच हैं।

आदेश को लेकर अरविंद सिंह मेवाड़ ने कहा है कि फैसला देखने के बाद जो भी कोई न्यायिक प्रक्रिया हमें उपलब्ध होगी, उससे हम आगे चलेंगे। इससे यह संभव है कि कोर्ट के इस फैसले को अग्रिम अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की ओर से दिए गए मौजूदा फैसले में मेवाड़ राजपरिवार के शंभु निवास, बड़ी पाल, घास घर सहित प्रमुख संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों पर राेक लगाई गई है। कोर्ट के आदेश के अनुसार स्वर्गीय भगवतसिंह मेवाड़ को भी 25 प्रतिशत संपत्ति का हिस्सेदार बताया गया है। हालांकि इस हिस्से में वे संपत्तियां शामिल होंगी, जो व्यक्तियों को विक्रय या अंतरित की गई हैं।

तीन पक्षकार महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और इनकी बहन योगेश्वरी देवी को 25-25 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है। बंटवारा होने तक शंभु निवास, बड़ी पाल आदि सहित सभी 75 प्रतिशत परिसंपत्तियों में बारी-बारी से चार-चार साल के लिए तीनों पक्षकारों का अधिकार रहेगा। एक अप्रैल, 2021 से सबसे पहले महेंद्र सिंह मेवाड़ के हिस्से चार साल के लिए ये परिसंपत्तियां आएंगी।

इसके बाद अगले चार साल के लिए योगेश्वरी देवी और इसके बाद अरविंद सिंह मेवाड़ के हिस्से यह सब आएगा। कोर्ट की यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक कि संपत्तियों का कानूनन बंटवारा नहीं हो जाता। फिलहाल मेवाड़ राज घराने की शंभु निवास आदि परिसंपत्तियां अरविंद सिंह मेवाड़ के अधिकार में हैं।

प्रकरण काे लेकर काेर्ट में किसने क्या जवाब पेश किए

  • प्रतिवादी भगवत सिंह मेवाड़ ने एक ही जवाब काेर्ट में पेश किया इसके बाद उनका निधन हाे गया था। उन्हाेंने कहा कि वादग्रस्त संपत्ति 4 जुलाई 1955 उत्तराधिकार में प्राप्त हुई। वादी का वादग्रस्त संपत्ति में आधिपत्य नहीं है। वाद लाने से पूर्व वादी काे जाे रुपया दिया वह ब्याज सहित लाैटावें। उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त संपत्ति रूल ऑफ प्राइमाेजिनेचर से शासित है। यह संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति नहीं है। भूपाल सिंह स्वयं भी संपत्ति के पूर्ण एक मात्र स्वामी थे।
  • अरविंद सिंह मेवाड़ ने 13 जुलाई 2015 काे शपथ पत्र में कथन किया कि मेवाड़ राज्य के प्रथम शासक बप्पा रावल और अंतिम शासक महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ हुए। तब से लेकर अब तक ज्येष्ठता के नियमानुसार (रूल ऑफ प्राइमाेजिनेचर) मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। मेवाड़ राज्य के सभी शासकाें ने संपत्तियों काे पूर्ण स्वामित्व के रूप में धारित किया। राज्य कतई संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति नहीं हाेता। जन्म से किसी काे काेई हक उत्पन्न नहीं हाेता और रूलर के निधन के बाद न ताे कतई उनके पुत्राें में बंटवारा हाेता है और न ही सरवाइवशिप के सिद्धांत अनुसार ही डिवाेलेशन हाेता है। काेर्ट में कई तथ्य भी पेश किए।

काेर्ट का आदेश : इन संपत्तियों में भी पक्षकाराें का 25-25% हिस्सा

  • लेक पैलेस हाेटल्स एवं माेटल प्रा.लि. काे विक्रय की गई संपत्तियां जग निवास, जग मंदिर, माेटर गैराज, हरिदास जी की मगरी का आंतरिक और बाहरी भाग, बंशीघाट से गणगाैर घाट के बीच की संपत्ति यथा पीपलीघाट, पार्वती निवासी आदि, खास ओदी, शिव निवास का बेसमेंट और लेक शाेर हाेटल प्रा.लि. काे लीज पर दी गई संपत्ति शिव निवास में वादी महेन्द्र सिंह का एक चाैथाई हिस्सा है।
  • जगन निवास पैलेस मय गार्डन, जग मंदिर पैलेस मय गार्डन, समाेर बाग बिल्डिंग और गार्डन, चंपा बाग पैलेस मय गार्डन, नाहर मगरा पैलेस मय बगीचे, वकालात हाउस और ओल्ड पंचायत ऑफिस, शीतला माता मंदिर के पास मकान है, अरसी विलास (एक बरामदा और कुछ भूमि), हरिदास जी की मगरी मय बिल्डिंग।
  • सहेलियाें की बाड़ी गार्डन मय पैलेस और बाहरी कंपाउंड में छाेटा बंगला, उक्त संपत्ति के तीन भाग है। प्रथम भाग जाे राज्य सरकार काे विक्रय किया गया काे छाेड़कर द्वितीय भाग जाे विभिन्न व्यक्तियाें काे विक्रय किया गया और तृतीय भाग जाे प्रतिवादी भगवत सिंह मेवाड़ के कब्जे में हैं। गैराज, तीतारड़ीगढ़, ललित बाग, दीवान ओदी, फतहसागर के पास भवन मय चाैकीदार क्वाटर।
  • पैलेस और गार्डन मय फर्नीचर, इलेक्ट्रिक फिटिंग और इसके साथ जुड़े स्टाेर्स, इंजन पंप आदि।

वाद में बताया-संपत्ति में अधिकार नहीं दिया तो मजबूरन दर्ज करवाया था वाद

अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह कच्छवाह के जरिए दर्ज वाद के अनुसार महेन्द्र सिंह ने अपने पिता महाराणा भगवत सिंह पुत्र भूपाल सिंह, भाई अरविंद सिंह, मां महारानी सुशीला, दादी राजमाता विरद कुंवर के  खिलाफ 22 अप्रैल 1983 काे जिला न्यायाधीश के समक्ष वाद पेश किया था।

वाद में बताया था कि जनवरी 1983 में भगवत सिंह ने विधिक अधिकार देने से इंकार कर दिया। इसी कारण मजबूरन वाद संस्थित करना पड़ रहा है। 15 अप्रैल 1948 काे मेवाड़ के अंतिम महाराणा भूपाल सिंह ने भारत सरकार के साथ अंगीकार पत्र हस्ताक्षर किए थे।

शंभु निवास पैलेस का फोटो।

सरकार ने राज्य संपत्तियाें से भिन्न भूपाल सिंह के लिए चल एवं अचल संपत्तियाें की सूची की पुष्टि की थी। 4 जुलाई 1955 काे उनका निधन हाे गया। भगवत सिंह की सभी संपत्तियां हिंदू अविभक्त कुटुंब की रही। महेन्द्र सिंह और परिवार के सभी सदस्य संपत्ति में विधिपूर्ण हकदार हैं। भगवत सिंह ने कुटुंब की विभिन्न संपत्तियाें काे अपने द्वारा प्रारंभ की गई लेक पैलेस हाेटल्स एंड माेटेल्स प्रा.लि. और लेक शाेर हाेटल्स प्रा.लि. में एकपक्षीय रूप से अंतरित कर दी।

लेक पैलेस में वादी महेन्द्र सिंह और प्रतिवादी अरविंद सिंह अल्पसंख्यक शेयर धारक हैं। संपत्तियों का जाे भी प्रबंधन किया उसके बारे में वादी काे जानकारी नहीं हुई। प्रतिवादी भगवत सिंह द्वार बनाए गए सभी न्यास अवैध हैं। महाराणा मेवाड़ फेमिली ट्रस्ट, चेतक ट्रस्ट और मानव धर्म ट्रस्ट में अंतरिम की गई संपत्ति विभाजन याेग्य है। 

फैसला देखने के बाद जो भी न्यायिक प्रक्रिया हमें उपलब्ध होगी, उससे हम आगे चलेंगे : अरविंद सिंह

कोर्ट का निर्णय शिरोधार्य है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले की कॉपी अभी तक मेरे पास आई नहीं है। इसलिए फैसला देख नहीं पाए हैं। फैसला देखने के बाद जो भी कोई न्यायिक प्रक्रिया हमें उपलब्ध होगी उससे हम आगे चलेंगे। 
- अरविंद सिंह मेवाड़

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