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बरवाषण माता:संतान प्राप्ति को तालाब किनारे पत्थर उठाते हैं भक्त, हाथ में जाेत लिए 60 किमी दूर छोटी बहन चामुंडा मां के घर जाते थे पुजारी

उदयपुरएक महीने पहले
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उदयपुर से 30 किमी दूर कड़िया लोसिंग गांव में अरावली की वादियों के बीच बरवाषण माता का मंदिर स्थित है। - Dainik Bhaskar
उदयपुर से 30 किमी दूर कड़िया लोसिंग गांव में अरावली की वादियों के बीच बरवाषण माता का मंदिर स्थित है।
  • बरवाषण से गादोली की पैदल यात्रा 6 घंटे में पूरी करते थे पुजारी, महिषासुर मर्दनी के रूप में हैं माता

उदयपुर से 30 किमी दूर कड़िया लोसिंग गांव में अरावली की वादियों के बीच बरवाषण माता का मंदिर स्थित है। दो पहाड़ों के बीच में वास करने के कारण इसका नाम बरवाषण पड़ा। माता की दो बहनें हैं, जिनमें से एक मुख्य मंदिर से 300 फीट दूरी पर तालाब के किनारे विराजित हैं तो दूसरी 60 किमी दूर गादोली गांव में चामुंडा मंदिर में महिषासुर मर्दनी के रूप में विराजित हैं।

मंदिर से जुडे रमाकांत आमेटा बताते हैं कि पहले यहां सप्तमी को जागरण, अष्टमी को यज्ञ-हवन के बाद शाम 6 बजे आरती होती थी। इसके बाद हाथ में जोत लेकर पुजारी पैदल गादोली मंदिर जाते थे। करीब 60 किमी की यह यात्रा 6 घंटे में पूरी होती थी। मंदिर के पुजारी रतनसिंग आसिया बताते हैं कि करीब 600 साल से पुराने इस मंदिर की स्थापना त्रिलोचन भट्ट ने की थी। पहले मूर्ति गोबर की थी, अब पत्थर की है।

संतान प्राप्ति के लिए लाेग मां के दरबार आते हैं। मंदिर के ठीक सामने तालाब किनारे पेड़ के नीचे एक गोल पत्थर रखा है। यह दिखने में छोटा लगता है लेकिन सैकड़ों लोग इसे उठा नहीं पाते। कहते हैं कि जो इस पत्थर को उठा लेते हैं, देवी उनकी मनोकामना पूरी करती हैं।

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